इलाहाबाद संग्रहालय : पांडुलिपियों-ताड़पत्रों की जांच रिपोर्ट में हेराफेरी, बदली गई कंजर्वेटर की आख्या
इलाहाबाद संग्रहालय में दुर्लभ हस्तलेखों, ताड़पत्रों और पेंटिंग के नष्ट होने की वजह अफसरों और कर्मचारियों की खींचतान बताई जा रही है। इसी चक्कर में उन पांडुलिपियों को संग्रह में शामिल करने के बजाय सड़ने के लिए छोड़ दिया गया।
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इलाहाबाद संग्रहालय में दो दशक से चैंबर में सड़ रहे दुर्लभ हस्तलेखों, ताड़पत्रों और चित्रों के पीछे की लापरवाही छिपाने के लिए दस्तावेजों से भी छेड़छाड़ की गई है। हद यह कि अफसरों ने आधुनिक चित्रकला वीथिका के रिजर्व कमरे में हुई इस राष्ट्रीय क्षति की जांच रिपोर्ट में हेरफेर करके दूसरी रिपोर्ट तक गढ़ डाली। दूसरी रिपोर्ट में कंजर्वेटर की आख्या बदलकर ऐसी टिप्पणी लिखी गई है, जिससे मामला हल्का किया जा सके।
इलाहाबाद संग्रहालय में दुर्लभ हस्तलेखों, ताड़पत्रों और पेंटिंग के नष्ट होने की वजह अफसरों और कर्मचारियों की खींचतान बताई जा रही है। इसी चक्कर में उन पांडुलिपियों को संग्रह में शामिल करने के बजाय सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। पता चला है कि वर्ष 2004 में निदेशक रहे उदय शंकर तिवारी ने अपने नजदीकी आईपीएस अफसर त्रिनाथ मिश्र के जरिए इन पांडुलिपियों को कमेटी के जरिए मंगाया था।
बताते हैं कि ये ताड़पत्र और हस्तलेख दान में मिले थे। तब, इन ताड़पत्रों और पांडुलिपियों को शिक्षाधिकारी डॉ. सुनील प्रसाद सिन्हा के प्रभार में दिया गया था। इनका कैटलॉग भी तैयार कराया गया। डॉ. प्रसाद की बिहार के नालंदा में नियुक्ति होने पर पांडुलिपियां दूसरे अधिकारी के प्रभार में दे दी गईं। इन दुर्लभ हस्तलेखों के नष्ट होने की जानकारी के बाद गठित की गई छह सदस्यीय कमेटी में निदेशक राजेश प्रसाद भी शामिल हैं।
इस कमेटी की रिपोर्ट छह महीने पूर्व प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट में पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और पेंटिंग के जमीन पर पड़े होने को लेकर कंजर्वेटर श्वेता सिंह की टिप्पणी को मिटाकर वहां दूसरी टिप्पणी लिख दी गई है। इतना ही नहीं कंजर्वेटर के हस्ताक्षर को उठाकर टिप्पणी के नीचे पेस्ट कर दिया गया है। कमेटी की जांच आख्या को बदलकर नए सिरे से चार बिंदुओं की रिपोर्ट बनाई गई है। इस रिपोर्ट में रिजर्व कमरे को चैंबर बताया गया है।
दूसरी रिपोर्ट में बचाव करते हुए यह भी लिखा गया है कि दीमक का उपचार पूर्व में सहायक रसायनज्ञ द्वारा किया जा चुका है। पता चला है कि बाद में अवकाश के दिन उस कमरे को खोल कर कुछ सामग्रियों को हटाया भी गया, ताकि लापरवाही पर पर्दा डाला जा सके। संग्रहालय के सहायक मीडिया प्रभारी सुशील शुक्ला का कहना है कि रिपोर्ट बदले जाने की हमें जानकारी नहीं है। इसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।