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Allahabad University : उपग्रहण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मानचित्र तैयार करेंगे छात्र
Sat, 03 Dec 2022 08:52 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Dec 2022 08:52 PM IST
सार
पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पहले वर्ष में सर्टिफिकेट, दूसरे वर्ष में डिप्लोमा, तीसरे वर्ष में स्नातक की डिग्री, चौथे वर्ष में ऑनर्स और पांचवें वर्ष में परास्नातक की डिग्री मिलेगी। इसमें छात्रों को रिमोट सेंसिंग यानी दूर संवेदन तकनीक के बारे में बताया जाएगा।
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Spy Satellite
- फोटो : Social Media
विस्तार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भूगोल विभाग के छात्र अब आपदा प्रबंधन और पर्यावरण की पढ़ाई भी करेंगे। इसके लिए नई शिक्षा नीति के तहत सत्र 2023-24 से पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम ‘आपदा प्रबंधक एवं पर्यावरण अध्ययन’ शुरू होने जा रहा है। इस पाठ्यक्रम के तहत 30 सीटों पर प्रवेश लिए जाएंगे।
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पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पहले वर्ष में सर्टिफिकेट, दूसरे वर्ष में डिप्लोमा, तीसरे वर्ष में स्नातक की डिग्री, चौथे वर्ष में ऑनर्स और पांचवें वर्ष में परास्नातक की डिग्री मिलेगी। इसमें छात्रों को रिमोट सेंसिंग यानी दूर संवेदन तकनीक के बारे में बताया जाएगा और उपग्रहण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उन्हें भौगोलिक व्याख्यान करना सिखाया जाएगा।
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छात्रों को जल संसाधन, भूमि उपयोग नियोजन, नगर नियोजन, आपदा प्रबंधन, संसाधनों के उपयोग, बाढ़, सूखा, भूकंप जैसी आपदाओं जैसी आपदाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रोजेक्ट तैयार कराए जाएंगे। पाठ्यक्रम में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) को भी शामिल किया गया है। जीपीएस में सॉफ्टवेयर से संबंधित अध्ययन का बड़ा हिस्सा होगा।
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जीपीएस और रिमोट सेंसिंग में प्रैक्टिकल का भी अधिक हिस्सा होगा। पाठ्यक्रम की शुरुआत में विद्यार्थियों को सर्वे के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद कोर्स जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, उसी के अनुरूप हर वर्ष पाठ्यक्रम भी एडवांस होगा। भूगोल विभाग के प्रो. एआर सिद्दीकी ने बताया कि इस पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मानचित्र तैयार करने में दक्ष किया जाएगा।