आकाशवाणी : संगम पर कुंभवाणी के जरिए दुनिया सुनेगी महाकुंभ के सांस्कृतिक वैभव की गाथा
प्रसार भारती की ओर से महाकुंभ 2025 में संगम पर स्थापित किया जाएगा 1.5 किलोवाट का ट्रांसमीटर, तीन सभाओं में होगा महाकुंभ का प्रसारण, शाही स्नान, पेशवाई लाइव होगी। संगम पर कुंभवाणी स्टेशन की स्थापना के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इसके लिए हाई फ्रीक्वेंसी वाले टॉवर भी स्थापित किए जाएंगे।
विस्तार
महाकुंभ-2025 के सांस्कृतिक वैभव को विश्व पटल पर प्रसारित करने के लिए प्रसार भारती की ओर से व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए आकाशवाणी के प्रयागराज केंद्र की ओर के संगमतट पर अलग ट्रांसमीटर लगाया जाएगा। इस ट्रांसमीटर का नाम होगा कुंभवाणी। इसके जरिए देश-दुनिया के लोग महाकुंभ के सांस्कृतिक वैभव से रेडियो के जरिए परिचित हो सकेंगे।
संगम पर कुंभवाणी स्टेशन की स्थापना के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इसके लिए हाई फ्रीक्वेंसी वाले टॉवर भी स्थापित किए जाएंगे। संगम पर महाकुंभ में स्थापित होने वाले इस नए स्टेशन का नाम कुंभवाणी दिया गया है। इसके तहत कुंभवाणी में तीन सभाएं चलेंगी। प्रात:कालीन सभा से इस कुंभ रेडियो की शुरुआत होगी। इसके बाद मध्यकालीन और सांध्यकालीन सभाओं के जरिए कुंभ के कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। इसमें प्रमुख संतों के विशेष साक्षात्कार, धर्म सम्मेलनों का तो प्रसारण होगा ही, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा
स्नान पर्वों का राष्ट्रीय स्तर पर आंखों देखा हाल प्रसारित किया जाएगा। इसके अलावा पेशवाई और अखाड़ों के शाही स्नान का भी सजीव प्रसारण किया जाएगा। आकाशवाणी के केंद्र निदेशक लोकेश शुक्ल के मुताबिक कुंभवाणी की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसके लिए स्टाफ भी चयनित किए जाएंगे। कंपेयरों के अलावा अन्य कर्मियों की तैनाती की जाएगी। ताकि संगम पर कुंभवाणी का प्रसारण यादगार बनाया जा सके।
आकाशवाणी के स्वर्णिम सफर के सारथियों में नेहरू-शास्त्री भी शामिल
अपनी स्थापना के 75वें वर्ष में प्रवेश कर चुके आकाशवाणी के इस केंद्र की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव के तहत फिलहाल वर्ष पर्यंत स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े परिसंवाद हो रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाली कौशाम्बी की दुर्गा भाभी पर भी आधे घंटे का नाटक तैयार कराया गया है। युवाओं, बच्चों, महिलाओं के हर वर्ग के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण तैयार किया जा रहा है। लखनऊ के बाद प्रदेश की यह दूसरी ऐसी आकाशवाणी है, जहां से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी की भी यादें जुड़ी हुई हैं।
एक फरवरी 1949 में इस केंद्र की स्थापना हुई थी। पं. केंद्र निदेशक लोकेश के मुताबिक नर्मदेश्वर उपाध्याय इस केंद्र के पहले उद्घोषक थे। सुमित्रा नंदन पंत, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, राम कुमार वर्मा जैसी हस्तियों ने इस आकाशवाणी को अपने साहित्य से सींचकर हरा भरा किया। पदमविभूषण हरि प्रसाद चौरसिया भी इस केंद्र से जुड़े रहे हैं। सफर सुरों का, रेडियो तरंगे, गजलों पर दास्ताने गजल, फोनिक कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
पंत ने दिया ऑल इंडिया रेडियो को दिया आकाशवाणी नाम
देश में रेडियो को आकाशवाणी का नाम कभी इसी शहर से मिला। महानिदेशालय के सलाहकार रहे महाकवि सुमित्रानंदन पंत ने ही पहली बार रेडियो को आकाशवाणी नाम देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। केंद्र निदेशक लोकेश शुक्ल बताते हैं कि पहले रेडियो के ट्रांसमीटर को ऑल इंडिया रेडियो के नाम से जाना जाता था।