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काम नहीं आया आयुष्मान, अब चंदे से बचेगी जान
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दुनका। आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी गरीब परिवार इलाज के लिए रकम जुटाने को दर-दर की ठोकरें खा रहा है। अस्पतालों ने आयुष्मान कार्ड इंटरनेट पर चढ़ा न होने से मुफ्त इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए तो परिवार सबकुछ दांव पर लगाकर जैसे तैसे मरीज को इलाज के लिए लेकर पहुंचा लेकिन इस बीच संक्रमण फैलने की वजह से उसका एक पैर काटना पड़ा। अब दूसरा पैर भी संक्रमित हो गया है। इकलौते कमाऊ सदस्य की इस हालत पर परिवार बेबस हो गया है। उनके इलाज के लिए पत्नी बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता आसपास के इलाके में चंदा मांगते घूम रहे हैं।
आनंदपुर गांव के हरपाल वाल्मीकि 11 अप्रैल की रात नौ बजे घर के बाहर टहल रहे थे तभी शीशगढ़ की ओर से आई तेज रफ्तार पिकअप ने सड़क से उतरकर उन्हें जोरदार टक्कर मार दी थी। महीने भर से हरपाल बरेली के एक अस्पताल में भर्ती थे। संक्रमण फैला तो डॉक्टरों को उनका दाहिना पैर काटना पड़ा। अब दूसरे पैर में भी संक्रमण फैल चुका है। डॉक्टरों ने उसे भी काटने को कह दिया है। निजी अस्पताल में इलाज कराने को पैसे नहीं बचे तो परिवारवाले उन्हें घर ले आए। बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी समेत छह बच्चों की जिम्मेदारी हरपाल ही उठा रहे थे। इलाज जारी रखने के लिए परिवार आसपास के इलाके में चंदा मांगने को मजबूर है। शाही एसएचओ ने हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर लोगों ने मदद की अपील की है। आनंदपुर और आसपास गांवों के तमाम लोगों ने भी घायल परिवार की आर्थिक मदद की है।
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए गांव में कैंप लगवाया था। इसके बाद पात्रों की सूची लखनऊ भेज दी थी। कार्ड लखनऊ से बनकर आने के बाद वितरित करा दिए थे। कार्ड इंटरनेट पर क्यों नहीं चढ़ा इस बारे में उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं। - डॉ. नवनीत अग्रवाल, सीएचसी प्रभारी मीरगंज
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आनंदपुर गांव के हरपाल वाल्मीकि 11 अप्रैल की रात नौ बजे घर के बाहर टहल रहे थे तभी शीशगढ़ की ओर से आई तेज रफ्तार पिकअप ने सड़क से उतरकर उन्हें जोरदार टक्कर मार दी थी। महीने भर से हरपाल बरेली के एक अस्पताल में भर्ती थे। संक्रमण फैला तो डॉक्टरों को उनका दाहिना पैर काटना पड़ा। अब दूसरे पैर में भी संक्रमण फैल चुका है। डॉक्टरों ने उसे भी काटने को कह दिया है। निजी अस्पताल में इलाज कराने को पैसे नहीं बचे तो परिवारवाले उन्हें घर ले आए। बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी समेत छह बच्चों की जिम्मेदारी हरपाल ही उठा रहे थे। इलाज जारी रखने के लिए परिवार आसपास के इलाके में चंदा मांगने को मजबूर है। शाही एसएचओ ने हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर लोगों ने मदद की अपील की है। आनंदपुर और आसपास गांवों के तमाम लोगों ने भी घायल परिवार की आर्थिक मदद की है।
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आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए गांव में कैंप लगवाया था। इसके बाद पात्रों की सूची लखनऊ भेज दी थी। कार्ड लखनऊ से बनकर आने के बाद वितरित करा दिए थे। कार्ड इंटरनेट पर क्यों नहीं चढ़ा इस बारे में उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं। - डॉ. नवनीत अग्रवाल, सीएचसी प्रभारी मीरगंज
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