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UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- तीन माह में नियमितीकरण पर निर्णय लें उच्च शिक्षा निदेशक
Mon, 16 Feb 2026 02:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 16 Feb 2026 02:11 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक प्रोफेसर पद से जुड़े मामले में पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन न होने पर अवमानना याचिका पर उच्च शिक्षा निदेशक को तीन माह का समय दिया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक प्रोफेसर पद से जुड़े मामले में पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन न होने पर अवमानना याचिका पर उच्च शिक्षा निदेशक को तीन माह का समय दिया है। इससे पहले कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को पारित आदेश में याची के नियमितीकरण के दावे पर दो माह में निर्णय का निर्देश दिया था। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने डॉ.मदन गोपाल अग्रवाल की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
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मामला हापुड़ के पिलखुवा स्थित आरएसएस (पीजी) कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग में सहायक प्रोफेसर पद से जुड़ा है। डॉ. मदन गोपाल अग्रवाल ने 19 दिसंबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें निदेशक उच्च शिक्षा ने उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग अधिनियम-1980 के तहत उनके नियमितीकरण के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह पात्र नहीं हैं। आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में अपील की, जिस पर कोर्ट ने निदेश उच्च शिक्षा से रिपोर्ट मांगी थी। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा की तरफ से इस मामले में रिपोर्ट पेश की गई।
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कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि याची 19 दिसंबर 2019 तक संस्थान में कार्यरत रहे। इस पर कोर्ट ने 19 दिसंबर 2019 का आदेश अभिलेखों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया। प्रकरण को पुनः निदेशक उच्च शिक्षा को भेजते हुए दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
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याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि आदेश की प्रति 10 अक्तूबर 2025 को पंजीकृत डाक से भेजी गई। इसके बावजूद पालन नहीं किया गया। आदेश का पालन न होने से अवमानना याचिका दायर की गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद प्रथम दृष्टया आदेश की अवहेलना का मामला पाया। हालांकि, इस चरण पर प्रतिवादी को प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से तीन माह का अतिरिक्त समय आदेश के अनुपालन के लिए दिया। साथ ही निर्देश दिया कि अनुपालन के बाद एक सप्ताह में याची को सूचित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय में आदेश का पालन न होने पर याची पुनः न्यायालय की शरण ले सकता है।