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कृषि दर पर किया आवासीय भूमि का आवंटन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:50 PM IST
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एक तरफ प्रशासन हर साल सर्किल रेट में बढ़ोतरी कर आम लोगों पर बोझ बढ़ा रहा है, वहीं भूमाफिया को लाभ पहुंचाने के लिए आवासीय भूमि का कृषि दर से मूल्यांकन किया जा रहा है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मार्च 2012 से जनवरी 2014 के बीच 72 उपनिबंधक कार्यालयों ने 2.93 लाख वर्ग मीटर जमीन की रजिस्ट्री कृषि दर से मूल्यांकित की जबकि उसी भूमि का एक हिस्सा पूर्व में या रजिस्ट्री वाले दिन आवासीय दर पर बेच दिया गया। भूमाफिया को फायदा पहुंचाने के चक्कर में अफसरों ने सरकार को स्टाम्प शुल्क एवं निबंधन फीस से रूप में करोड़ों रुपये की चपत लगा दी।
सीएजी की टीम ने प्रदेश में 72 उप निबंधक कार्यालयों के दस्तावेज खंगाले और पाया कि 97 विलेखों में 2.93 लाख वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री कषि दर के मूल्यांकन के आधार पर की गई। भूमि का मूल्यांकन 13 करोड़ 52 लाख रुपये किया गया और इससे स्टाम्प शुल्क एवं निबंधन फीस के रूप में 86.48 लाख रुपये की प्राप्ति हुई। जांच में पाया गया कि जमीन का हिस्सा पूर्व में या उसी दिन आवासीय दर पर बेचा गया। ऐसे में भूमि का मूल्यांकन भी आवासीय दर पर होना चाहिए था। आवासीय दर पर सही मूल्यांकन 92 करोड़ 12 लाख रुपये होता है और इस आधार पर रजिस्ट्री होती तो स्टाम्प एवं निबंधन फीस के रूप में पांच करोड़ 21 लाख रुपये की प्राप्ति होती। यानी सरकार को राजस्व आय के रूप में चार करोड़ 34 लाख 52 हजार रुपये का नुकसान हुआ।
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सीएजी की टीम ने प्रदेश में 72 उप निबंधक कार्यालयों के दस्तावेज खंगाले और पाया कि 97 विलेखों में 2.93 लाख वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री कषि दर के मूल्यांकन के आधार पर की गई। भूमि का मूल्यांकन 13 करोड़ 52 लाख रुपये किया गया और इससे स्टाम्प शुल्क एवं निबंधन फीस के रूप में 86.48 लाख रुपये की प्राप्ति हुई। जांच में पाया गया कि जमीन का हिस्सा पूर्व में या उसी दिन आवासीय दर पर बेचा गया। ऐसे में भूमि का मूल्यांकन भी आवासीय दर पर होना चाहिए था। आवासीय दर पर सही मूल्यांकन 92 करोड़ 12 लाख रुपये होता है और इस आधार पर रजिस्ट्री होती तो स्टाम्प एवं निबंधन फीस के रूप में पांच करोड़ 21 लाख रुपये की प्राप्ति होती। यानी सरकार को राजस्व आय के रूप में चार करोड़ 34 लाख 52 हजार रुपये का नुकसान हुआ।
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