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इलाहाबाद उच्च न्यायालय को अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का मुख्य सचिव को निर्देश
Fri, 11 Jan 2019 11:58 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 11 Jan 2019 11:58 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को इस न्यायालय को अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का शुक्रवार को निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय और राज्य की अन्य अदालतों की सुरक्षा के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (गृह) और प्रधान सचिव (विधि) अदालत में उपस्थित थे। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 12 फरवरी तय की है।
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति भारती सप्रू, न्यायमूर्ति पंकज मिताल, न्यायमूर्ति एस.के. गुप्ता और न्यायमूर्ति बी.के. नारायण शामिल थे।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य में ग्राम अदालतों की स्थापना में विलंब पर चिंता जाहिर की जिस पर मुख्य सचिव ने पीठ को आश्वस्त किया कि सरकार भूमि का अधिग्रहण करने के बाद 30 जून, 2019 तक सभी ग्राम अदालतों की स्थापना कर देगी।
अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य की जिला अदालतों की चाहरदीवारी की छह महीने के भीतर मरम्मत करा दी जाए।
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उच्च न्यायालय और राज्य की अन्य अदालतों की सुरक्षा के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (गृह) और प्रधान सचिव (विधि) अदालत में उपस्थित थे। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 12 फरवरी तय की है।
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इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति भारती सप्रू, न्यायमूर्ति पंकज मिताल, न्यायमूर्ति एस.के. गुप्ता और न्यायमूर्ति बी.के. नारायण शामिल थे।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य में ग्राम अदालतों की स्थापना में विलंब पर चिंता जाहिर की जिस पर मुख्य सचिव ने पीठ को आश्वस्त किया कि सरकार भूमि का अधिग्रहण करने के बाद 30 जून, 2019 तक सभी ग्राम अदालतों की स्थापना कर देगी।
अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य की जिला अदालतों की चाहरदीवारी की छह महीने के भीतर मरम्मत करा दी जाए।