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amarnath yatra : अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से हुए हादसे में बेल्हा के आठ श्रद्धालु भी फंसे, मिलिट्री कैंप में रोका गया
Sun, 10 Jul 2022 12:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 10 Jul 2022 12:43 AM IST
सार
शनिवार को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए गए लालगंज कोतवाली के सगरासुंदरपुर गांव की प्रधान पूनम जायसवाल (48) व उनके पति रामजी जायसवाल (51) ने मिलिट्री कैंप से फोनकर परिजनों को आपबीती सुनाई तो लोग सिहर उठे।
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अमरनाथ यात्रा के दौरान फंसे प्रतापगढ़ से गए श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
अमरनाथ गुफा के करीब तेज धमाकों के बीच बादल फटने से आए सैलाब से कलेजा दहल उठा। मौत करीब से छूकर निकल गई। यात्रियों के ठहराव के लिए बनाए गए टेंट बहने लगे। मंजर इतना भयावह था कि कुछ सूझ नहीं रहा था। हमारी आंखों के सामने ही कई श्रद्धालु सैलाब में बह गए। भगदड़ के बीच सुरक्षा बलों ने मिलिट्री कैंप में शरण दिलाई। रातभर सांसें अटकी रहीं। अभी हम रास्ते में फंसे हैं, लेकिन सुरक्षित हैं।
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शनिवार को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए गए लालगंज कोतवाली के सगरासुंदरपुर गांव की प्रधान पूनम जायसवाल (48) व उनके पति रामजी जायसवाल (51) ने मिलिट्री कैंप से फोनकर परिजनों को आपबीती सुनाई तो लोग सिहर उठे। पूनम व रामजी के साथ ही मिलिट्री कैंप में सांगीपुर के ऋषि द्विवेदी, उनकी पत्नी वंदना, राजकुमार शुक्ल, राजीव शुक्ल व लक्ष्मणपुर के शिवबोझ गांव निवासी विपिन पांडेय ने भी शरण ली है।
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लालगंज कोतवाली के सगरासुंदरपुर गांव की प्रधान पूनम जायसवाल (48) व उनके पति रामजी जायसवाल (51) छह जुलाई को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा पर निकले थे। शुक्रवार को दोनों यात्रा अमरनाथ यात्रा के दौरान पहाड़ों के बीच आगे बढ़ रहे थे। दोनों अमरनाथ गुफा के करीब पहुंचने वाले थे। उन्हें जरा भी आभास नहीं था कि थोड़ी ही देर में पहाड़ों के बीच बड़ा उथल-पुथल होने वाला है। रामजी जायसवाल ने बताया कि तेज धमाकों के बाद अचानक सामने से सैलाब आ गया।
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कई लोग बह गए। चीखपुकार के बीच भगदड़ मच गई। हमने किसी तरह पहाड़ के एक कोने में बैठकर जान बचाई। टेँट सिटी के पंडाल पानी में बहने लगे। चारों तरफ अंधेरा छा गया था। बस, मौत छूकर निकल गई। थोड़ी देर बाद आपदा प्रबंधन दल के लोग पहुंचे और श्रद्धालुओं की मदद शुरू की। उन्हें रामवन के पास मिलिट्री कैंप में ले जाया गया। इसी तरह सांगीपुर के ऋषि द्विवेदी (44) व उनकी पत्नी वंदना भी रास्ते में फंसी हैं। घर फोन कर दोनों ने बताया कि वे सुरक्षित है। मिलिट्री कैंप में हैं। हादसे के बाद स्थिति काफी खराब हो गई थी। मंजर बहुत भयावह था।
कैंप में है खाने-पीने का इंतजाम
सांगीपुर के राजकुमार शुक्ल, राजीव शुक्ल और लक्ष्मणपुर ब्लॉक के शिवबोझ गांव निवासी विपिन पांडेय भी बादल फटने के बाद रास्ते में फंस गए। परिजनों को फोन कर आपबीती सुनाई तो घरवालों के रोंगटे खड़े हो गए। बताया कि ऐसा लग रहा था कि यहां से अब सुरक्षित निकल पाना मुश्किल है, लेकिन तभी आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग पहुंचे और उन्हें सुरक्षित चाशनी सुरंग के पास स्थित मिलिट्री कैंप में पहुंचाया। लंगर में खाने-पीने का इंतजाम है। सभी लोग यहां सुरक्षित हैं।