प्रयागराज : माताटीला से छोड़ा गया 80 हजार क्यूसेक पानी, गंगा-यमुना में उफान
गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यही रफ्तार रही तो संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर गंगा की गोद में समा जाएगा। हर वर्ष मां गंगा हनुमानजी को स्नान कराने के लिए आती हैं। जिस तरह से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। उससे यह लग रहा है कि कुछ ही दिन में जल मंदिर में प्रवेश कर जाएगा।
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लगातार बारिश से बढ़े जल दबाव के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। शनिवार को माताटीला बैराज से 80 हजार क्यूसेक पानी यमुना की सहायक नदी बेतवा में छोड़े जाने के बाद अचानक प्रवाह बढ़ गया। इसी के साथ गंगा-यमुना में उफान आ गया। देर शाम हरिहर गंगा आरती स्थल तक गंगा की लहरें पहुंच गईं। उधर, गंगा-यमुना के कछारी बस्तियों में भी पानी प्रवेश कर गया। देर रात तक तीर्थपुरोहितों की चौकियां बांध पर पहुंचाई जाती रहीं।
जलस्तर में तेज वृद्धि से दो सौ से अधिक पूजा-प्रसाद की दुकानें हटानी पड़ीं। तीर्थपुरोहितों की चौकियां त्रिवेणी बांध पर लगने लगी हैं। जलस्तर में वृद्धि का यही हाल रहा तो जल्द ही स्लूस गेज भी बंद कर दिए जाएंगे।
बेतवा में उफान और पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा-यमुना के जलस्तर में अचानक इजाफा शुरू हो गया है। शनिवार की देर शाम गंगा आरती तक प्रवाह पहुंच गया। गंगा की लहरें बड़े हनुमान मंदिर की ओर दस्तक देने लगी हैं। किला के नजदीक पानी आ गया है। संगम आरती समिति का कार्यालय परिसर भी जलमग्न हो गया। उधर, बेली कछार के अलावा शिवकुटी, बघाड़ा और सलोरी में गंगा ने दस्तक दे दी है।
छह सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर
कहा जा रहा है कि जल स्तर इसी तरह बढ़ा तो कछारी इलाकों में घर बनाने वालों के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। रात आठ बजे बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक शाम को फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 79.69 मीटर दर्ज किया गया। इसी तरह छतनाग में 78.62 और नैनी में यमुना का जलस्तर 79.24 मीटर रिकार्ड किया गया। छह सेंमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा और सात सेंमी प्रतिघंटा की रफ्तार से यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है।
घाटों के ऊपरी हिस्से के जलमग्न होने से सबसे अधिक परेशानी तीर्थपुरोहितों और पूजा-प्रसाद, फूलमाला बेचने वालों की बढ़ी है। संगम पर चौकियां लगाने वाले तीर्थपुरोहित बांध पर आ गए हैं। उधर, हालात को देखते हुए सिंचाई बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बांध का जायजा लिया। गंगा का जलस्तर इसी तरह से तेजी से बढ़ता रहा तो कुछ दिन में पानी बड़े हनुमानजी मंदिर में प्रवेश कर सकता है। हर वर्ष मां गंगा बजरंग बली को स्नान कराने के लिए आती हैं।