Aligarh News: यमुना का लगातार बढ़ रहा जलस्तर, छह गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों का पलायन शुरू
महाराजगढ़ में पानी का स्तर बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीण अब आबादी से दूसरे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे गांव को छोड़ चुके हैं। अब केवल घरों में पशुओं की देखभाल के लिए पुरुष ही रह गए हैं। टप्पल में बने जमुना खंड इंटर कॉलेज में बने राहत शिविर में भी ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
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विस्तार
पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश के कारण गंगा और यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खासकर यमुना में जलस्तर बढ़ जाने से शनिवार को बाढ़ ने अब रौद्र रूप धारण कर लिया। टप्पल इलाके में छह गांव पानी में डूब गए हैं। करीब 5000 बीघा से अधिक फसल पानी में डूब जाने से बर्बाद हो गई है। पशुओं के चारे का संकट भी गहरा गया है। कई गांवों का एक-दूसरे से संपर्क मार्ग भी टूट चुका है। इससे ग्रामीणों का अब पलायन भी शुरू हो गया है। महाराजगढ़ में पानी का स्तर बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीण अब आबादी से दूसरे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे गांव को छोड़ चुके हैं। अब केवल घरों में पशुओं की देखभाल के लिए पुरुष ही रह गए हैं। टप्पल में बने जमुना खंड इंटर कॉलेज में बने राहत शिविर में भी ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार तक ग्रामीण गांव छोड़ने को तैयार नहीं थे, लेकिन यमुना में पानी बढ़ने एवं उसके गांव और घरों में घुस जाने से उनका गांव से पलायन शुरू हो गया है। गांव नगला अमर सिंह, शेरपुर, पखौदना में भी लोगों ने भी दूसरे दिन सुरक्षित स्थानों पर जाना शुरू कर दिया है।
महाराजगढ़ गांव में धान की फसल देखने खेत पर गए तीन युवक एवं एक ग्रामीण की चार भैंस भी बाढ़ के पानी में बह गईं। हालांकि ग्रामीणों के शोर मचाने एवं राहत कार्यों में जुटे गोताखोरों ने करीब डेढ़ किमी दूर जाकर इन्हें नाव से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गांव ऊंटासानी, रामगढ़ी, धारा की गढ़ी समेत कई गांवों में हजारों बीघा फसल पानी में डूब चुकी है। पशुओं के चारे का संकट भी बन गया है। इन सभी गांवों के आवागमन के रास्तों समेत चारों ओर पानी भर गया है।
खास बातें
- 200.30 मीटर है यमुना में जलस्तर
- 200.600 मीटर पर यमुना में खतरे का निशान
- 178.50 मीटर है अभी गंगा में जल स्तर
- 178.765 मीटर पर गंगा में खतरे का है निशान
अफसरों के साथ पीएसी बल ने डारा डेरा
यमुना में पिछले कई दिनों से पानी लगातार बढ़ रहा है। खतरे के निशान से पानी ऊपर जा चुका है। जो आस-पास के गांवों को अपनी चपेट ले रहा है। महाराजगढ़ गांव में पिछले चार दिन से चारों ओर से पानी में डूबा हुआ है। निचले इलाके वाले घरों में पानी भर गया है। शेरपुर, पखौदना गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। यहां भी घरों के अंदर पानी बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना है। उधर, बाढ़ को लेकर पुलिस-प्रशासनिक अफसर डेरा डाले हुए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व मीनू राणा, एसपी देहात पलाश बंसल, एसडीएम खैर मोहम्मद अमान ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को खाने के साथ ही सूखा राशन भी वितरित कराया।
एडीएम वित्त एंव राजस्व मीनू राणा ने बताया कि जलस्तर को देखते हुए गांव में नाव और स्टीमर की तैनाती कर दी गई है। ग्रामीणों एवं पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। टप्पल के साथ ही गांव लालपुर में भी राहत शिविर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि ओखला बैराज के डानस्ट्रीम में यमुना नदी का जल स्तर 200.300 मी तथा स्केपिंग डिस्चार्ज 3,19,099 क्यूसेक है। जो बैराज की डिस्चार्ज परिकल्पित क्षमता से अधिक है। ओखला बैराज पर यमुना नदी का जल स्तर खतरे के निशान 200.600 मी. के पास है। उन्होंने बताया कि संकेतों के अनुसार यमुना नदी का जल स्तर घटने का पूर्वानुमान है।
दो दिन में होगा पानी कम - एसडीएम
एसडीएम खैर मोहम्मद अमान ने बताया कि यमुना का जलस्तर पिछले कई दिनों से 200 मीटर से ऊपर है, लेकिन अब अगले दो दिन में कमी आने की पूरी उम्मीद है। नई दिल्ली स्थित ओखला बैराज में भी अब जलस्तर कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परेशान न हों, पुलिस-प्रशासन सबके साथ खड़ा है।
गंगा में भी तेजी से बढ़ रहा जलस्तर
यमुना के रौद्र रूप आने के बाद गंगा नदी में भी तेजी से जल स्तर बढ़ रहा है। पानी अब खतरे के निशान के बेहद नजदीक आ गया है। तहसील प्रशासन भी इसको लेकर पूरी तरह से सतर्क है। जिला पंचायात अध्यक्ष विजय सिंह एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता ठा. श्यौराज सिंह ने शनिवार को एसडीएम अतरौली अनिल कटियार के साथ सांकरा गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से जलस्तर को देखते हुए जागरुक रहने एवं खासकर बच्चों से गंगा की ओर न जाने की अपील की।