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Prayagraj : मांडा में कटान रोकने के नाम पर 12 करोड़ रुपये की परियोजना बेकार, दो गांवों का अस्तित्व खतरे में

Thu, 08 Aug 2024 02:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Aug 2024 02:54 PM IST
सार

चालू वर्ष काम पूरा हुआ, लेकिन कटान नहीं रोकी जा सकी। इसके पीछे मानक के अनुरूप काम का न होना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि चौकठा नरवर, उमापुर कला में जिन स्थानों पर काम हुआ, वहां की गुणवत्ता खराब होने के कारण गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने से फिर कटान शुरू हो गई है।

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A project worth Rs 12 crore in the name of stopping deforestation in Manda is useless
मांडा में तेजी से हो रहा गंगा का कटान। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

12 करोड़ रुपये की लागत वाली जियो टेक्सटाइल ट्यूब कटर योजना गंगा की कटान रोकने में असफल साबित हुई है। तटवर्ती चौकठा नरवर, उमापुर कलां समेत कई गांवों की भूमि नदी में समाहित होने की कगार पर है। जिम्मेदारों की सुस्ती से इस गांवों में कृषि भूमि लगातार कटान में विलीन होती जा रही है। बाढ़ प्रखंड के एसडीओ दिनेश त्रिपाठी ने इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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इस इलाके में गंगा की कटान से चौकठा नरवर, उमापुर कला, अछोला, बेरूका, डेंगुरपुर, महेवा खुर्द, महेवा कला समेत दर्जनों गांवों की अब तक 600 बीघे जमीन कटान में समाहित हो चुकी है। ऐसी नहीं कि यह समस्या यहां पहली बार पैदा हुई है। इससे पहले भी कटान से परेशान किसान बचाव के लिए गुहार लगाते रहे हैं। आंदोलन के बाद कटान रोकने के लिए बाढ़ प्रखंड से 12 करोड़ रुपये की जियो टेक्सटाइन ट्यूब कटर योजना को मंजूरी मिली थी।
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चालू वर्ष काम पूरा हुआ, लेकिन कटान नहीं रोकी जा सकी। इसके पीछे मानक के अनुरूप काम का न होना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि चौकठा नरवर, उमापुर कला में जिन स्थानों पर काम हुआ, वहां की गुणवत्ता खराब होने के कारण गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने से फिर कटान शुरू हो गई है।

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बाढ़ के दौरान ग्रामीण अपना घर और जमीन खोते हैं। खतौनी में भले ही जमीन हो, लेकिन हकीकत में वह गंगा में समाहित हो चुकी है।- गिरजाशंकर पांडेय, पूर्व प्रधान, डेंगुरपुर।

महेवा कला गांव की खेती योग्य कई बीघे भूमि जलमग्न हो चुकी है। सरकार इन किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराए। -दीपक कुमार, प्रधान, महेवाकला

किसानों की इस पीड़ा का निवारण होना चाहिए। गंगा की कटान में लोगों ने अपने घर तक गवां दिए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित मल्लाह समाज के लोग हैं। रामकिशुन, प्रधान, उमापुर कला।

अछोला, चौकठा नरवर और उमापुर गंगा घाट पर जियो टेक्सटाइल ट्यूब कटर का निर्माण पूरा हो गया है। यदि कटान हो रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी और उक्त स्थान को परियोजना से जोड़कर कटानरोधी कार्य कराए जाएंगे। - दिनेश त्रिपाठी, एसडीओ, बाढ़ प्रखंड।

गंगा में नाव संचालन बंद

मांडा। गंगा के जलस्तर में बृद्धि को लेकर डेंगुरपुर-धनतुलसी फेरी गंगा घाट पर नाव का संचालन बंद कर दिया गया। जिससे राहगीरों के लिए मुश्किलें बढ़ गईं। गंगा में बढ़ते जलस्तर को लेकर बुधवार शाम से अफसरों के निर्देश पर डेंगुरपुर- धनतुलसी फेरी गंगा घाट पर नाव का संचालन बंद कर दिया गया। नाव संचालन बंद होने से राहगीरों को 50 किमी का अतिरिक्त चक्कर काटकर मिर्जापुर व प्रयागराज शहर होकर यात्रा पूरी करनी पड़ेगी। जिससे राहगीरों की मुश्किलें बढ़ गई। वहीं दूधिया व सब्जी की फेरी लगाने व्यवसायियों के गंगा आर-पार नहीं उतरने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।

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