Chandrayaan 3 Landing : लैंडिंग कर इतिहास बनाएगा चंद्रयान, हीलियम गैस का भंडार खोज सकता है विक्रम लैंडर
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक प्रो. जेके पति चंद्रयान प्रथम की डेटा एनालिसिस टीम के सदस्य रह चुके हैं। प्रो. जेके पति ने बताया कि चंद्रयान को उतरने के लिए काफी एनर्जी चाहिए। चांद के साउथ पोल पर सूर्य की रोशनी कम पड़ती है। ऐसे में सॉफ्ट लैंडिंग में थोड़ी देर भी हो सकती है।
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चंद्रयान तृतीय बुधवार शाम चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने जा रहा है। चांद के इस हिस्से पर दुनिया का कोई भी देश आज तक नहीं पहुंचा है। यहां हीलियम गैस भी मौजूद है। अगर विक्रम लैंडर ने हीलियम का भंडार खोज निकाला तो भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में ऊंची छलांग लगाएगा।
यह कहना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक प्रो. जेके पति का, जो चंद्रयान प्रथम की डेटा एनालिसिस टीम के सदस्य रह चुके हैं। प्रो. जेके पति ने बताया कि चंद्रयान को उतरने के लिए काफी एनर्जी चाहिए। चांद के साउथ पोल पर सूर्य की रोशनी कम पड़ती है। ऐसे में सॉफ्ट लैंडिंग में थोड़ी देर भी हो सकती है।
सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत के लिए भविष्य के दरवाजे खुल जाएंगे और इसके बाद सैंपल रिटर्न मिशन पर काम शुरू हो जाएगा। इसके तहत हम चांद से पत्थर, मिट्टी, गैस आदि के नमूने पृथ्वी पर लाकर अध्ययन कर सकेंगे। चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद उसमें से विक्रम लैंडर निकलेगा, जिसमें सेंसर आधारित लिब्स नाम का उपकरण है।
यह उपकरण वहां मिलने वाले पत्थरों, मिट्टी, गैस आदि का अध्ययन करेगा। इससे पता चल सकेगा कि चांद पर जीवन की कितनी संभावनाएं हैं। यह उपकरण मून क्विक्स के बारे में भी बताएगा, जिसे हम पृथ्वी पर भूंकप कहते हैं। अगर यह उपकरण हीलियम गैस का भंडार खोज लेता है तो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
प्रो. जेके पति ने बताया कि कि इस चंद्रयान तृतीय के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला वैज्ञानिक उद्देश्य और दूसरा तकनीकी उद्देश्य। चंद्रयान द्वितीय के मुकाबले चंद्रयान तृतीय के वैज्ञानिक उद्देश्य में तो बहुत परिवर्तन नहीं किए गए हैं, लेकिन तकनीकी उद्देश्य को देखें तो कई परिवर्तन हुए हैं। पिछली बार पांच बूस्टर लगाए गए थे। इस बार बेहतर संतुलन के लिए चार बूस्टर लगाए गए हैं।
चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भविष्य में न सिर्फ चांद, बल्कि मंगल गृह पर भी सैंपल रिटर्न मिशन पर काम हो सकेगा। एक बार सॉफ्ट लैंडिंग हुई तो भविष्य में बेहतर तकनीक के साथ चांद और मंगल गृह पर मिशन को आसान बनाया जाएगा।