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परीक्षा स्थगित कराने को आईपीएस अफसर ने लिखा पत्र

Fri, 07 Aug 2020 01:21 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 01:21 AM IST
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Beo and bed exam
-अमिताभ ठाकुर की आयोग अध्यक्ष से अपील, कुछ दिनों के लिए टाल दें बीईओ प्रारंभिक परीक्षा
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-प्रतियोगी छात्रों मुख्यमंत्री, राज्यपाल से लगाई गुहार, यूपीपीएससी की मनमानी पर भी उठाए सवाल
प्रयागराज। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने 16 अगस्त को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ)-2016 की परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इस मामले में आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर परीक्षा को कुछ दिनों के लिए टालने की मांग की है। वहीं, प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर बीईओ प्रारंभिक परीक्षा स्थगित करने की मांग की है और यूपीपीएससी पर मनमानी करने का आरोप लगाया है।
आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने आयोग को अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि यद्यपि परीक्षा को जल्दी संपादित कराए जाने का उद्देश्य छात्र हित में है, लेकिन कोरोना के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के बीच परीक्षा कराने से अभ्यर्थियों को क्षति पहुंचने और उनके स्वास्थ्य पर खतरा होने की आशंका है। परीक्षा केंद्रों के अंदर तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सकता है लेकिन परीक्षा केंद्र तक आने जाने, होटल आदि में रुकने, परीक्षा केंद्र के भीतर आने-जाने में सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन होगा। ऐसे में परीक्षा को स्थगित करने और स्थिति बेहतर होने पर ही परीक्षा करवाना ठीक होगा।
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दूसरी ओर भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह के नेतृत्व में प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को ई-मेल के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर परीक्षा स्थगित किए जाने की मांग की है। कौशल का कहना है कि इस मामले में न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की जा रही है। साथ ही मुख्य न्यायाधीश को भी डाक के माध्यम से पत्र भेजकर मामले में संज्ञान लेने की मांग की गई है। छात्रों ने सीएम और राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा गया है कि बीईओ परीक्षा के लिए जिन 18 जिलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, उनमें कोरोना के मद्देनजर पांच जिले प्रयागराज, लखनउऊ, आगरा, गोरखुपर और कानपुर अतिसंवेदनशील हैं। कुछ प्रतियोगी छात्र कोरोना पॉजिटिव हैं या उनके परिवार के सदस्य पॉजिटिव हैं और ज्यादातर छात्रों का घर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में है।
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इसके अलावा बहुत से छात्र लॉकडाउन में अपने घर चले गए थे। कुछ छात्र मूल रूप से यूपी के हैं लेकिन वर्तमान में दिल्ली, बिहार, चंडीगढ़, उत्तराखंड जैसे दूसरो राज्यों में रह रहे हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक उनके लिए पहुंचना मुश्किल होगा। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए 31 अगस्त तक सभी सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित हैं। सभी स्कूल-कॉलेज भी 31 तक बंद रहेंगे। किसी भी कार्य में 50 से अधिक लोग नहीं जुट सकते, जबकि एक केंद्र में पांच सौ से अधिक छात्र इकट्ठा होंगे। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का खुलेआम उल्लंघन होगा। अभ्यर्थियों ने यह सवाल भी उठाया है कि जब कोविड-19 के कारण 25 अगस्त से प्रस्तावित पीसीएस मेंस-2019 को स्थगित कर दिया गया तो बीईओ की परीक्षा क्यों स्थगित नहीं हो सकती, जबकि इसमें साढ़े पांच लाख छात्रों को शामिल होना है, जो पीसीएस मेंस के मुकाबले कई गुना अधिक है।
बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार नहीं शिक्षक संघ
-लखनऊ विश्वविद्यालय को लिखा पत्र, परीक्षा स्थगित करने की मांग
प्रयगाराज। प्रदेश में नौ अगस्त को प्रस्तावित बीएड प्रवेश परीक्षा के आयोजन के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) भी तैयार नहीं है। ऑक्टा महाचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर परीक्षा स्थगित किए जाने की मांग की गई है।
महासचिव की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि प्रवेश परीक्षा में प्रदेश के 73 जनपदों में सैकड़ों केंद्र में चार लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिसमें बड़ी संख्या छात्राओं की है। हजारों परीक्षार्थियों का केंद्र दूसरे जिलों में है और मौजूदा परिस्थितियों में वहां ोआना-जाना कापुी कठिनन होगा। छात्राओं के साथ अभिभावक भी होते हैं। प्रदेश में जब हजारों लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं और संक्रमण तेजी से फैल रहा है, तब लोगों की जान को जोखिम में डालकर परीक्षा कराना उचित नहीं है। प्रयागराज में ही प्रतिदिन लगभग डेढ़ सौ नए कोरोना संक्रमिमत मिल रहे हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में कक्षाएं बंद हैं और लगभग सभी कार्य ठप पड़े हैं। ऐसे में परीक्षा कार्य कराना खतरे से खाली नहीं है।

ऐसे में परीक्षा स्थगिगत करना ही उचित रहेगा ताकि प्रदेश के युवाओं सहित शिक्षकों एवं अन्य संलग्न लोगों के जीवन की रक्षा हो सके। दूसरी ओर, सीएमपी डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष करन सिंह परिहार ने भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर परीक्षा स्थगित कराने की मांग की है।
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