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दुष्कर्म का झूठा मुकदमा लिखवाने में सपा नेता के दो भाई गिरफ्तार
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मडराक में महिला के फर्जी मुकदमा लिखाने के पकड़े गये आरोपी।
- फोटो : CITY OFFICE
देहली गेट के मकदूम नगर के पार्षद चुनाव की रंजिश में सपा नेता शहजाद अल्वी के भाइयों ने सामूहिक दुष्कर्म का झूठा मुकदमा मडराक थाने में दर्ज कराया था। यह मुकदमा सपा नेता के भाइयों ने अपने विरोधियों को फंसाने के लिए महिला को 20 हजार रुपये देकर तैयार किया था। पुलिस जांच में खुलासा होने पर सपा नेता के दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि महिला के खिलाफ धारा 182 के तहत कोर्ट में रिपोर्ट दी गई है।
एसपी क्राइम डॉ. अरविंद ने शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि मकदूम नगर इलाके की महिला ने शुक्रवार दोपहर मडराक थाने पहुंचकर यह सूचना दी थी कि उसके साथ मकदूम नगर के अकरम, शहीद, मेहदी, उरमान व कलीम ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर प्रकरण की विवेचना शुरू की तो चंद घंटों में पूरा भेद खुल गया।
महिला ने स्वीकारा कि सुबह चार बजे वह जब जंगल शौच को गई थी, तभी रास्ते में सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शहजाद अल्वी के भाई शाहबुद्दीन उसे मिले और यह मुकदमा दर्ज कराने के लिए 20 हजार रुपये दिए। महिला ने बताया कि वर्ष 2017 में शहजाद अल्वी की पत्नी व अकरम की पत्नी रुखसार आमने सामने पार्षद का चुनाव लड़ी थीं, जिसमें रुखसार चुनाव जीत गई थीं।
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मतदान के दिन हुए झगड़े में शहजाद अल्वी जेल भी गए थे। उसी मुकदमे में अब फिर से इन लोगों के खिलाफ वारंट हो गए हैं। मुकदमे में समझौते के दबाव के लिए यह झूठा मुकदमा तैयार किया गया। महिला द्वारा पुलिस के सामने व कोर्ट में बयान दर्ज कराने के दौरान सच्चाई स्वीकार किए जाने पर दुष्कर्म का मुकदमा खारिज कर दिया गया।
साथ में महिला के खिलाफ धारा 182 की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए कोर्ट को दी गई है। इधर, इस साजिश में शामिल रहे शहजाद अल्वी के भाई अब्दुल रहमान व शाहबुद्दीन को गिरफ्तार किया गया है। दोनों ने पूछताछ में अपना कृत्य स्वीकारा है। साथ ही बताया कि समझौते के नाम पर अकरम से पांच लाख रुपये मांगे थे। जब उसने समझौते से इनकार कर दिया तो यह साजिश रची गई।
आठ घंटे में मामले का खुलासा
एसपी क्राइम डॉ.अरविंद के अनुसार एसओ मडराक राजीव व उनकी टीम ने आठ घंटे में ही दुष्कर्म के झूठे मामले का खुलासा किया है। इस पर एसएसपी ने पुलिस टीम की पीठ ठोंकी है। उन्होंने बताया कि दोपहर में महिला थाने पहुंची और शाम होते होते सच्चाई सामने आ गई।
एक दिन पहले से मोबाइल में मिली तहरीर
एसपी क्राइम के अनुसार, यह घटना 12 मार्च को होना बताया गया। मगर जब शाहबुद्दीन को गिरफ्तार किया गया तो उसके मोबाइल में 11 मार्च को ही घटना की बिना तारीख के लिखी हुई तहरीर मोबाइल में मिली है। अभी जांच में जो अन्य तथ्य प्रकाश में आएंगे, उसके अनुसार धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
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एसपी क्राइम डॉ. अरविंद ने शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि मकदूम नगर इलाके की महिला ने शुक्रवार दोपहर मडराक थाने पहुंचकर यह सूचना दी थी कि उसके साथ मकदूम नगर के अकरम, शहीद, मेहदी, उरमान व कलीम ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर प्रकरण की विवेचना शुरू की तो चंद घंटों में पूरा भेद खुल गया।
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महिला ने स्वीकारा कि सुबह चार बजे वह जब जंगल शौच को गई थी, तभी रास्ते में सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शहजाद अल्वी के भाई शाहबुद्दीन उसे मिले और यह मुकदमा दर्ज कराने के लिए 20 हजार रुपये दिए। महिला ने बताया कि वर्ष 2017 में शहजाद अल्वी की पत्नी व अकरम की पत्नी रुखसार आमने सामने पार्षद का चुनाव लड़ी थीं, जिसमें रुखसार चुनाव जीत गई थीं।
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मतदान के दिन हुए झगड़े में शहजाद अल्वी जेल भी गए थे। उसी मुकदमे में अब फिर से इन लोगों के खिलाफ वारंट हो गए हैं। मुकदमे में समझौते के दबाव के लिए यह झूठा मुकदमा तैयार किया गया। महिला द्वारा पुलिस के सामने व कोर्ट में बयान दर्ज कराने के दौरान सच्चाई स्वीकार किए जाने पर दुष्कर्म का मुकदमा खारिज कर दिया गया।
साथ में महिला के खिलाफ धारा 182 की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए कोर्ट को दी गई है। इधर, इस साजिश में शामिल रहे शहजाद अल्वी के भाई अब्दुल रहमान व शाहबुद्दीन को गिरफ्तार किया गया है। दोनों ने पूछताछ में अपना कृत्य स्वीकारा है। साथ ही बताया कि समझौते के नाम पर अकरम से पांच लाख रुपये मांगे थे। जब उसने समझौते से इनकार कर दिया तो यह साजिश रची गई।
आठ घंटे में मामले का खुलासा
एसपी क्राइम डॉ.अरविंद के अनुसार एसओ मडराक राजीव व उनकी टीम ने आठ घंटे में ही दुष्कर्म के झूठे मामले का खुलासा किया है। इस पर एसएसपी ने पुलिस टीम की पीठ ठोंकी है। उन्होंने बताया कि दोपहर में महिला थाने पहुंची और शाम होते होते सच्चाई सामने आ गई।
एक दिन पहले से मोबाइल में मिली तहरीर
एसपी क्राइम के अनुसार, यह घटना 12 मार्च को होना बताया गया। मगर जब शाहबुद्दीन को गिरफ्तार किया गया तो उसके मोबाइल में 11 मार्च को ही घटना की बिना तारीख के लिखी हुई तहरीर मोबाइल में मिली है। अभी जांच में जो अन्य तथ्य प्रकाश में आएंगे, उसके अनुसार धाराएं बढ़ाई जाएंगी।