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अनि श् चितकाल के लिए निलंबित नहीं रख सकते
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:45 AM IST
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कर्मचारी को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रख सकते निलंबित
0 गिरफ्तारी पर रोक के बाद निलंबन आदेश वापस लेने पर विचार का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित नहीं रखा जा सकता है। तय समय के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबन आदेश पर पुनर्विचार कर निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने बिजनौर के निलंबित पुलिस कांस्टेबल अरविंद कुमार के निलंबन आदेश पर पुनर्विचार कर निर्णय लेने के लिए कहा है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि अरविंद कुमार की बिजनौर स्वाट टीम में तैनाती थी। इस दौरान उसके खिलाफ एक्साइज एक्ट और आईपीसी की धाराओं पर मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप है कि उसने विभाग की गोपनीय सूचनाओं को लीक किया और अभियुक्त को गैरकानूनी तरीके से मदद पहुंचाई। इस आरोप में उसके खिलाफ 30 जनवरी 2018 को सिवाला कला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
याची ने प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मगर इस दौरान विभागीय कार्रवाई करते हुए एसएसपी बिजनौर ने उसे निलंबित कर दिया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निलंबन आदेश को चुनौती दी गई। अधिवक्ता का कहना था जब इस मामले में याची की गिरफ्तारी पर रोक लग चुकी है तो फिर उसे निलंबित रखना उचित नहीं है। अधिवक्ता ने रमाशंकर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में हाईकोर्ट के निर्णय और भारत सरकार बनाम राजीव कुमार केस में सुप्रीमकोर्ट के निर्णय की नजीर प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिना उचित कारण के कर्मचारी को लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए एसएसपी बिजनौर को आदेश दिया है कि वह निलंबन आदेश वापस लेने पर दो माह में निर्णय लें।
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0 गिरफ्तारी पर रोक के बाद निलंबन आदेश वापस लेने पर विचार का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित नहीं रखा जा सकता है। तय समय के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबन आदेश पर पुनर्विचार कर निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने बिजनौर के निलंबित पुलिस कांस्टेबल अरविंद कुमार के निलंबन आदेश पर पुनर्विचार कर निर्णय लेने के लिए कहा है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि अरविंद कुमार की बिजनौर स्वाट टीम में तैनाती थी। इस दौरान उसके खिलाफ एक्साइज एक्ट और आईपीसी की धाराओं पर मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप है कि उसने विभाग की गोपनीय सूचनाओं को लीक किया और अभियुक्त को गैरकानूनी तरीके से मदद पहुंचाई। इस आरोप में उसके खिलाफ 30 जनवरी 2018 को सिवाला कला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
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याची ने प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मगर इस दौरान विभागीय कार्रवाई करते हुए एसएसपी बिजनौर ने उसे निलंबित कर दिया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निलंबन आदेश को चुनौती दी गई। अधिवक्ता का कहना था जब इस मामले में याची की गिरफ्तारी पर रोक लग चुकी है तो फिर उसे निलंबित रखना उचित नहीं है। अधिवक्ता ने रमाशंकर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में हाईकोर्ट के निर्णय और भारत सरकार बनाम राजीव कुमार केस में सुप्रीमकोर्ट के निर्णय की नजीर प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिना उचित कारण के कर्मचारी को लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए एसएसपी बिजनौर को आदेश दिया है कि वह निलंबन आदेश वापस लेने पर दो माह में निर्णय लें।
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