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इविवि के जेके इंस्टीट्यूट में नेशनल कांफ्रेंस

Sat, 14 Apr 2018 01:23 AM IST
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:23 AM IST
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इविवि के जेके इंस्टीट्यूट में नेशनल कांफ्रेंस
बीमारी से पहले हो जाएगी एनीमिया की पहचान
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0 मेडिकल साइंस में मशीन लर्निंग तकनीक का हुआ सफल प्रयोग
0 जेके इंस्टीट्यूट में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, विभिन्न शोधों पर चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
अगर आप एनीमिया के शिकार होने वाले हैं तो मशीन लर्निंग तकनीक पहले ही आगाह कर देगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जेके इंस्टीट्यूट में शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. मनीष जायसवाल ने अपने इस सफल शोध को देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों के बीच साझा किया।
‘इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन इमर्जिंग ट्रेंड्स ऑफ कम्युनिकेशन एंड कंप्यूटिंग’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में डॉ. मनीष जायसवाल ने विभिन्न पैथोलॉजी लैब से खून के तकरीबन 200 नमूने इकट्ठा किए और बीका सॉफ्टेवयर पर एक अतिरिक्त फंक्शन को जोड़ते हुए नमूनों को टेस्ट किया। टेस्ट के बाद आई रिपोर्ट पैथोलॉजी लैब की ओर से जारी रिपोर्ट के मुकाबले ज्यादा सटीक थी। यहां तक कि इस टेस्ट के जरिये यह भी पता लगाया जा सकता है कि वह एनीमिया का शिकार होने वाला है। मेडिकल साइंस में मशीन लर्निंग तकनीक के इस सफल प्रयोग से मरीज को कई तरह के फायदे मिलेंगे। उसे कई तरह के टेस्ट कराने के लिए मोटी रकम नहीं खर्च करनी होगी और न ही अतिरिक्त दवाओं का सेवन करना पड़ेगा।
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सिर्फ इतना ही नहीं। टेस्ट और दवाओं पर होने वाला खर्च बचेगा। साथ ही दवाओं के साइड इफेक्ट से भी राहत मिलेगी। डायबिटीज समेत कई बीमारियों का जन्म एनीमिया के कारण ही होता है। डॉ. मनीष ने बताया कि भविष्य में आंखों की रेटिना से एनीमिया बीमारी का पता लगाने के लिए भी रिसर्च हो रहा है। सम्मेलन में स्कूल ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर साइंस, ग्वांजू इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोरिया से आए वैज्ञानिक सेजेआंग ली और बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड डिपार्टमेंट ऑफ रेडियालॉजी, सीओल नेशनल यूनिवर्सिटी कोरिया से आए वैज्ञानिक जेओंगवान ग्वाक ने भी संचार एवं कंप्यूटिंग की दिशा में रहे नवीन शोधों से अवगत कराया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि जीएम एनसीआर एमसी चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. नरसिंह समेत प्रो. एनके शुक्ला, डॉ. आशीष खरे, प्रो. केडी दीक्षित, प्रो. केके भूटानी, नम्रता जायसवाल, कोमल सिंह, प्रंजना झा आदि मौजूद रहे।
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खतरा मांपते ही एलर्ट करेगा सीसीटीवी कैमरा
- जेके इंस्टीट्यूट में आयोजित सम्मेलन में शोधार्थी आरती कुशवाहा ने भी अपने एक सफल प्रयोग को वैज्ञानिकों के बीच साझा किया। आरती ने एक्टिविटी रिकग्नेशन पर काम किया है। इसके तहत सीसीटीवी कैमरे के सामने अगर सभी गतिविधियों समान रूप से चल रही हैं तो ठीक है और अगर अचानक कोई परिवर्तन आता है तो सीसीटीवी कैमरा सीधे सुरक्षा एजेंसी को एलर्ट कर देगा। उदाहरण के तौर पर कोई महिला सड़क पर जा रही है और अचानक पीछे से कोई झपट्टा मारकर चेन छीन लेता है या फिर कोई व्यक्ति पैदल चलकर जा रहा है और अचानक दौड़ने लगता है। सीसीटीवी इसे संदिग्ध गतिविधि मानते हुए एलर्ट करेगा।
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