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अलीगढ़ः अपहरण के 13वें दिन थाने पहुंचा परिवार, चंद घंटों में खुला राज
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विलाप करती महिलाएं।
- फोटो : CITY OFFICE
हालांकि रितिक की हत्या अपहरण के चंद घंटों बाद ही कर दी गई। मगर जागरूकता की कमी कहें या कुछ और। पीड़ित परिवार बच्चे के गायब होने के तेरहवें दिन यानि बुधवार को फिरौती की कॉल आने पर ही थाने पहुंचा। अगर समय से पहुंच गया होता तो शायद तेरह दिन तक भटकना नहीं पड़ता। हां, रितिक के पिता ने इलाके के परिचित रनवीर सिंह नाम के दरोगा को जरूर बताया था कि उनका बच्चा गायब है। उसने कहा भी था कि आप तलाश लो, अगर किसी मदद की जरूरत हो तो बताना। इधर, रक्षाबंधन से ऐन पहले भाई की मौत पर रितिक से छोटी बहन लाड़ली, मां मीना का बुरा हाल है, जबकि सबसे छोटा बेटा बाबू भी बेहाल है।
पिता ने ही डांटा था बेटे को, तभी हुआ गायब
बुधवार देर शाम घर के दरवाजे पर बिलखते हुए किशन सिंह ने खुद मीडियाकर्मियों को पूरा घटनाक्रम बताया। किशन ने बताया कि रितिक 15 जुलाई की दोपहर में मोबाइल हाथ में लेकर ईयर फोन कान में लगाकर इधर उधर टहल रहा था। तो उसे इस बात पर डांट दिया था कि हर समय मोबाइल में लगा रहता है। या तो पढ़ाई कर ले या आराम कर ले। इसके बाद वह मोबाइल घर में छोड़कर दरवाजे की ओर चला गया। फिर नहीं लौटा। चूंकि कुछ साल पहले भी वह इसी तरह गायब हो गया था और अपनी हाथरस में रिश्ते की बहन के घर पहुंचा था। इसलिए लगा कि वह गुस्सा होकर चला गया है। इसलिए रिश्तेदारों में तलाशते रहे और पुलिस को खबर नहीं दी। हां, इलाके के एक दरोगा रनवीर सिंह से उनका परिचय है तो उन्हें वाकया बताया था। इस पर उन्होंने कहा था कि तलाश लो, अगर कोई मदद चाहिए तो बता देना।
पहले बेहोश किया, फिर गला दबाया और रेता
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में स्वीकारा कि प्रमोद किशन से पहली गली में रहता है, जबकि योगेंद्र पीछे वाली गली में रहता है। दोनों में दोस्ती है। प्रमोद सारसौल के एक बाइक शोरूम पर जॉब करता है। दोस्ती में योगेंद्र ने प्रमोद के सामने प्रस्ताव रखा। इसी प्रस्ताव पर घटना वाले दिन दरवाजे पर टहल रहे बालक को प्रमोद ने बहाने से अपने घर बुलाया और उसी समय पहले उसे खाने में नशा देकर बेहोश किया। फिर गला दबाकर हत्या की और गला रेंतकर शव बोरी में बंद कर छत पर डाल दिया। रात करीब 11 बजे शव को योगेंद्र ने अपने परिचित की टिर्री में लादकर नाले में फेंका। अब उन्हें लगा कि परिवार को गुमराह कर दिया जाए। कहीं ऐसा न हो कि हम किसी तरह फंस जाएं। फिरौती की खबर दे देंगे तो परिवार और पुलिस गुमराह होकर घूमेगी। इस पर प्रमोद ने अपने साथी आरव के मोबाइल से फोन पर फिरौती मांग ली। मगर पुलिस ने सर्विलांस से आरव और फिर प्रमोद व यागेंद्र को दबोच लिया।
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पिता ने ही डांटा था बेटे को, तभी हुआ गायब
बुधवार देर शाम घर के दरवाजे पर बिलखते हुए किशन सिंह ने खुद मीडियाकर्मियों को पूरा घटनाक्रम बताया। किशन ने बताया कि रितिक 15 जुलाई की दोपहर में मोबाइल हाथ में लेकर ईयर फोन कान में लगाकर इधर उधर टहल रहा था। तो उसे इस बात पर डांट दिया था कि हर समय मोबाइल में लगा रहता है। या तो पढ़ाई कर ले या आराम कर ले। इसके बाद वह मोबाइल घर में छोड़कर दरवाजे की ओर चला गया। फिर नहीं लौटा। चूंकि कुछ साल पहले भी वह इसी तरह गायब हो गया था और अपनी हाथरस में रिश्ते की बहन के घर पहुंचा था। इसलिए लगा कि वह गुस्सा होकर चला गया है। इसलिए रिश्तेदारों में तलाशते रहे और पुलिस को खबर नहीं दी। हां, इलाके के एक दरोगा रनवीर सिंह से उनका परिचय है तो उन्हें वाकया बताया था। इस पर उन्होंने कहा था कि तलाश लो, अगर कोई मदद चाहिए तो बता देना।
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पहले बेहोश किया, फिर गला दबाया और रेता
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में स्वीकारा कि प्रमोद किशन से पहली गली में रहता है, जबकि योगेंद्र पीछे वाली गली में रहता है। दोनों में दोस्ती है। प्रमोद सारसौल के एक बाइक शोरूम पर जॉब करता है। दोस्ती में योगेंद्र ने प्रमोद के सामने प्रस्ताव रखा। इसी प्रस्ताव पर घटना वाले दिन दरवाजे पर टहल रहे बालक को प्रमोद ने बहाने से अपने घर बुलाया और उसी समय पहले उसे खाने में नशा देकर बेहोश किया। फिर गला दबाकर हत्या की और गला रेंतकर शव बोरी में बंद कर छत पर डाल दिया। रात करीब 11 बजे शव को योगेंद्र ने अपने परिचित की टिर्री में लादकर नाले में फेंका। अब उन्हें लगा कि परिवार को गुमराह कर दिया जाए। कहीं ऐसा न हो कि हम किसी तरह फंस जाएं। फिरौती की खबर दे देंगे तो परिवार और पुलिस गुमराह होकर घूमेगी। इस पर प्रमोद ने अपने साथी आरव के मोबाइल से फोन पर फिरौती मांग ली। मगर पुलिस ने सर्विलांस से आरव और फिर प्रमोद व यागेंद्र को दबोच लिया।
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