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गायत्री प्रजापति के मामले में पीिड़िता नहीं पहुंची कोर्ट
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गायत्री प्रजापति पर दुष्कर्म के मामले में पीड़िता नहीं पहुंची कोर्ट
0 स्पेशल कोर्ट ने हाजिरी माफी खारिज की, गवाही से उन्मोचित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर दुष्कर्म के मामले की अहम गवाह पीड़िता शनिवार को गवाही के लिए स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए नहीं पहुंची। शनिवार को इस गवाह की बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा प्रतिपरीक्षा और जिरह की जानी थी। गवाह की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने बीमारी के आधार पर हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र दिया, जिसे स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने खारिज करते हुए गवाह को साक्ष्य से उन्मोचित कर दिया। अगली तारीख पर दूसरे गवाह को उपस्थित करने का अभियोजन को निर्देश दिया है।
31 जनवरी को स्पेशल कोर्ट ने पीड़िता को जिरह और बयान के लिए हाजिर होने का निर्देश दिया था। शनिवार को अभियुक्तों के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए, मगर पीड़िता नहीं आई। उसकी ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थनापत्र के साथ चिकित्सकीय प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है। जबकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का शीघ्रता से निस्तारण करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकरण से जुड़े कुछ गवाह और पक्षकार मुकदमे की कार्यवाही को जानबूझकर उलझाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सुनवाई विलंबित हो। कोर्ट ने पीड़िता को साक्ष्य से उन्मोचित करते हुए अगली तारीख 27 फरवरी को दूसरा गवाह प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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0 स्पेशल कोर्ट ने हाजिरी माफी खारिज की, गवाही से उन्मोचित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर दुष्कर्म के मामले की अहम गवाह पीड़िता शनिवार को गवाही के लिए स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए नहीं पहुंची। शनिवार को इस गवाह की बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा प्रतिपरीक्षा और जिरह की जानी थी। गवाह की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने बीमारी के आधार पर हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र दिया, जिसे स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने खारिज करते हुए गवाह को साक्ष्य से उन्मोचित कर दिया। अगली तारीख पर दूसरे गवाह को उपस्थित करने का अभियोजन को निर्देश दिया है।
31 जनवरी को स्पेशल कोर्ट ने पीड़िता को जिरह और बयान के लिए हाजिर होने का निर्देश दिया था। शनिवार को अभियुक्तों के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए, मगर पीड़िता नहीं आई। उसकी ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थनापत्र के साथ चिकित्सकीय प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है। जबकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का शीघ्रता से निस्तारण करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकरण से जुड़े कुछ गवाह और पक्षकार मुकदमे की कार्यवाही को जानबूझकर उलझाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सुनवाई विलंबित हो। कोर्ट ने पीड़िता को साक्ष्य से उन्मोचित करते हुए अगली तारीख 27 फरवरी को दूसरा गवाह प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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