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कॉलेजों में सीसीटीवी, बायोमेट्रिक शिक्षकों का अपमान:यज्ञदत
Updated Sat, 08 Jul 2017 08:27 PM IST
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कॉलेजों में सीसीटीवी, बायोमेट्रिक शिक्षकों का अपमान: डॉ.यज्ञदत्त
- इस व्यवस्था के बजाए शिक्षकों, कर्मचारियों को कार्य संस्कृति की प्रेरणा देने को कहा
इलाहाबाद (ब्यूरो)। विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी कैमरे भले लग गए हों, लेकिन इसका विरोध भी जारी है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र के विधायक डॉ.यज्ञदत्त शर्मा ने इस व्यवस्था को शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए अपमानजनक कहा है। उनका कहना है कि यदि अंगूठा लगाने से पढ़ाई अच्छी होने की संभावना है तो अंगूठा छाप लोगों को शिक्षक बना दिया जाए। कहा कि ऐसी अपमानजनक व्यवस्था के स्थान पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कार्य संस्कृति की प्रेरणा दी जानी चाहिए। शिक्षकों के अच्छे परीक्षा परिणाम आने पर उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में पहली बार अंगूठा लगाने की व्यवस्था की गई है। अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अंगूठा हाजिरी दर्ज कराएं और विद्यालय छोड़ते समय भी यही करें। ज्यादातर विद्यालय में यह व्यवस्था हो भी गई, जहां नहीं हुई, वहां भी इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है। कहा कि सरकार की यह योजना क्या रंग लाएगी, यह भविष्य बताएगा।
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- इस व्यवस्था के बजाए शिक्षकों, कर्मचारियों को कार्य संस्कृति की प्रेरणा देने को कहा
इलाहाबाद (ब्यूरो)। विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी कैमरे भले लग गए हों, लेकिन इसका विरोध भी जारी है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र के विधायक डॉ.यज्ञदत्त शर्मा ने इस व्यवस्था को शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए अपमानजनक कहा है। उनका कहना है कि यदि अंगूठा लगाने से पढ़ाई अच्छी होने की संभावना है तो अंगूठा छाप लोगों को शिक्षक बना दिया जाए। कहा कि ऐसी अपमानजनक व्यवस्था के स्थान पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कार्य संस्कृति की प्रेरणा दी जानी चाहिए। शिक्षकों के अच्छे परीक्षा परिणाम आने पर उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में पहली बार अंगूठा लगाने की व्यवस्था की गई है। अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अंगूठा हाजिरी दर्ज कराएं और विद्यालय छोड़ते समय भी यही करें। ज्यादातर विद्यालय में यह व्यवस्था हो भी गई, जहां नहीं हुई, वहां भी इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है। कहा कि सरकार की यह योजना क्या रंग लाएगी, यह भविष्य बताएगा।
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