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शहरियों की बेरुखी से सारे सियासी गणित फेल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:53 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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स्थानीय सरकार किसकी बनेगी इसका आकलन करना कठिन हो गया है। शहरियों की बेरुखी ने सारे सियासी गणित उलझा दिए हैं। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी ने इस गणित को और पेचीदा कर दिया है। हर क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से गायब मिले तो नाम में गड़बड़ी की वजह से भी लोग मतदान से वंचित हो गए। इसके अलग-अलग मायने लगाए जा रहे हैं। ऐसे में हार-जीत का फैसला तो दूर लड़ाई किसके बीच है यह दावा करना भी राजनीतिक पंडितों के लिए मुश्किल हो गया है। अब इसका फैसला एक दिसंबर को मतगणना के बाद ही हो पाएगा।
नगर निगम के लिए 2012 में भी मात्र 27.80 प्रतिशत वोट पड़े थे। उसमें बसपा के समर्थन से महापौर का चुनाव लड़ रहीं अभिलाषा गुप्ता मेयर चुनी गईं थीं। इस बार भी मात्र 30.34 फीसदी मतदान हुआ। ऐसे में प्रचार के दौरान अपेक्षाकृत कमजोर बताए जा रहे बसपा के रमेश केशरवानी भी मुख्य लड़ाई में शामिल हो गए हैं। वहीं माना जा रहा है कि जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है भाजपा को बढ़त मिली है। ऐसे में कम मतदान से भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई है और इस बार कमल के फूल सिंबल पर चुनाव लड़ रहीं अभिलाषा गुप्ता की राह उतनी आसान नहीं रह गई है। वहीं सपा के विनोद चंद्र दुबे और कांग्रेस के विजय मिश्रा के बूथ पर लोगों के जमावड़े को देखते हुए इनके और मजबूत होने की बात भी कही जा रही है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हर क्षेत्र में पाई गई। करेली, अटाला समेत मुस्लिम बहुल इलाकों में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं तो बसपा के मजबूत गढ़ नीवा, शिवकुटी में चिल्ला, राजापुर, रसूलाबाद आदि मोहल्लों के लोगों के नाम भी सूची में नहीं थे। इसके अलावा शहर उत्तरी, दक्षिणी में भाजपा के गढ़ वाले मोहल्लों में भी बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं और हैं तो किसी दूसरे वार्ड में। यानी, मतदाता सूची में गड़बड़ी का किसे कितना नुकसान होने जा रहा है यह कहना फिलहाल अभी मुश्किल है। इससे मतदान के रुझान का आकलन भी कठिन हो गया है।
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मतदान के मामले में इलाहाबाद शहरी क्षेत्र के मतदाता एक बार फिर पूरे प्रदेश में पीछे रह गए। पिछली बार नगर निगम चुनाव में इलाहाबाद में मात्र 27.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह पूरे प्रदेश में सबसे कम मतदान था। इस बार भी मतदान प्रतिशत कुछ बढ़ा जरूर है लेकिन मात्र 30.47 फीसदी मतदाताओं ने ही मताधिकार का उपयोग किया। दूसरे चरण में रविवार को छह नगर निगमाें हुए मतदान की बात करें तो लखनऊ का नंबर इसके बाद है। लखनऊ में भी मात्र 36 प्रतिशत मतदान हुआ। इनके अलावा अलीगढ़ में 49.31, गाजियाबाद में 45.10, मथुरा में 41.36 और वाराणसी में 43.80 प्रतिशत मतदान हुआ। नगर पालिका परिषद और पंचायतों में 50 से 81 फीसदी के बीच मतदान हुआ। वहीं पहले चरण में कानपुर में 44.28, गोरखपुर में 35.62, अयोध्या फैजाबाद में 49.88, मेरठ में 47.88 और आगरा में 40.60 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इलाहाबाद के नौ नगर पंचायतों में कुल 61.76 फीसदी मतदान हुआ। इनमें कोरांव नगर पंचायत सबसे आगे है। वहां 75.42 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद सिरसा में 65.09 फीसदी मतदान हुआ। लालगोपालगंज में 57.50, झूंसी में 61.94, फूलपुर में 57.38, शंकरगढ़ में 61.32, हंडिया में 63.17, भारतगंज में 59.71 और मऊआइमा में 63.20 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।
