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एएमयू से उठी थी आवाज, जो अब्र यहां से उठेगा...
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 23 Aug 2017 01:53 AM IST
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खुशी मनातीं हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव और मुस्लिम महिलाएं।
- फोटो : Amar Ujala
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‘जो अब्र यहां से उठेगा, वह सारे जहां पर बरसेगा...’ एएमयू तराना की चर्चित यह पंक्ति आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चरितार्थ होती नजर आ रही हैं। तीन तलाक के खिलाफ एएमयू की धरती से जोरदार आवाज उठी थी।
कोलकाता अधिवेशन में जब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा तीन तलाक के मसले पर हठधर्मिता की नीति अपनाई गई तो सबसे पहले एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ के एक्सपर्ट प्रो. एम शब्बीर ने पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक एवं देश की प्रसिद्ध समाजसेवी जकिया सोमन ने भी कई बार अलीगढ़ एवं एएमयू की धरती से तीन तलाक को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ आवाज बुलंद की।
एएमयू की बहुत सी शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का समर्थन जकिया सोमन को प्राप्त था। एएमयू की शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शादाब बानो भी तीन तलाक को लेकर मुखर रहीं और महिला मुस्लिम आंदोलन के संदेश को शिक्षिकाओं एवं छात्राओं तक पहुंचाया। महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष डॉ. शीरिन मसरूर भी तीन तलाक के खिलाफ लगातार सक्रिय एवं संघर्षरत रहीं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं महिलाओं को बड़ी जीत हासिल हुई है। हालांकि डॉ. शादाब बानो एवं डॉ. शीरिन मसरूर इसे महिला अधिकार एवं समानता के लिए शुरू आंदोलन की शुरुआत मान रही हैं। इनका मानना है कि आगे और लड़ाई लड़नी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अखिल भारत हिंदू महासभा ने स्वागत किया है। मुस्लिम समाज की महिलाओं ने हिंदू महासभा के कार्यालय पर आकर खुशी मनाई। आतिशबाजी की और मिठाई बांटी। महंत डॉ. पूजा नंद गिरी ने कहा कि जिस कार्य को करने के लिए सनातन धर्म में यज्ञ एवं होम किया जाता है। उस कार्य में सफलता मिलना निश्चित है। उन्होंने सभी मुस्लिम महिलाओं को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि महासभा कार्यालय पर कुछ महीने पहले हवन किया गया था, जिसमें तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुई थीं।
सुप्रीम कोर्ट का शुक्रगुजार हूं औरतों का दुख समझने के लिए। भारत की 9 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहीं थी। अब शौहर तीन तलाक देते हुए डरेंगे। देश की कोर्ट महिलाओं के साथ है। संसद द्वारा बिल पास कर सजा भी तय होगी, जिसकी वजह से मुस्लिम महिलाओं पर होने वाला जुल्म और ज्यादती रुकेगी। तलाक सिर्फ एक महिला का नहीं होता, बच्चे एवं पूरा परिवार तबाह हो जाता है। - डॉ. शीरिन मसरूर, अध्यक्ष महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उत्तर प्रदेश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। इतने दिनों से देश में असंवैधानिक प्रैक्टिस चल रही थी। तीन तलाक जैसे असंवैधानिक प्रैक्टिस के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा था। इस देश में मुस्लिम महिलाओं को भी वहीं अधिकार प्राप्त है जो दूसरों को है। अभी भी वक्त है मुस्लिम कम्युनिटी सोच ले। बराबरी के समाज का निर्माण करे, जिसमें महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हो। - डॉ. शादाब बानो, एएमयू की प्रोफेसर एवं सोशल एक्टिविस्ट
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कोलकाता अधिवेशन में जब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा तीन तलाक के मसले पर हठधर्मिता की नीति अपनाई गई तो सबसे पहले एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ के एक्सपर्ट प्रो. एम शब्बीर ने पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक एवं देश की प्रसिद्ध समाजसेवी जकिया सोमन ने भी कई बार अलीगढ़ एवं एएमयू की धरती से तीन तलाक को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ आवाज बुलंद की।
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एएमयू की बहुत सी शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का समर्थन जकिया सोमन को प्राप्त था। एएमयू की शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शादाब बानो भी तीन तलाक को लेकर मुखर रहीं और महिला मुस्लिम आंदोलन के संदेश को शिक्षिकाओं एवं छात्राओं तक पहुंचाया। महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष डॉ. शीरिन मसरूर भी तीन तलाक के खिलाफ लगातार सक्रिय एवं संघर्षरत रहीं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं महिलाओं को बड़ी जीत हासिल हुई है। हालांकि डॉ. शादाब बानो एवं डॉ. शीरिन मसरूर इसे महिला अधिकार एवं समानता के लिए शुरू आंदोलन की शुरुआत मान रही हैं। इनका मानना है कि आगे और लड़ाई लड़नी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अखिल भारत हिंदू महासभा ने स्वागत किया है। मुस्लिम समाज की महिलाओं ने हिंदू महासभा के कार्यालय पर आकर खुशी मनाई। आतिशबाजी की और मिठाई बांटी। महंत डॉ. पूजा नंद गिरी ने कहा कि जिस कार्य को करने के लिए सनातन धर्म में यज्ञ एवं होम किया जाता है। उस कार्य में सफलता मिलना निश्चित है। उन्होंने सभी मुस्लिम महिलाओं को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि महासभा कार्यालय पर कुछ महीने पहले हवन किया गया था, जिसमें तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुई थीं।
सुप्रीम कोर्ट का शुक्रगुजार हूं औरतों का दुख समझने के लिए। भारत की 9 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहीं थी। अब शौहर तीन तलाक देते हुए डरेंगे। देश की कोर्ट महिलाओं के साथ है। संसद द्वारा बिल पास कर सजा भी तय होगी, जिसकी वजह से मुस्लिम महिलाओं पर होने वाला जुल्म और ज्यादती रुकेगी। तलाक सिर्फ एक महिला का नहीं होता, बच्चे एवं पूरा परिवार तबाह हो जाता है। - डॉ. शीरिन मसरूर, अध्यक्ष महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उत्तर प्रदेश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। इतने दिनों से देश में असंवैधानिक प्रैक्टिस चल रही थी। तीन तलाक जैसे असंवैधानिक प्रैक्टिस के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा था। इस देश में मुस्लिम महिलाओं को भी वहीं अधिकार प्राप्त है जो दूसरों को है। अभी भी वक्त है मुस्लिम कम्युनिटी सोच ले। बराबरी के समाज का निर्माण करे, जिसमें महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हो। - डॉ. शादाब बानो, एएमयू की प्रोफेसर एवं सोशल एक्टिविस्ट