एएमयू के शोध में खुलासा: पश्चिमी यूपी के भूजल में मिला तीन गुना से ज्यादा नाइट्रेट, बढ़ेंगी ये बीमारी
अलीगढ़ के गांव बहादुरपुर, शामली के जलालाबाद, मुजफ्फरनगर में मुबारिकपुर और सहारनपुर के मिर्जापुर में पानी के नमूनों की जांच की, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वाधिक खतरनाक स्थिति शामली में है।
विस्तार
पश्चिमी यूपी के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। यह खुलासा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शोध में हुआ है। पानी में नाइट्रेट की मात्र 45 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अलीगढ़, शामली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के भूजल में 95 से 209 मिलीग्राम तक नाइट्रेट की मात्रा मिली है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के भूगर्भ विभाग के एसोसिएट प्राेफेसर डॉ. इजरार अहमद को इस अध्ययन की जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने अलीगढ़ के गांव बहादुरपुर, शामली के जलालाबाद, मुजफ्फरनगर में मुबारिकपुर और सहारनपुर के मिर्जापुर में पानी के नमूनों की जांच की, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वाधिक खतरनाक स्थिति शामली में है। डॉ. इजरार अहमद ने बताया कि नाइट्रेट की मात्रा सेहत के लिए खतरनाक है और कई बीमारियों की वजह बन सकती है।
स्थान - नाइट्रेट की मात्रा
- अलीगढ़ के बहादुरपुर में - 95.2
- शामली के जलालाबाद में - 173.8,
- मुजफ्फरनगर के मुबारकपुर में- 118.9
- सहारनपुर के मिर्जापुर में - 209.3
(नाइट्रेट की मात्रा मिलीग्राम में)
ये है नाइट्रेट
नाइट्रेट और नाइट्राइट, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से बने रसायन हैं। यह पृथ्वी के नाइट्रोजन चक्र का हिस्सा हैं। यह मिट्टी, पानी और हवा में पाए जाते हैं, जिसका इस्तेमाल खाद्य संरक्षण, दवाओं, और युद्ध सामग्री में भी किया जाता है। मानव और पशुओं के मल-मूत्र में नाइट्रेट पाया जाता है।
ये हो सकती हैं बीमारी
कैंसर, मेथेमोग्लोबिनेमिया, थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना, मधुमेह, किडनी कैंसर, गुर्दे की बीमारी (ईएसआरडी)।
नहीं चेते तो हालात होंगे चिंताजनक
डॉ. इजरार अहमद ने बताया कि अलीगढ़ में बहादुरपुर के अलावा राठगांव, छेरत, पहासू, जवां सहित अन्य गांवों में भूजल को लेकर सर्वे किया गया। राठगांव में पानी का टीडीएस 600 से ज्यादा है, जबकि डब्ल्यूएचओ का पानी में मानक 500 है। राठगांव का भूजल स्तर 16:5 मीटर पहुंच गया है, जबकि गंगा-यमुना के बीच के तराई क्षेत्रों में स्थित गांवों में भूजल स्तर 3:5 मीटर है। यहां का जलस्तर के साथ पानी की गुणवत्ता बेहतर है।