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Aligarh News: 500 करोड़ के टर्नओवर की शर्त ने फंसाया पेंच

Wed, 25 Mar 2026 03:05 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 03:05 AM IST
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The requirement of a turnover of Rs 500 crore has created a problem for local industries to adopt ITI
तालानगरी औद्योगिक क्षेत्र। - फोटो : samvad
जिले के औद्योगिक विकास और कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा लाया गया आईटीआई गोद लेने का प्रस्ताव तकनीकी पेंच में फंस गया है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत औद्योगिक इकाइयों को आईटीआई संस्थानों को गोद लेकर उन्हें पीपीपी मॉडल पर चलाने का अवसर दिया गया था, लेकिन 500 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर की अनिवार्य शर्त अलीगढ़ के उद्यमियों के लिए बड़ी बाधा बन गई है।
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सरकार की मंशा है कि उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार कुशल ऑपरेटर और कारीगर मिल सकें। इसके लिए कंपनियों को आईटीआई संस्थानों के साथ जुड़कर पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण को इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप ढालने का मौका दिया गया। इस पीपीपी मॉडल में वित्तीय ढांचे का प्रावधान कुछ इस प्रकार है कि 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार का रहेगा। 30 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार का और शेष हिस्सा, वह कंपनी जो संस्थान को गोद लेगी। मुख्य समस्या यह है कि नियम के मुताबिक, आईटीआई को गोद लेने वाली कंपनी का न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर 500 करोड़ रुपये होना अनिवार्य है।
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अलीगढ़ मुख्य रूप से ताला और हार्डवेयर उद्योग का केंद्र है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के उपाध्यक्ष उमंग मोगा का कहना है कि जिले में कोई भी एकल लॉक कंपनी या औद्योगिक इकाई इस 500 करोड़ रुपये के टर्नओवर के मानक को पूरा नहीं करती है। इस विसंगति के कारण अलीगढ़ की कोई भी कंपनी आगे नहीं आ पा रही है।
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सरकार ने कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बेहतरीन प्रस्ताव तैयार किया है। इससे कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से ऑपरेटर तैयार कर सकती हैं, लेकिन अलीगढ़ में किसी भी कंपनी का टर्नओवर इतना अधिक नहीं है, जिससे यह प्रक्रिया गतिरोध का शिकार हो गई है। आलोक कुमार झा, अध्यक्ष, आईआईए (अलीगढ़ चैप्टर)




कुशल श्रमिकों की कमी बनी चुनौती
स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो अलीगढ़ के युवाओं को सीधे रोजगार मिलता और इंडस्ट्री को प्रशिक्षित मैनपावर के लिए भटकना नहीं पड़ता। अब व्यापारी मांग कर रहे हैं कि अलीगढ़ जैसे एमएसएमई क्लस्टर वाले शहरों के लिए इस टर्नओवर की सीमा में ढील दी जानी चाहिए या छोटी कंपनियों के समूह को अनुमति मिलनी चाहिए।
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