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हाईकाेर्ट : भ्रष्टाचार के आरोपी सींचपाल की अग्रिम जमानत मंजूर, हरियाली योजना के रुपये में बंदर बांट का आरोप

Mon, 04 Sep 2023 02:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 04 Sep 2023 02:36 PM IST
सार

यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने आरोपी सींचपाल ब्रहमानंद सिंह की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला बहराइच जिले के लखनापुर गांव में सरकारी धन के बंदरबांट का है।

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Anticipatory bail granted to irrigation officer accused of corruption
court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरियाली योजना के तहत पौधरोपण की मद के रुपये में बंदरबांट करने के आरोपी सींचपाल की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपये की दो जमानतें दाखिल करने का आदेश दिया है।

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यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने आरोपी सींचपाल ब्रहमानंद सिंह की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला बहराइच जिले के लखनापुर गांव में सरकारी धन के बंदरबांट का है। वित्तीय वर्ष 2008-09 में शासन ने हरियाली योजना के तहत लखनपुर गांव में पौधरोपण के लिए 16 लाख 20 हजार रुपये आवंटित किए गए थे। पौधरोपण की देखरेख का जिम्मा तत्कालीन ग्राम प्रधान श्रीमती रामरजा और तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी दिनेश कांत श्रीवास्तव समेत पांच लोगों को दिया गया था।
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याची सींचपाल ब्रहमानंद सिंह को कार्य प्रभारी बनाया गया था। पौधरोपण के कार्य में वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर शासन ने विजिलेंस जांच करवाई। जांच में ऐसे लोगों के नाम और अंगूठे के निशान श्रमिकों की सूची में पाया गया जिनमें कुछ तो सरकारी नौकरी में थे।

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भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज है मुकदमा

गोरखपुर विजिलेंस के निरीक्षक श्रीधराचार्य पांडेय ने तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी दिनेश कांत श्रीवास्तव, भूमि संरक्षण निरीक्षक अजय कुमार गौतम, तत्कालीन अवर अभियंता कैलाश राम यादव और महिला ग्राम प्रधान रामरजा के खिलाफ सरकारी धन के गबन, दुरुपयोग, कूट रचना, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।

मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। याची ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। दलील दी कि याची सींचपाल के पद पर कार्यरत था। याची के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं था। वित्तीय अधिकारों का गलत प्रयोग करने के आरोपी उच्चाधिकारियों की अग्रिम जमानत मंजूर की जा चुकी है। याची की दलील पर कोर्ट ने याची की अर्जी मंजूर कर ली।

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