फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages

याद करो कुर्बानी : आठ गांवों को जलाने के बाद बसा था प्रयागराज का सिविल लाइंस, 1857 में रखी गई थी आधारशिला

Thu, 11 Aug 2022 07:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Aug 2022 07:02 AM IST
सार

शहर के मध्य स्थित प्राकृतिक क्षेत्र में समदाबाद, छीतपुर, रसूलपुर समेत आठ गांव थे, जिन्हें अंग्रेजों ने पूरी तरह से जलाकर बर्बाद कर दिया। इन गांवों पर कब्जे के बाद इलाहाबाद का सिविल लाइंस क्षेत्र 1858 में मूर्त रूप में आया। इसके एक हिस्से में अंग्रेजों ने अल्फ्रेड पार्क बनाया, जिसे अब शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क कहा जाता है।

विज्ञापन
Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages
Prayagraj News : नेहरू पार्क मोड़ के पास स्थित शहीद स्थल फांसी इमली। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शहर के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस की आधारशिला 1857 की क्रांति के दौरान हुए खूनी संघर्ष पर रखी गई। अंग्रेजी हुकूमत की ओर से आठ गांवों को जलाए जाने और तकरीबन छह हजार क्रांतिकारियों मौत के घाट उतारे जाने के बाद 1858 में यह इलाका बसाया गया।
विज्ञापन



मेरठ में हुई क्रांति की सूचना 12 मई 1857 को इलाहाबाद पहुंची और यहां तनाव फैल गया। छह जून 1857 की रात यहां संघर्ष शुरू हो गया। सैनिक छावनी क्षेत्र में क्रांतिकारी सैनिकों ने ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं थीं। आलोपीबाग सैन्य छावनी में तैनात लेफ्टिनेंट एलक्जेंडर के पास लेफ्टिनेंट हार्वर्ड मदद मांगने पहुंचे। 
विज्ञापन

Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages
Prayagraj News : सिविल लाइंस प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।

अलोपीबाग पलटन को मदद के लिए बुलाया गया, लेकिन भारतीय मूल के सैनिकों ने विद्रोहियों के खिलाफ हथियार उठाने से इनकार कर दिया और उनके समर्थन में उतर आए। भारतीय सिपाहियों ने संगम तट पर स्थित किले की घेराबंदी की और वहां मौजूद 30 लाख रुपये के सरकारी कोष पर कब्जा कर लिया। ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन इसे लोकप्रिय विद्रोह के रूप में विवेचित करते हैं।


विद्रोह की खबर जब कर्नल नील के पास पहुंची तो 11 जून 1857 को उसने विद्रोही सिपाहियों पर हमला कर दिया और 15 जून तक मुट्ठीगंज, कीडगंज पर  कब्जा कर लिया। इसके बाद खुसरोबाग पर भी हमला किया। स्वतंत्रता सेनानियों ने अप्रत्याशित रूप से ब्रिटिश सैनिकों से लोहा लिया, लेकिन वह टिक नहीं पाए। कर्नल नील ने निर्ममतापूर्वक विद्रोह का दमन कर दिया।


शहर के मध्य स्थित प्राकृतिक क्षेत्र में समदाबाद, छीतपुर, रसूलपुर समेत आठ गांव थे, जिन्हें अंग्रेजों ने पूरी तरह से जलाकर बर्बाद कर दिया। इन गांवों पर कब्जे के बाद इलाहाबाद का सिविल लाइंस क्षेत्र 1858 में मूर्त रूप में आया। इसके एक हिस्से में अंग्रेजों ने अल्फ्रेड पार्क बनाया, जिसे अब शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क कहा जाता है।

Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages
Prayagraj News : यहीं दी गई थी क्रांतिकारियों को फांसी। - फोटो : अमर उजाला।

1234 क्रांतिकारियों को दी थी फंसी 
कर्नल नील के आदेश पर कोतवाली के पास नीम के पेड़ और रोशनी के खंभों पर 600 स्वतंत्रता सेनानियों समेत मासूम बच्चों को फांसी पर लटका दिया गया था। ब्रिटिश इतिहासकार एफ. थॉमसन लिखते हैं कि हर दिन संदेहास्पद व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो रही थी और विशेष रूप से चार कमिश्नरों को इसके लिए अधिकृत किया गया था कि वे ऐसे मामलों को तेजी से निपटाएं। इसके तहत तीन घंटा और 40 मिनट की अवधि में ही संदेहास्पद व्यक्ति माने गए 634 अन्य क्रांतिकारियों को भी एक साथ कोतवाली के निकट फांसी पर लटकाया गया था। 

विज्ञापन

Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages
Prayagraj News : फांसी इमली, जहां दी गई थी क्रांतिकारियों को फांसी। - फोटो : अमर उजाला।

देखते ही मार दी जाती थी गोली
विद्रोही सैनिकों के अलावा नगर से सैकड़ों लोगों को दोषी मानकर गोली से उड़ा दिया गया था। इलाहाबाद में मेवाती और प्रयागवालों के नेतृत्व में पंडे स्वतंत्रता की लड़ाई में सबसे आगे रहे और सबसे अधिक सजा भी उन्हें ही मिली। जब अंग्रेज अफसर हेवलॉक पहुंचा तो उसने पाया कि कुछ लोगों ने अंग्रेजों के वहशीपन से बचने के लिए अपने गले में फंदा डालकर फांसी लगा ली थी, क्योंकि वे अंग्रेजों के आगे अपमानित नहीं होना चाहते थे। अंग्रेज जिस किसी को भी बाहर देखते थे, उसे गोली मार देते थे। अंग्रेज इतिहासकार कीन के अनुसार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे तक इस संघर्ष की आग में जले थे।

Civil Lines of Prayagraj was settled after burning eight villages
prayagraj news : चंद्रशेखर आजाद पार्क। - फोटो : prayagraj

आठ बैलगाड़ियों पर ढोए गए छह हजार शव
शासकीय अधिकारियों ने रिकार्ड पुस्तिका बनाई थी कि तीन माह तक आठ बैलगाड़ियों पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक मृतकों को ढोया जाता था। कहीं भी सड़क किनारे या बीच बाजार लोगों को फांसी दे दी जाती  थी। इस प्रकार 6000 शवों को नष्ट किया गया था। इसकी पुष्टि इतिहासकार पीएन पांडेय भी करते हैं। अंग्रेज इतिहासकार कीन लिखते हैं कि वृद्ध व्यक्ति हमारे के लिए हानिकारक नहीं थे, लेकिन उन्हें और आश्रयहीन महिलाओं को भी अंग्रेज सरकार ने नहीं बख्शा। बेहतर कद काठी वाले व्यक्ति फांसी पर लटकाए गए या उन्हें गोली मार दी गई।। महिलाओं को अपमानित किया जाता था और अंग्रेज उन्हें उठा ले जाते थे। 


पर इतिहास में उपेक्षित ही रह गए शहीद
इतिहासकार प्रो. योगेश्वर तिवारी इसे दुर्भाग्य मानते हैं कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इलाहाबाद के शहीदों का जो योगदान रहा, उसे अपेक्षित जगह और महत्व नहीं मिला। प्रो. तिवारी के अनुसार 1857 की इन घटनाओं को इतिहास में उचित जगह मिलनी चाहिए और इलाहाबाद के लोगों का 1857 की क्रांति में क्या योगदान रहा, इसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जानी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed