फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Two panchayats claim, the remaining 850 lag behind, the goal of carbon neutrality is far away

Aligarh News: दो पंचायतें दावेदार, बाकी 850 पीछे, कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य दूर

Wed, 25 Mar 2026 03:02 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 03:02 AM IST
विज्ञापन
Two panchayats claim, the remaining 850 lag behind, the goal of carbon neutrality is far away
ग्राम पंचायत का भवन।  - फोटो : samvad
कार्बन न्यूट्रल ग्राम पंचायत बनाने की योजना भले ही बड़े लक्ष्य के साथ शुरू की गई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। जिले की सभी 852 ग्राम पंचायतों में से अब तक एक भी पंचायत प्रदूषण मुक्त घोषित नहीं हो सकी है।
विज्ञापन



सरकार ने वर्ष 2030 तक 45 प्रतिशत और 2070 तक 100 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए पंचायतों के विकास का आकलन अब 10 बिंदुओं पर किया जा रहा है। पहले यह आकलन नौ बिंदुओं पर होता था, जिसमें अब कार्बन न्यूट्रल को नए पैरामीटर के रूप में जोड़ा गया है।
विज्ञापन




हालांकि, शुरुआती सर्वे में टप्पल ब्लॉक की भरतपुर और धनीपुर ब्लॉक की सिकंदरपुर माछुआ ग्राम पंचायत को संभावित माना गया है, लेकिन ये पंचायतें भी अभी शुरुआती चरण में हैं। पूरे जिले में अभी तक कोई भी पंचायत इस लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रदेश स्तर पर भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। अब तक केवल मुरादाबाद जिले के डिलारी ब्लॉक की मिल्क अमावती ग्राम पंचायत को ही कार्बन न्यूट्रल घोषित किया जा सका है। सरकार की ओर से इस उपलब्धि पर 50 लाख रुपये तक के पुरस्कार का प्रावधान भी है, लेकिन इसके बावजूद पंचायतें अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।


विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बन न्यूट्रल बनने के लिए गांवों में बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाना, सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना, डीजल आधारित संसाधनों को कम करना और ई-वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी है। इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम किए बिना लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।

क्या है कार्बन न्यूट्रल?
जब कोई गांव अपनी दैनिक गतिविधियों से उत्सर्जित कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा को उतनी ही मात्रा में अवशोषित कर ले, तो उसे कार्बन न्यूट्रल कहा जाता है। यानी जितना उत्सर्जन, उतना ही अवशोषण करने का संतुलन इसकी कुंजी है।

पंचायतों के प्रयास, लेकिन चुनौतियां बड़ी
. भरतपुर ग्राम पंचायत की प्रधान नीलम देवी बताती हैं कि गांव में बांस के पेड़ों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि यह अन्य पेड़ों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करता है। साथ ही सौर ऊर्जा और ई-वाहनों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।


. सिकंदरपुर माछुआ की प्रधान कल्पना सिंह के अनुसार, गांव में पीपल, बरगद और बांस जैसे पेड़ लगाए जा रहे हैं। डीजल जेनरेटर को सोलर सिस्टम से बदलने और पेट्रोल वाहनों की जगह ई-वाहनों को बढ़ावा देने की योजना है।

इसके बावजूद सबसे बड़ी चुनौती लोगों की जागरूकता, संसाधनों की कमी और योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन की है।

जिला पंचायत राज अधिकारी यतेंद्र सिंह ने बताया कि अब ग्राम पंचायतों के विकास के आकलन में कार्बन न्यूट्रल को दसवें बिंदु के रूप में जोड़ा गया है। चयनित पंचायतों को इस दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं और धीरे-धीरे अन्य पंचायतों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed