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जिसे परिवार ने मान लिया था मृत... वह जेल में है निरुद्ध

Mon, 12 Apr 2021 03:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा  अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
 अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 12 Apr 2021 03:02 AM IST
सार

  • दो साल पहले दिल्ली में पति से बिछड़ गई थी मानसिक कमजोर युवती
  • किसी तरह अलीगढ़ पहुंची, सासनी गेट में बच्चा चुराते पकड़ी गई थी
  • जेल में दिया बच्चे को जन्म, खुद की तबीयत इलाज से हो गई दुरुस्त

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Whom the family believed was dead is in jail for two years 
पुष्पलता... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस पुष्पलता को उसके परिवार ने मान लिया था कि वह कहीं मर तो नहीं गई, वह पुष्पलता पिछले दो साल से यहां जेल में बच्चा चोरी के आरोप में निरुद्ध है। हालांकि, मानसिक रूप से कमजोर विवाहित पुष्पलता ने गिरफ्तारी के समय ही अपने मायके का पता पुलिस को बताया था। मगर पुलिस उस पते की तस्दीक न कर सकी और जेल भेजकर खानापूर्ति कर ली। अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के प्रयास से युवती का परिवार खोज लिया गया है। जेल के अधिकारियों ने युवती की उसके पिता से बात कराई है और जल्द ही उनकी मुलाकात कराने की तैयारी है। खास बात है कि जेल प्रशासन द्वारा कराए गए इलाज से अब उसकी तबियत भी काफी हद तक ठीक है।

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युवती ऐसे पहुंची जेल
मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के गांव अस्ता खरजमा, थाना धरधारी की पुष्पलता पुत्री दुर्गेश प्रसाद का विवाह झारखंड के रविरंजन से हुई। शादी के बाद पुष्पलता व रविरंजन दिल्ली आकर रहने लगे। यहां दंपती के एक बेटी परी हुई, जो चार साल की है। रविरंजन के अनुसार, पुष्पलता जब फिर से गर्भवती हुई तो उसे मानसिक बीमारी लग गई और प्रसव होने से 15 दिन पहले जून 2019 में वह दिल्ली से गायब हो गई। उसे दिल्ली, उसके आसपास और बिहार में खोजा गया। 28 जुलाई 2019 की सुबह पुष्पलता को सासनी गेट बिहारी नगर में 6 साल के बच्चे कबीर को चोरी कर ले जाते समय लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। उस समय वह गर्भवती और मानसिक रूप से कमजोर मानी गई। पुलिस ने बच्चा चोरी प्रयास के मुकदमे में जेल भेज दिया गया। 
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पैदा हुआ बच्चा अनाथ आश्रम में भेजना पड़ा
प्रसव का समय आने पर कारागार प्रशासन ने उसे जिला महिला अस्पताल भेजा, जहां उसने 16 अगस्त को बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां-बेटे को जेल ले आया गया तो वह मानसिक कमजोरी के चलते बच्चे को मारने, काटने लगी। कई दिन के प्रयास के बाद बच्चे को न्यायालय से अनुमोदन लेकर आगरा स्थित अनाथ आश्रम भेज दिया गया और युवती को इलाज के लिए मानसिक आरोग्यशाला वाराणसी भेज दिया। जहां लंबे समय तक चले इलाज के बाद जब उसकी तबियत ठीक हो गई तो 20 अक्तूबर 2020 को वह अलीगढ़ जेल आ गई।
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अब उसे याद आया बेटा और परिवार
जेल आने के बाद उसे उसका बेटा, पति, मां-बाप आदि याद आने लगे। पिछले दिनों विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जेल में बंदियों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान उस महिला ने अपनी शिकायत देते हुए बच्चा व मां-बाप और पति से मिलने की बात कही। बताया कि उसका आधार कार्ड खो गया है। उसने मायके का पता बताया। इस पर प्राधिकरण सचिव ने नालंदा के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी का नंबर इंटरनेट के जरिये प्राप्त कर उनसे संपर्क किया। उन्हें पूरा प्रकरण बताते हुए उनके निर्देश पर नालंदा के पीएलवीकर्मी को युवती के पिता के घर भेजा गया। बाद में जेल अधिकारियों के मोबाइल पर युवती की उसके पिता से बात कराई। यह सुनकर उसका परिवार, पति हैरान रह गए।

दोनों न्यायिक अधिकारियों का परिवार ने जताया आभार
अलीगढ़ के डीएलएस सचिव व नालंदा के प्रधान दंडाधिकारी का उनके पिता ने आभार जताया है। यह खबर दिल्ली में पुष्पलता के पति रविरंजन को भी मिल गई है। बिहार से पिता व दिल्ली से पति अलीगढ़ आने को तैयार हैं। कुछ कानूनी औपचारिकताओं के बाद मुलाकात के भी संकेत मिल रहे हैं। 

पत्नी अलीगढ़ जेल में और बेटा आगरा अनाथ आश्रम में है, यह खबर सुनकर वह ईश्वर व न्यायिक अधिकारियों के प्रति बेहद आभारी हैं। जल्द ही वह पत्नी से मिलने आएगा और कानूनी अनुसार जैसे भी संभव होगा, उसकी रिहाई कराई जाएगी। मां के मिलने की खबर सुनकर सबसे ज्यादा खुशी चार साल की बेटी परी को है।
- रविरंजन, पुष्पलता का पति

पुष्पलता द्वारा अपनी समस्या विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव को लिखित में दी गई थी। उनके प्रयास से महिला का परिवार मिला है। अब आगे की कानूनी औपचारिकताओं के बाद ही रिहाई हो सकेगी।

- पीके सिंह, जेलर अलीगढ़

मुकदमे में लगी है चार्जशीट, एसएसपी को लिखा पत्र

सासनी गेट थाने पर 28 जुलाई 2019 को दर्ज अपराध संख्या 358/2019 धारा 452, 363 के मुकदमे में पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान ले लिया है। हां, युवती के इलाज के लिए वाराणसी रहने के कारण अभी चार्ज नहीं लगा है। अब युवती की रिहाई न्यायालय से जमानत या पुलिस की पैरोकारी से संभव है। इसे लेकर डीएलएस सचिव के स्तर से एसएसपी अलीगढ़ को पत्र लिखा गया है, जिसमें पूरे प्रकरण का उल्लेख कर उसकी बीमारी आदि का हवाला दिया गया है। मामले में बिहार, नालंदा के न्यायिक अधिकारियों को कानूनी औपचारिकताओं के अनुसार युवती के परिवार को यहां भिवजाने आदि का पत्र लिखा गया है। अब युवती की रिहाई कब और कैसे होगी, यह न्यायालय स्तर से तय होगा।

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