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न पैसा, न ठेकेदार तैयार, कैसे होगा काम

Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
Allahabad
Allahabad Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। मेला से जुड़े इलाकों में नगर निगम का काम अब तक नहीं शुरू हो सका है। सड़क, नाली, रोड पटरी के साथ स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का काम 31 दिसंबर तक पूरा होना है लेकिन इसके लिए नगर निगम के पास रकम ही नहीं हैं। मजे की बात यह कि शासन से रकम मिलने की उम्मीद में नगर निगम ने पिछले दिनों 456 कामों के लिए निविदा भी जारी कर दी। शासन ने मेला कार्यों के लिए 5 दिसंबर को विभिन्न विभागों के लिए 7 करोड़ रुपए से अधिक आवंटित किए लेकिन इसमें नगर निगम को एक पाई नहीं मिली है। उधर, बकाया रकम न मिलने से ठेकेदारों ने भी काम करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब समय से काम होना तो दूर, उसे शुरू कराना भी नगर निगम ने लिए मुसीबत बन गया है।
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शहर दक्षिणी, पश्चिमी, उत्तरी के दर्जनों वार्डों के साथ मेला क्षेत्र से जुड़े इलाकों में सड़क, गलियां, नालियां, रोड पटरी और स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के लिए नगर निगम ने एक दिसंबर को निविदा जारी की। नगर निगम ने इस उम्मीद से पहले निविदा जारी कर दी कि शासन से रकम मिलते ही टेंडर की प्रक्रिया पूरा कर तत्काल काम शुरू करा दिया जाएगा ताकि निर्धारित समय में उसे पूरा करा लिया जाए लेकिन निगम की इस उम्मीद पर शासन ने पानी भर दिया। निगम ने इन कामों के लिए शासन से 52 करोड़ रुपए मांगें थे लेकिन पांच दिसंबर को शासन ने विभिन्न विभागों के लिए जो रकम जारी की, उसमें निगम को शामिल ही नहीं किया। ऐसे में निगम के हिस्से का काम कब शुरू होगा यह बड़ा सवाल है।
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इसके अलावा निगम प्रशासन को ठेकेदारों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार निविदा का बहिष्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले पुराना बकाया अदा किया जाए। साथ ही रनिंग पेमेंट से 10 प्रतिशत की कटौती का निर्णय वापस लिया जाए। संघ के अध्यक्ष मोहम्मद इरफान का कहना है कि निगम प्रशासन कार्यों की रिपोर्ट आने के पहले रनिंग पेमेंट में से भी दस प्रतिशत की कटौती की तैयारी कर रहा है, जबकि ठेकेदार फाइनल भुगतान में दस प्रतिशत रकम रोकने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि किसी काम के रनिंग पेमेंट का बिल सुबह बने और शाम तक भुगतान किया जाए, तभी ठेकेदार काम को तैयार होंगे। उधर, पांच दिसंबर को शासन से जारी रकम में निगम को कुछ न मिलने के कारण नगर आयुक्त आर विक्रम सिंह ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि शासन से जल्द रकम मिल जाएगी और काम भी समय से पूरा करा लिया जाएगा।
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