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सीबीआई-टाटा संबंधी बैजल के आरोपों में विरोधाभास
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Wed, 27 May 2015 01:49 AM IST
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नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के पूर्व चेयरमैन प्रदीप बैजल के टूजी मामले में सीबीआई द्वारा रतन टाटा को फंसाने की पेशकश संबंधी कथित खुलासे में कई विरोधाभास हैं। यही वजह है कि सीबीआई बैजल के आरोपों को गंभीरता से नहीं ले रही। बैजल ने अपनी किताब में आरोप लगाया है कि सीबीआई उन पर टूजी मामले में रतन टाटा और अरुण शौरी के खिलाफ बयान देने का दबाव बना रही थी। बैजल के मुताबिक सीबीआई ने कहा था कि अगर वह टाटा और शौरी के खिलाफ बयान दे देते हैं तो उन्हें मामले से बाहर कर दिया जाएगा। टूजी मामले से जुड़े सीबीआई अधिकारी हैरान हैं कि ट्राई के पूर्व चेयरमैन ने किस आधार पर ये आरोप लगाए हैं।
सीबीआई अधिकारी ने बताया कि बैजल खुद टूजी मामले में आरोपी नहीं हैं। हालांकि उनके खिलाफ पीई के तहत जांच हुई। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के टेप में उनकी बातचीत के भी प्रमाण मिले लेकिन इससे बैजल का कोई अपराध साबित नहीं हो पा रहा था। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जहां तक रतन टाटा या उनकी कंपनी का सवाल है तो उनके खिलाफ भी कोई मामला नहीं बना। हालांकि यूनिटेक के मामले में टाटा के खिलाफ जांच जरूर हुई। इसमें सीबीआई ने पाया कि टाटा खुद इस मामले में पीड़ित के तौर पर थे।
यह समीकरण देखा जाए तो टाटा के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बन रहा था। सूत्रों ने बताया कि अगर बैजल के आरोपों को सही माना जाए तो उन्हें सीबीआई का आरोपी होना चाहिए था क्योंकि उन्होंने टाटा के खिलाफ बयान नहीं दिया। लेकिन हालात यह है कि टूजी में न तो बैजल आरोपी हैं और न ही रतन टाटा। गौरतलब है कि बैजल हिंदुस्तान जिंक और लक्ष्मी विलास होटल विनिवेश मामले में आरोपी हैं।
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सीबीआई अधिकारी ने बताया कि बैजल खुद टूजी मामले में आरोपी नहीं हैं। हालांकि उनके खिलाफ पीई के तहत जांच हुई। कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के टेप में उनकी बातचीत के भी प्रमाण मिले लेकिन इससे बैजल का कोई अपराध साबित नहीं हो पा रहा था। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जहां तक रतन टाटा या उनकी कंपनी का सवाल है तो उनके खिलाफ भी कोई मामला नहीं बना। हालांकि यूनिटेक के मामले में टाटा के खिलाफ जांच जरूर हुई। इसमें सीबीआई ने पाया कि टाटा खुद इस मामले में पीड़ित के तौर पर थे।
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यह समीकरण देखा जाए तो टाटा के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बन रहा था। सूत्रों ने बताया कि अगर बैजल के आरोपों को सही माना जाए तो उन्हें सीबीआई का आरोपी होना चाहिए था क्योंकि उन्होंने टाटा के खिलाफ बयान नहीं दिया। लेकिन हालात यह है कि टूजी में न तो बैजल आरोपी हैं और न ही रतन टाटा। गौरतलब है कि बैजल हिंदुस्तान जिंक और लक्ष्मी विलास होटल विनिवेश मामले में आरोपी हैं।
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