Prayagraj News: बढ़ेगा सर्किल रेट, मकान और रजिस्ट्री होगा महंगा, महाकुंभ में हुए विकास का दिखेगा असर
आने वाले दिनों में जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी होने के आसार हैं। जमीन के वास्तविक मूल्य के अनुरूप सर्किल रेट में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। इसके लिए तहसीलवार सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।
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आने वाले दिनों में जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी होने के आसार हैं। जमीन के वास्तविक मूल्य के अनुरूप सर्किल रेट में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। इसके लिए तहसीलवार सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। जिला प्रशासन की अगली बैठक में बढ़ोतरी का प्रारंभिक खाका तैयार होने की उम्मीद है। ज्यादातर इलाकों में जमीन और मकान के वास्तविक मूल्य व सर्किल रेट में काफी अंतर है। ज्यादातर स्थानों पर सर्किल रेट वास्तविक मूल्य से कम है। इसे देखते हुए शासन की ओर से सर्किल रेट संशोधित करने का निर्देश दिया गया है।
इसी क्रम में यहां भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विस्तारित क्षेत्रों के सर्किल रेट में अधिक बढ़ोतरी की तो बात की ही जा रही है, महाकुंभ के मद्देनजर हुए विकास कार्यों का भी इस पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। झलवा में एयरपोर्ट मार्ग के निर्माण के साथ कई अन्य विकास कार्य कराए गए हैं। इसकी वजह से झलवा से बमरौली, नीमसराय तक जमीन की मांग बढ़ी है। इसकी वजह से कीमत में भी इजाफा हुआ है।
इसी तरह से रिंग रोड और गंगा पर पुल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अरैल में साहित्य पार्क, शिवालय पार्क, मियावाकी पार्क समेत अनेक विकास कार्य कराए गए हैं। यह पूरा इलाका सबसे अधिक विकसित क्षेत्रों में शामिल हो गया है। गंगा और यमुना पर एक-एक पुल भी प्रस्तावित है। इन वजहों से झूंसी की तरफ सराय इनायत तो नैनी में करछना तक शहर का विकास होने की बात कही जा रही है। इन वजहों से जमीन की मांग बढ़ने के साथ कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है।
छह लेन का पुल बनने और लखनऊ मार्ग के चौड़ीकरण से फाफामऊ में भी रजिस्ट्री बढ़ी है। इतना ही नहीं यमुना पार का शंकरगढ़, कोरावं समेत बड़ा इलाका औद्योगिक रूप से विकसित हो रहा है। यहां डिस्टिलरी, सीमेंट फैक्ट्री समेत कई उद्योग लगे भी हैं। इसी तरह से सोरांव समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी औद्योगिक क्षेत्र में विकसित किया जा रहा। इन वजह से भी इन क्षेत्रों के विकास के साथ जमीन की मांग बढ़ी है। सर्किल रेट पर इसका प्रभाव पड़ने के आसार हैं।
जानकारों का कहना है कि इन क्षेत्रों में दो साल पहले सर्किल रेट में बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन अब भी जमीन की वास्तविक कीमत व सर्किल रेट में काफी अंतर है। ऐसे में सर्किल रेट में 10 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, अफसर अभी इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
2022 में 10 फीसदी तक हुई थी बढ़ोतरी
पिछली बार दिसंबर 2022 में सर्किल रेट का पुनरीक्षण हुआ था। उस समय भी नैनी, झूंसी, झलवा आदि विस्तारित क्षेत्रों के सर्किल रेट में ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी। इन क्षेत्रों में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई थी। इन दो वर्षों में शहर का दायरा और बढ़ा है। साथ ही अनेकों विकास कार्य कराए गए हैं। ऐसे में इस बार भी इन क्षेत्रों के सर्किल रेट में अधिक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। इसके अलावा सिविल लाइंस, मम्फोर्डगंज समेत शहर के कई इलाकों में भी अपार्टमेंट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह से खासतौर पर सिविल लाइंस के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
राजस्व बढ़ने के साथ काश्तकारों को भी होगा फायदा
सर्किल रेट में बढ़ोतरी से जमीन और भवन की खरीद पर स्टाम्प शुल्क बढ़ जाएगा। इससे निबंधन विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी पर पुल, लाइट मेट्रो, आवासीय योजनाओं समेत कई बड़े निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। इनके लिए जमीन अधिग्रहित करनी पड़ेगी। चूंकि, काश्तकारों को सर्किल रेट के आधार पर ही मुआवजा दिया जाता है। ऐसे में सर्किल रेट में बढ़ोतरी का फायदा किसानों और काश्तकारों को भी होगा।
दिसंबर 2022 में वर्तमान सर्किल रेट लागू हुआ था। इसके बाद अब पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे लेकर 27 मई को बैठक हुई थी। अब तहसीलवार सर्वे शुरू कर दिया गया है। जल्द ही फिर बैठक होगी। इसमें सर्किल रेट से संबंधित प्रारंभिक आंकड़े रखे जाएंगे। कोशिश होगी कि जमीन की वास्तविक कीमत और सर्किल रेट में एकरूपता लाई जा सके। - राकेश चंद्रा, एआईजी स्टाम्प