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वित विहीन शिक्षकों ने मांगा मानदेय

Thu, 02 Nov 2017 08:30 PM IST
Updated Thu, 02 Nov 2017 08:30 PM IST
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वित विहीन शिक्षकों ने मांगा मानदेय
वित्तविहीन शिक्षकों ने मांगा बकाया मानदेय
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0 डीआईओएस कार्यालय पर धरना, सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
0 चार सूत्रीय मांगें पूरी न होने पर बोर्ड परीक्षा के बहिष्कार की चेतावनी
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (वित्तविहीन) गुट ने मानदेय की निरंतरता बनाए रखने, मानदेय की द्वितीय किश्त की अवशेष धनराशि वित्तविहीन शिक्षकों के खातों में स्थानांतरित करने समेत अन्य मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय पर धरना दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन डीएम को सौंपा गया।
इसमें शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाने तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए उचित मानदेय के भुगतान की भी मांग की गई। इस दौरान संघ के जिलाध्यक्ष ननकेश बाबू ने कहा कि पिछली सरकार ने वित्तविहीन शिक्षकों को आंसू पोछने के लिए जो मानदेय दिया था, उसे भी वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया। यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। बिहार में नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने के पटना हाईकोर्ट के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए इस आदेश को प्रदेश के शिक्षकों के हित में बताया। कहा कि प्रदेश के शिक्षण भी अब न्यायालय की शरण लेंगे।
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जिला उपाध्यक्ष फूलचंद्र कनौजिया ने सरकार को चेतावनी दी कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे। इसके लिए बोर्ड परीक्षा 2018 तथा मूल्यांकन का बहिष्कार ही विकल्प है। ज्ञापन में बोर्ड परीक्षा के पहले मांगों पर शासनादेश जारी कर उस पर अमल करने की मांग की गई। धरने में अभय राज सिंह, सीतासरन सिंह, जेपी यादव, गोविंद प्रसाद भूर्तिया, बुधराम यादव, बालेंद्र गौतम, मानसिंह पटेल, सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रेम चंद्र यादव, कमल चंद्र, अमर चंद्र गुप्ता, शिवमोहन सिंह, मदन मुरारी श्रीवास्तव आदि शामिल थे।
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डॉ. वर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण जल्द
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ.आरपी वर्मा की 15 पुस्तकों का लोकार्पण लखनऊ में होगा। लोकार्पण की तिथि जल्द तय की जाएगी। वे अब तक 70 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं। बताया कि हिन्दी साहित्य, देश के विकास में प्रमुख रूप से योगदान देने वाले महापुरुषों एवं दलित साहित्य के क्षेत्र में लेखन का कार्य चलता रहेगा।
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