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रोडवेज के इंतजाम फेल, 20 किलोमीटर पैदल चले श्रद्धालु
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रोडवेज के इंतजाम फेल, 20 किलोमीटर पैदल चले श्रद्धालु
0 रेलवे स्टेशन से भी दूर की गई शटल बसें, परेशान हुए लोग
0 श्रद्धालु बोले जब भीड़ ही नहीं , तो क्यों रोका गया वाहनों का आवागमन
प्रयागराज। कुंभ के पहले ही स्नान पर्व पर रोडवेज के सारे दावे हवा हवाई साबित हुए। यूं तो रोडवेज ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों से 500 शटल बस चलाने का दावा किया था। रोडवेज के इस दावे के विपरीत मंगलवार को लाखों श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर चलना पड़ा। इस वजह से महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई। नेहरू पार्क के पास बनाए गए अस्थायी बस स्टेशन के पूर्व ही बसें रोक दिए जाने की वजह से श्रद्धालुओं को वहां से 20 किलोमीटर दूर संगम तक पैदल ही जाना पड़ा। इस बीच रोडवेज ने विभिन्न शहरों के लिए अस्थायी बस स्टेशनों से दो हजार बसों का संचालन किया।
रोडवेज की शटल सेवा किन मार्गों से चली उसके बारे में भी श्रद्धालुओं को जानकारी नहीं थी। जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में उतरने के बाद यात्रियों को वहां ये बताने वाला भी कोई नहीं था कि वे संगम किस साधन से पहुंचे। नवाब युसूफ रोड पर पानी की टंकी और फायर बिग्रेड चौराहे पर रोड ब्लॉक कर दिए जाने की वजह से दिन भर वाहनों का आवागमन बाधित रहा। इसके पूर्व सोमवार को इस सड़क पर शटल बसें चल रही थी। लेकिन मंगलवार को बस संचालन न होने से लोग परेशान हुए। सिविल लाइंस साइड में उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल ही संगम रवाना हुए। जबकि शटल बसें हाईकोर्ट, पत्थर गिरजा, एमजी मार्ग होते हुए चली। जंक्शन से आने वाले श्रद्धालुओं को पत्थर गिरजा से गुजर रही शटल बसों के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई। साथ ही इस रूट पर चलने वाली शटल बसों की संख्या भी अन्य दिनों के मुकाबले कम ही चली। हनुमान मंदिर चौराहा और लोहिया चौराहे पर शटल बसें जरूर दिखी। इसमें से अधिकांश फाफामऊ की ओर ही जाती दिखाई दी। मेला क्षेत्र में शटल बसों का संचालन नहीं हुआ। इस वजह से श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन आदि स्थानों से पैदल ही मेला क्षेत्र तक जाना पड़ा। इटावा के विनय गोस्वामी, नेहा गोस्वामी सपरिवार जंक्शन उतरे तो उन्हें अपनी वृद्ध मां के लिए संगम तक जाने का कोई साधन नहीं मिला। मेडिकल चौराहे तक पैदल जाने के बाद वे चौराहे के पास ही बैठ गए। बाद में एक ट्राली मिली तो वे उसमें सवार होकर बैठ गए। इसी तरह कानपुर के शशांक रस्तोगी, बृजेश श्रीवास्तव, प्रभा श्रीवास्तव भी संगम जाने का साधन न मिलने से मायूस हो गए। अधिकांश लोगों का यही कहना था कि जब भीड़ नहीं है तो संगम जाने वाले वाहनों को क्यों रोका गया। उधर अस्थाई बस स्टेशनों से भी संगम जाने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं को पैदल ही सफर तय करना पड़ा। फाफामऊ रूट पर शटल बसें तो दिखी, लेकिन सभी यात्रियों से ठसाठस ही रहीं। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक ने सभी अस्थायी बस स्टेशनों से दो हजार बस संचालित करने का दावा दिया।
सिविल लाइंस बस स्टेशन में पसरा सन्नाटा
0 रोडवेज के शहर के सबसे बड़े सिविल लाइंस बस स्टेशन पर दिन भर बसों की आवाजाही बंद रही। यहां कुछ एसी बसों के अलावा सामान्य बसों का संचालन दिन भर नहीं हुआ। खाली शटल बसें यहां जरूर खड़ी दिखाई दी। दरअसल इस बार लखनऊ, कानपुर, आगरा, दिल्ली, बरेली रूट से आने वाली बसों को स्नान पर्व और उसके एक दिन पहले एवं एक दिन बाद शहर में नहीं आएंगी। जबकि इसके पूर्व में हुए कुंभ के दौरान संबंधित रूट की बसें सिविल लाइंस बस स्टेशन से ही संचालित होती थी। इस बार इन रूटों की बसें नेहरू पार्क और फाफामऊ से संचालित हुई। सिविल लाइंस से कुछ एसी बसों का ही संचालन हुआ। यहां परिसर में खाली शटल बसें जरूर खड़ी दिखाई दी।
