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नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिये भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश ः गरिमा

Wed, 11 Dec 2019 02:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 02:15 AM IST
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Try to make india a Hindu nation
प्रेस कांफ्रेंस करती जेएनयू प्रोफेसर गरिमा श्रीवास्तव साथ में प्रोफेसर प्रदीप सक्सेना, प्रोफे? - फोटो : CITY OFFICE
चर्चित पुस्तक ‘देह ही देश’ की लेखिका व जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की प्रोफेसर गरिमा श्रीवास्तव ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश है। प्रो. गरिमा मंगलवार को एएमयू में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुईं।
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उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि जब तक अमित शाह रहेंगे, देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र नहीं रहेगा। हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ घटी हृदय विदारक घटना के बाद चार आरोपियों के एनकाउंटर का समर्थन करते हुए कहा कि देखने में यह भले ही लगता है कि चार लोगों की हत्या मानवाधिकार की हत्या है।
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लेकिन यह हत्या इसलिए स्वीकार्य है, क्योंकि वह किन्हीं लोगों की मानव गरिमा की रक्षा के लिए की गई। इसका ये कतई मतलब नहीं है कि मैं पुलिस की अराजकता के पक्ष में हूं। हैदराबाद आईटी का हब है। वहां आईआईएम है। अगर वो परिणाम (एनकाउंटर) नहीं दिखाया जाता तो वहां के बिजनेस, इंडस्ट्री एवं बाहर से आकर रहने वाले लोगों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ने वाला था। भारतीय कानून व्यवस्था की धीमी गति के कारण यह स्थिति बनी है। जेएनयू के लगातार हो रहे विरोध पर प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने कहा कि सालों के औपनिवेशिक शासन से देश स्वतंत्र हुआ है। देश को बौद्धिकता की जरूरत है। जेएनयू का विरोध करना देश को फिर से गुलामी की ओर धकेल देना है।
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लड़कियां डरना छोड़ें
आवाज संगठन द्वारा होटल पाम ट्री में स्त्री केंद्रित चर्चा में प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने कहा कि लड़कियों को डरना छोड़ कर हक के लिए आवाज उठानी ही होगी। देश में भय का माहौल बनाया जा रहा है। जो सबसे भयभीत होगा, उसे डराया जाएगा। देश में बढ़ते महिला अपराध पर उन्होंने चिंता व्यक्त की और कहा कि यह समय घर में बैठने की नहीं, आवाज उठाने का है।

जेएनयू का आंदोलन का मसला अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का है। उच्च शिक्षा पर हमला चिंतनीय है। वह एएमयू से भी यह उम्मीद कर रही हैं रशीद जहां एवं कुर्रतुल ऐन हैदर की शमा को आने वाली पीढ़ी जलाए रखेगी। उन्होेंने आवाज संगठन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि प्रगतिशील युवाओं की यह आवाज निरंतर बढ़ती जाएगी। इस अवसर पर प्रो. प्रदीप सक्सेना, प्रो. रमेश रावत, दीबा नियाजी, अंजू, निलोफर, सलीम आदि मौजूद थे।
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