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ज्ञानवापी केस : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा- क्या बिना नुकसान पहुचाये की जा सकती है कार्बन डेटिंग

Mon, 21 Nov 2022 07:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Nov 2022 07:33 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा गवाही नहीं हो सकती और आकार को  बिना नुकसान उसकी आयु का निर्धारण किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रमुख सचिव धर्मार्थ विभाग से भी जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

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Allahabad High Court Hearing in the scientific survey case of Gyanvapi campus now on 30th November
ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की कार्बन डेटिंग सहित साइंटिफिक सर्वे कराए जाने की मांग में दाखिल याचिका पर पुरातत्व विभाग से पूछा है कि क्या बिना क्षति पहुचाये कार्बन डेटिंग की जा सकती है। कोर्ट ने कहा अधीनस्थ अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी यथास्थिति आदेश को देखते हुए साइंटिफिक सर्वे कराने की अर्जी खारिज की है। आशंका व्यक्त की गई है कि कार्बन डेटिंग से कथित शिवलिंग को क्षति हो सकती है।

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कोर्ट ने कहा गवाही नहीं हो सकती और आकार को  बिना नुकसान उसकी आयु का निर्धारण किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रमुख सचिव धर्मार्थ विभाग से भी जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 30 नवंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने लक्ष्मी देवी व तीन अन्य की पुनरीक्षण याचिका पर  दिया है।

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याचिका पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बहस की। इनका कहना था कि साइंटिफिक सर्वे होने से ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग सहित अन्य धार्मिक निर्माण की सही जानकारी मिल सकेगी। यह भी पता चल सकेगा कि  वहां मिले शिवलिंग व अन्य मूर्तियां व धार्मिक वस्तुएं कितनी पुरानी है।


याचीगण ने जिला अदालत वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी 14 अक्तूबर को खारिज कर दी कि ऐसा करने से शिवलिंग के आकार को क्षति पहुंच सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने परिसर की यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। याचिका में जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।

भारत सरकार की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता मनोज सिंह ने मामले में तीन महीने का समय मांगा है। किंतु कोर्ट ने 30 नवंबर तक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता पंचम बिपिन बिहारी पांडेय को भी प्रमुख सचिव का हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।


सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह देने का इंतजार न करें। कॉपी लेकर जवाब दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि वह इस संबंध में संबंधित सचिव को भी सूचित करें। ताकि, अगली सुनवाई पर जवाब भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत हो सके।

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कोर्ट ने पूछा छेड़छाड़ करे बिना हो सकती है कार्बन डेटिंग
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई मॉडल है जिससे आकार में बिना किसी छेड़छाड़ के डेटिंग की जा सकती है? इस पर एएसआई की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि आजकल कई ऐसे मॉडल आ गए हैं जो आकार को बिना किसी नुकसान पहुंचाए ही कार्बन डेटिंग कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने अधीन काम कर रही एजेंसियों से संपर्क किया है और इस पर विस्तृत चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इसके लिए तीन महीने का समय दिया जाए। कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया। कहां 30 नवंबर तक इस पर जवाब दें।

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