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अमर उजाला युवा कुंभ : मानवता की संस्कृति का साफ्टवेयर बनेगा महाकुंभ, वैश्विक चेतना से जोड़ने की अनूठी पहल

Fri, 25 Oct 2024 06:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 25 Oct 2024 06:52 PM IST
सार

मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि यह महाकुंभ युवाओं के संस्कृति और संस्कार की ही नहीं जीवन के असली मूल्यबोध का भी समागम बनेगा। खासतौर से इंजीनियरिंग के छात्रों को महाकुंभ की सांस्कृतिक-सामाजिक चेतना की तकनीक तलाशनी होगी।

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Amar Ujala Yuva Kumbh: Mahakumbh will become the software of humanity's culture
अमर उजाला युवा महाकुं में मौजूद अतिथिगण और छात्र। - फोटो : अमर उजाला।

विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में संगम पर लगने वाला महाकुंभ इस बार दुनिया के लिए मानवता की संस्कृति का साफ्टवेयर बनेगा। इस बार के महाकुंभ में 135 से अधिक देशों के विदेशी संत-भक्त और पर्यटक जहां कल्पवास और भारतीय सनातन जीवन शैली से परिचित हो सकेंगे। ऐसे में प्रयागराजवासियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। खास तौर से भारतीय आतिथ्य और सत्कार की जीवन शैली और उसके प्रबंधन को इस महाकुंभ में सीखा जा सकता है।














ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यह बातें शुक्रवार को नैनी के युनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के आडियोरियम में अमर उजाला की ओर से युवा कुंभ के तहत आयोजित ''वैश्विक एकता में महाकुंभ की संस्कृति का प्रभाव'' विषयक परिचर्चा कला-संस्कृति के मर्मज्ञों ने कही।

Amar Ujala Yuva Kumbh: Mahakumbh will become the software of humanity's culture
अमर उजाला की ओर से युनाइटेड कॉलेज नैनी में आयोजित महाकुंभ में मौजूद छात्र। - फोटो : अमर उजाला।

अमर उजाला के साथ यूनाइटेड ग्रुप और लोक संस्कृति विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में दो सत्रों में आयोजित युवा कुंभ की शुरुआत सुबह 10:30 बजे बतौर मुख्य अतिथि उच्चशिक्षा सेवा चयन आयोग की चेयरमैन प्रो. कीर्ति पांडेय, विशिष्ट अतिथि महाकुंभ की सुरक्षा से जुड़े आईजी पीएसी पूर्वी जोन डॉ. राजीव नारायण मिश्र, साहित्यकार रविनंदन सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. कुमार वीरेंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता अध्ययन केंद्र के कोआर्डिनेटर प्रो. धनंजय चोपड़ा और यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रिंसिपल डॉ. डीके तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर की।

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अमर उजाला की ओर से युनाइटेड कॉलेज नैनी में आयोजित महाकुंभ में मौजूद छात्र। - फोटो : अमर उजाला।

मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि यह महाकुंभ युवाओं के संस्कृति और संस्कार की ही नहीं जीवन के असली मूल्यबोध का भी समागम बनेगा। खासतौर से इंजीनियरिंग के छात्रों को महाकुंभ की सांस्कृतिक-सामाजिक चेतना की तकनीक तलाशनी होगी। इसी तरह जीवन जीने के विशेष प्रबंधन की भी सीख इस महाकुंभ में मिल सकेगी। दूसरे सत्र में एनसीजेडसीसी, उत्तर प्रदेश जनजातीय एवं लोक कला संस्कृति के कलाकारों ने कुंभ पर आधारित नृत्य से हर किसी का मन मोह लिया।

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Amar Ujala Yuva Kumbh: Mahakumbh will become the software of humanity's culture
अमर उजाला के युवा कुंभ में नृत्य प्रस्तुत करतीं छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

महाकुंभ से ही सम्राट हर्षवर्धन ने दिया था त्याग की संस्कृति का संदेश

सम्राट हर्षवर्धन के काल में संगम पर लगने वाले कुंभ मेला को वैश्विक आधार और सांस्कृतिक लोकप्रियता मिली। दुनिया में फैली इस त्याग संस्कृति का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाह्यान ने भी आदर के साथ किया है। विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है कि सम्राट हर्षवर्धन कुंभ में अपने खजाने का सारा धन वितरित कर देते थे। यानी हमारी कभी संचय की प्रवृत्ति नहीं रही है। देश के दूसरे हिस्सों में पांडित्य और शास्त्रार्थ की संस्कृति फलती-फूलती रही है, लेकिन प्रयागराज में ज्ञान की संस्कृति रही है। इसी ज्ञान-आध्यात्म की संस्कृति से परिचित होने के लिए पूरा विश्व महाकुंभ में उमड़ पड़ता है। - प्रो. कुमार वीरेंद्र, हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

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अमर उजाला के युवा कुंभ में नृत्य प्रस्तुत करतीं छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला।

महाकुंभ जीवन के विविध आयामों से जुड़ने का माध्यम

दुनिया महाकुंभ में जीवन के विविध आयामों से जुड़ने, परिचित होने और सेवा-सत्कार की संस्कृति के अनुसरण के लिए आती है। कुंभ जीवन की विविधता का अद्भुत गुलदस्ता बनता है। कोई पीठ पर गठरी लेकर पांच से 10 किमी दूर तक आता है, तो कोई बोरिया में गृहस्थी का सामान लेकर। संगम तक पहुंचने में न थकान होती है न किसी तरह की पीड़ा। उल्लास-उत्साह के साथ पंचांग देखकर बिना किसी आमंत्रण के करोड़ों लोग इस मेले में खिंचे चले आते हैं। ग्रहों की स्थिति, श्रद्धा, निष्ठा के साथ लोग दुनिया के कोने-कोने से संगम पहुंचते हैं। यह कुंभ समय, सत्कार और जीवन प्रबंधन का माध्यम बनता है। नई पीढ़ी को चाहिए कि वह इस महाकुंभ में जीवन और समय के प्रबंधन की सीख ले। - प्रो. धनंजय चोपड़ा, कोआर्डिनेटर- पत्रकारिता अध्ययन केंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय

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