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कुंभ मेला अधिकारी कोर्ट में तलब
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कुंभ मेला अधिकारी हाईकोर्ट में तलब
0 झूंसी में शवदाह गृह बनाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने झूंसी के हवेलिया उस्तापुर ग्राम सभा में कुंभ मेला प्राधिकरण द्वारा आबादी और स्कूल के पास बनाए जा रहे शवदाह गृह के विरुद्ध दाखिल जनहित याचिका पर कुंभ मेला अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है। कोर्ट ने अपने आदेशों की अनदेखी करने पर और व्यक्तिगत हलफनामा नहीं दाखिल करने पर मेला अधिकारी विजय किरण आनंद को 15 मार्च को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र त्रिपाठी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची ओर से अधिवक्ता केके रॉय और मेला प्राधिकरण की ओर से कार्तिकेय सरन ने बहस की। मामले में 22 जनवरी 2019 को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने प्राधिकरण को शवदाह गृह के लिए किसी दूसरी जगह को खोजने का विकल्प दिया था। एक फरवरी को जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस सीडी सिंह की खंडपीठ ने मेला अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ सारे तथ्यों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। 15 फरवरी को मेला अधिकारी को एक और मौका दिया गया, मगर उनका जवाब नहीं आया। याची का कहना है कि शवदाह गृह का निर्माण गंगा तट के 500 मीटर के भीतर किया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट ने गंगा के उच्चतम बाढ़ बिंदु से 500 मीटर तक निर्माण पर रोक लगा रखी है। प्राधिकरण ने स्वीकार किया है कि शवदाह गृह गंगा तट से 300 मीटर की दूरी पर निर्मित हो रहा है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान मेला अधिकारी द्वारा कोई हलफनामा नहीं दिया गया। इस पर कोर्ट ने उनको 15 मार्च को तलब कर लिया है।
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0 झूंसी में शवदाह गृह बनाने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने झूंसी के हवेलिया उस्तापुर ग्राम सभा में कुंभ मेला प्राधिकरण द्वारा आबादी और स्कूल के पास बनाए जा रहे शवदाह गृह के विरुद्ध दाखिल जनहित याचिका पर कुंभ मेला अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है। कोर्ट ने अपने आदेशों की अनदेखी करने पर और व्यक्तिगत हलफनामा नहीं दाखिल करने पर मेला अधिकारी विजय किरण आनंद को 15 मार्च को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र त्रिपाठी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची ओर से अधिवक्ता केके रॉय और मेला प्राधिकरण की ओर से कार्तिकेय सरन ने बहस की। मामले में 22 जनवरी 2019 को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने प्राधिकरण को शवदाह गृह के लिए किसी दूसरी जगह को खोजने का विकल्प दिया था। एक फरवरी को जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस सीडी सिंह की खंडपीठ ने मेला अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ सारे तथ्यों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। 15 फरवरी को मेला अधिकारी को एक और मौका दिया गया, मगर उनका जवाब नहीं आया। याची का कहना है कि शवदाह गृह का निर्माण गंगा तट के 500 मीटर के भीतर किया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट ने गंगा के उच्चतम बाढ़ बिंदु से 500 मीटर तक निर्माण पर रोक लगा रखी है। प्राधिकरण ने स्वीकार किया है कि शवदाह गृह गंगा तट से 300 मीटर की दूरी पर निर्मित हो रहा है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान मेला अधिकारी द्वारा कोई हलफनामा नहीं दिया गया। इस पर कोर्ट ने उनको 15 मार्च को तलब कर लिया है।
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