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नगर निगम के लिए 2012 में भी मात्र 27.80 प्रतिशत वोट पड़े थे। उसमें बसपा के समर्थन से महापौर का चुनाव लड़ रहीं अभिलाषा गुप्ता मेयर चुनी गईं थीं। इस बार भी मात्र 30.34 फीसदी मतदान हुआ। ऐसे में प्रचार के दौरान अपेक्षाकृत कमजोर बताए जा रहे बसपा के रमेश केशरवानी भी मुख्य लड़ाई में शामिल हो गए हैं। वहीं माना जा रहा है कि जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है भाजपा को बढ़त मिली है। ऐसे में कम मतदान से भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई है और इस बार कमल के फूल सिंबल पर चुनाव लड़ रहीं अभिलाषा गुप्ता की राह उतनी आसान नहीं रह गई है। वहीं सपा के विनोद चंद्र दुबे और कांग्रेस के विजय मिश्रा के बूथ पर लोगों के जमावड़े को देखते हुए इनके और मजबूत होने की बात भी कही जा रही है।
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गौर करने वाली बात यह भी है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हर क्षेत्र में पाई गई। करेली, अटाला समेत मुस्लिम बहुल इलाकों में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं तो बसपा के मजबूत गढ़ नीवा, शिवकुटी में चिल्ला, राजापुर, रसूलाबाद आदि मोहल्लों के लोगों के नाम भी सूची में नहीं थे। इसके अलावा शहर उत्तरी, दक्षिणी में भाजपा के गढ़ वाले मोहल्लों में भी बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं और हैं तो किसी दूसरे वार्ड में। यानी, मतदाता सूची में गड़बड़ी का किसे कितना नुकसान होने जा रहा है यह कहना फिलहाल अभी मुश्किल है। इससे मतदान के रुझान का आकलन भी कठिन हो गया है।
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मतदान के मामले में इलाहाबाद शहरी क्षेत्र के मतदाता एक बार फिर पूरे प्रदेश में पीछे रह गए। पिछली बार नगर निगम चुनाव में इलाहाबाद में मात्र 27.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह पूरे प्रदेश में सबसे कम मतदान था। इस बार भी मतदान प्रतिशत कुछ बढ़ा जरूर है लेकिन मात्र 30.47 फीसदी मतदाताओं ने ही मताधिकार का उपयोग किया। दूसरे चरण में रविवार को छह नगर निगमाें हुए मतदान की बात करें तो लखनऊ का नंबर इसके बाद है। लखनऊ में भी मात्र 36 प्रतिशत मतदान हुआ। इनके अलावा अलीगढ़ में 49.31, गाजियाबाद में 45.10, मथुरा में 41.36 और वाराणसी में 43.80 प्रतिशत मतदान हुआ। नगर पालिका परिषद और पंचायतों में 50 से 81 फीसदी के बीच मतदान हुआ। वहीं पहले चरण में कानपुर में 44.28, गोरखपुर में 35.62, अयोध्या फैजाबाद में 49.88, मेरठ में 47.88 और आगरा में 40.60 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इलाहाबाद के नौ नगर पंचायतों में कुल 61.76 फीसदी मतदान हुआ। इनमें कोरांव नगर पंचायत सबसे आगे है। वहां 75.42 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद सिरसा में 65.09 फीसदी मतदान हुआ। लालगोपालगंज में 57.50, झूंसी में 61.94, फूलपुर में 57.38, शंकरगढ़ में 61.32, हंडिया में 63.17, भारतगंज में 59.71 और मऊआइमा में 63.20 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।