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Updated Tue, 03 Jul 2018 08:28 PM IST
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विश्वनाथ मंदिर के लिए अधिग्रहीत भवन तोड़ने पर रोक से इंकार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत भवन के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसी मामले में सिविल कोर्ट में मामला लंबित है। याची वहां 12 जुलाई को अपनी अर्जी दाखिल करे। याची का कहना था कि उसने अधीनस्थ न्यायालय में अंतरिम आदेश के लिए अर्जी दाखिल की थी मगर राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कमला देवी की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की।
अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार का कहना था कि काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास के क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। इसके तहत पुराने और जीर्णशीर्ण हो चले भवनों को राज्य सरकार ने उनके मालिकों से खरीद लिया है और मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को कब्जा सौंप दिया गया है। इन भवनों को गिराकर वहां यात्रियों की सुविधा के लिए जनसुविधा केंद्र और शौचालय आदि का निर्माण कराया जाएगा।
याची का कहना था कि वह विवादित भवन में वर्षों से किराएदार के तौर पर रह रही है तथा वहीं दुकान चला कर जीविकोपार्जन करती है। मकान मालिक ने मकान बेच दिया और उसके किरायेदारी हितों की अनदेखी कर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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विश्वनाथ मंदिर के लिए अधिग्रहीत भवन तोड़ने पर रोक से इंकार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत भवन के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसी मामले में सिविल कोर्ट में मामला लंबित है। याची वहां 12 जुलाई को अपनी अर्जी दाखिल करे। याची का कहना था कि उसने अधीनस्थ न्यायालय में अंतरिम आदेश के लिए अर्जी दाखिल की थी मगर राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कमला देवी की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की।
अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार का कहना था कि काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास के क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। इसके तहत पुराने और जीर्णशीर्ण हो चले भवनों को राज्य सरकार ने उनके मालिकों से खरीद लिया है और मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को कब्जा सौंप दिया गया है। इन भवनों को गिराकर वहां यात्रियों की सुविधा के लिए जनसुविधा केंद्र और शौचालय आदि का निर्माण कराया जाएगा।
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याची का कहना था कि वह विवादित भवन में वर्षों से किराएदार के तौर पर रह रही है तथा वहीं दुकान चला कर जीविकोपार्जन करती है। मकान मालिक ने मकान बेच दिया और उसके किरायेदारी हितों की अनदेखी कर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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