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पीएफ घोटाले में निदेशक वित्त की जमानत खारिज
Wed, 08 Apr 2020 11:57 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Apr 2020 11:57 PM IST
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- फोटो : court
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के पावर कारपोरेशन के पीएफ घोटाले के आरोपी सुधांशु द्विवेदी और घोटाले में सहयोगी विकास चावला की जमानत अर्जी खरिज कर दी है। लॉकडाउन के दौरान लंबित जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति डीके सिंह ने सुनवाई की।
याचीगण पर पावर कारपोरेशन के कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड की जमा राशि को प्राइवेट सेक्टर की कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में अवैध और गैरकानूनी रूप से निवेश कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। सुधांशु उस वक्त निदेशक यूपीपीसीएल वित्त के पद पर थे और फंड की देखभाल के लिए गठित ट्रस्ट के भी सदस्य और निदेशक वित्त थे।
आरोप है कि इन लोगों ने करोड़ों रुपये की दलाली डीएचएफएल से लेकर कर्मचारियों की भविष्य निधि की रकम प्राइवेट कंपनी में लगा दी। निचली अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाइकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।कोर्ट ने विकास चावला की जमानत पर भी साथ ही सुनवाई की।
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कहा कि आरोपी ने डीएचएफएल से 5.69 करोड़ रुपये की दलाली सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त की। इसका साक्ष्य उपलब्ध है। वह यह भी साबित नहीं कर सका की उसका कंपनी का कोई लेना देना नहीं है।
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याचीगण पर पावर कारपोरेशन के कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड की जमा राशि को प्राइवेट सेक्टर की कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में अवैध और गैरकानूनी रूप से निवेश कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। सुधांशु उस वक्त निदेशक यूपीपीसीएल वित्त के पद पर थे और फंड की देखभाल के लिए गठित ट्रस्ट के भी सदस्य और निदेशक वित्त थे।
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आरोप है कि इन लोगों ने करोड़ों रुपये की दलाली डीएचएफएल से लेकर कर्मचारियों की भविष्य निधि की रकम प्राइवेट कंपनी में लगा दी। निचली अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाइकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।कोर्ट ने विकास चावला की जमानत पर भी साथ ही सुनवाई की।
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कहा कि आरोपी ने डीएचएफएल से 5.69 करोड़ रुपये की दलाली सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त की। इसका साक्ष्य उपलब्ध है। वह यह भी साबित नहीं कर सका की उसका कंपनी का कोई लेना देना नहीं है।