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0 रेलवे स्टेशन से भी दूर की गई शटल बसें, परेशान हुए लोग
0 श्रद्धालु बोले जब भीड़ ही नहीं , तो क्यों रोका गया वाहनों का आवागमन
प्रयागराज। कुंभ के पहले ही स्नान पर्व पर रोडवेज के सारे दावे हवा हवाई साबित हुए। यूं तो रोडवेज ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों से 500 शटल बस चलाने का दावा किया था। रोडवेज के इस दावे के विपरीत मंगलवार को लाखों श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर चलना पड़ा। इस वजह से महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई। नेहरू पार्क के पास बनाए गए अस्थायी बस स्टेशन के पूर्व ही बसें रोक दिए जाने की वजह से श्रद्धालुओं को वहां से 20 किलोमीटर दूर संगम तक पैदल ही जाना पड़ा। इस बीच रोडवेज ने विभिन्न शहरों के लिए अस्थायी बस स्टेशनों से दो हजार बसों का संचालन किया।
रोडवेज की शटल सेवा किन मार्गों से चली उसके बारे में भी श्रद्धालुओं को जानकारी नहीं थी। जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में उतरने के बाद यात्रियों को वहां ये बताने वाला भी कोई नहीं था कि वे संगम किस साधन से पहुंचे। नवाब युसूफ रोड पर पानी की टंकी और फायर बिग्रेड चौराहे पर रोड ब्लॉक कर दिए जाने की वजह से दिन भर वाहनों का आवागमन बाधित रहा। इसके पूर्व सोमवार को इस सड़क पर शटल बसें चल रही थी। लेकिन मंगलवार को बस संचालन न होने से लोग परेशान हुए। सिविल लाइंस साइड में उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल ही संगम रवाना हुए। जबकि शटल बसें हाईकोर्ट, पत्थर गिरजा, एमजी मार्ग होते हुए चली। जंक्शन से आने वाले श्रद्धालुओं को पत्थर गिरजा से गुजर रही शटल बसों के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई। साथ ही इस रूट पर चलने वाली शटल बसों की संख्या भी अन्य दिनों के मुकाबले कम ही चली। हनुमान मंदिर चौराहा और लोहिया चौराहे पर शटल बसें जरूर दिखी। इसमें से अधिकांश फाफामऊ की ओर ही जाती दिखाई दी। मेला क्षेत्र में शटल बसों का संचालन नहीं हुआ। इस वजह से श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन आदि स्थानों से पैदल ही मेला क्षेत्र तक जाना पड़ा। इटावा के विनय गोस्वामी, नेहा गोस्वामी सपरिवार जंक्शन उतरे तो उन्हें अपनी वृद्ध मां के लिए संगम तक जाने का कोई साधन नहीं मिला। मेडिकल चौराहे तक पैदल जाने के बाद वे चौराहे के पास ही बैठ गए। बाद में एक ट्राली मिली तो वे उसमें सवार होकर बैठ गए। इसी तरह कानपुर के शशांक रस्तोगी, बृजेश श्रीवास्तव, प्रभा श्रीवास्तव भी संगम जाने का साधन न मिलने से मायूस हो गए। अधिकांश लोगों का यही कहना था कि जब भीड़ नहीं है तो संगम जाने वाले वाहनों को क्यों रोका गया। उधर अस्थाई बस स्टेशनों से भी संगम जाने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं को पैदल ही सफर तय करना पड़ा। फाफामऊ रूट पर शटल बसें तो दिखी, लेकिन सभी यात्रियों से ठसाठस ही रहीं। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक ने सभी अस्थायी बस स्टेशनों से दो हजार बस संचालित करने का दावा दिया।
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सिविल लाइंस बस स्टेशन में पसरा सन्नाटा
0 रोडवेज के शहर के सबसे बड़े सिविल लाइंस बस स्टेशन पर दिन भर बसों की आवाजाही बंद रही। यहां कुछ एसी बसों के अलावा सामान्य बसों का संचालन दिन भर नहीं हुआ। खाली शटल बसें यहां जरूर खड़ी दिखाई दी। दरअसल इस बार लखनऊ, कानपुर, आगरा, दिल्ली, बरेली रूट से आने वाली बसों को स्नान पर्व और उसके एक दिन पहले एवं एक दिन बाद शहर में नहीं आएंगी। जबकि इसके पूर्व में हुए कुंभ के दौरान संबंधित रूट की बसें सिविल लाइंस बस स्टेशन से ही संचालित होती थी। इस बार इन रूटों की बसें नेहरू पार्क और फाफामऊ से संचालित हुई। सिविल लाइंस से कुछ एसी बसों का ही संचालन हुआ। यहां परिसर में खाली शटल बसें जरूर खड़ी दिखाई दी।
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