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कोटवा में बदइंतजामी का आरोप लगाने में घिरे ऑक्टा महासचिव

Tue, 23 Jun 2020 04:27 PM IST
news desk amar ujala, prayagraj Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Tue, 23 Jun 2020 04:27 PM IST
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Aucta Secretary General surrounded in accusations of misconduct in Kotwa
कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए कोटवा लेवल-1 अस्पताल में बादइंतजामी का आरोप लगाने के मामले में ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह चौतरफा घिर गए हैं।
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उन्होंने अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित इलाहाबाद विश्वविद्याल के लाइब्रेरियन के हवाले से अस्पताल में अव्यवस्था की बात सोशल मीडिया पर वायरल की है, जबकि लाइब्रेरियन ने इसका खंडन कर दिया है और जिला प्रशासन को पत्र भेजकर तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने के लिए डॉ. उमेश प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

साथ ही लाइब्रेरियन ने अपना वीडियो भी प्रशासन को भेजा है, जिसमें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि अस्पताल में सबकुछ ठीक चल रहा है और मरीज को किसी तरह की शिकायत नहीं है। मामले में सीएमओ ने एफआई दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। ईसीसी में शिक्षक एवं ऑक्टा महासाचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने फेसबुक पर लिखा है कि इविवि के लाइब्रेरियन के एक शुभचिंतक ने उन्हें बताया है कि कोटवा में भर्ती लाइब्रेरियन वहां की बदइंतजामी से परेशान हैं।
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उन्हें अस्पताल में किसी प्रकार की कोई दवा नहीं दी जा रही है और दिन में एक बार नाप कर काढ़ा दिया जाता है। वहां 25 लोग हैं और एक-एक कमरे में सात-आठ लोग हैं, जिनके बीच केवल दो टॉयलेट हैं और वह भी बेहद गंदे। वहां अव्यवस्था, असुविधा एवं अनहाईजेनिक स्थिति है। लोग डरे हुए हैं और एक-एक दिन काटना मुश्किल है।
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वहां सफाई कर्मचारी ही नर्स और डॉक्टर की भूमिका में रहता है। डॉक्टर और नर्स 15 फीट दूर से निर्देश देते हैं। डॉ. उमेश प्रताप सिंह की ओर से फेसबुक पर यह मामला वायरल किए जाने के बाद हड़कंप मचा गया और इसके कुछ देर बाद ही लाइब्रेरियन ने इसका खंडन कर दिया। लाइब्रेरियन ने फेसबुक पर लिा कि ईसीसी के डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने मेरे हवाले से बिल्कुल असत्य एवं भ्रामक बात लिखी है। कहीं न कहीं से ऐसा प्रतीत होता है कि यह मुझे व्यक्तिगतरूप से सामाजिक स्तर पर बदनाम करने की साजिश है।

इस अवधि की फोन कॉल की हिस्ट्री निकाल कर देख ली जाए। कई महीने से मेरी डॉ. उमेश प्रताप सिंह से बात नहीं हुई है। अस्पताल में साफ-सफाई के साथ खानपान की संतोषजनक व्यवस्था है। सबकुछ समय पर मिल रहा है। डॉक्टर, नर्स और स्वीपर बार-बार आते हैं। संतोषजनक ढंग से सभी रोगियों की देखभाल की जा रही है। लाइब्रेरियन ने प्रशासन को पत्र और अपना वीडियो भेजकर मांग की है कि तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


उधर, डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि लाइब्रेरियन ने कोटवा जाने के बाद अपने कई करीबियों से वहां की अव्यवस्था के बारे में बात की थी। मैंने सिर्फ कमी को उजागर किया। मामले सामने आने के बाद लाइब्रेरियन अब खुलकर बोलने से डर रहे हैं। उधर, सीएमओ डॉ. जीएस बाजपेयी ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
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