The Aligarh Bar Association: 39 अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी, आरक्षण से महिला वकील उत्साहित
दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष व महासचिव के पदों के लिए कांटे की टक्कर के आसार हैं, जिसके लिए प्रत्याशियों ने जोर-आजमाइश तेज कर दी है।
विस्तार
दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के 25 फरवरी को प्रस्तावित मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है। 20 फरवरी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सभी पदों के लिए 39 अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इस चुनाव में महत्वपूर्ण अध्यक्ष व महासचिव के पदों के लिए कांटे की टक्कर के आसार हैं, जिसके लिए प्रत्याशियों ने जोर-आजमाइश तेज कर दी है। मुख्य चुनाव अधिकारी चौ.जितेंद्र सिंह की ओर से अधिकृत सूची जारी की।
ये हैं प्रत्याशी
- अध्यक्ष पद पर कैलाश बाबू गुप्ता, मनोज कुमार शर्मा, रनवीर सिंह जादौन, सतेंद्र सिंह चौहान व उमेश पाठक
- वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर कुंवर आमिर, नरेंद्र सिंह, रामकुमार गुप्ता, सत्यवीर सिंह, शिवकुमार भारद्वाज
- कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अंकित सक्सेना, उदगीथ कुमार, वेदप्रकाश शर्मा
- कोषाध्यक्ष पद पर दीप्ती सिंह जादौन, जैनव जहां, रीता सिंह, सुमनलता वर्मा
- महासचिव पद पर अनिल कुमार शर्मा, जितेंद्र यादव व राजीव मेहरोत्रा
- संयुक्त सचिव प्रशासन पद पर अंकुर अग्रवाल, गुंजन गुप्ता, लखन सिंह, राकेश कुमार दक्ष, तौसीफ अहमद
- संयुक्त सचिव प्रकाशन पद पर प्रदीप शर्मा व राहुल वर्मा
- संयुक्त सचिव पुस्तकालय पद पर संतोष बघेल व सोनू शर्मा
- वरिष्ठ कार्यकारिणी में गुलाब राय भागिया, मनोज कुमार सक्सेना, वेदप्रकाश शर्मा, वेद प्रकाश वार्ष्णेय, विवेक कुमार
- कनिष्ठ कार्यकारिणी में अनीता कुमारी, देवेंद्र सूर्यवंशी, धर्मेंद्र शर्मा, गगन सिंह, लक्ष्मी सैनी
आरक्षण से महिला वकील उत्साहित
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश के बाद बार एसोसिएशन के चुनावों में पहली बार महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण लागू किया गया है। इस फैसले ने दशकों से उपेक्षित महसूस कर रहीं महिला वकीलों को मुख्यधारा की राजनीति और नेतृत्व में आने का सुनहरा अवसर दिया है।
बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के कुल 14 में से 30 प्रतिशत पद अब महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोषाध्यक्ष का पद पूरी तरह से महिला उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखा गया है। महिला वकीलों का मानना है कि अब तक उनके मुद्दों को कार्यकारिणी में उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी, लेकिन अब सीधे प्रतिनिधित्व से उनकी आवाज मजबूती से बुलंद होगी।
इस कदम का स्वागत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता झरना चटर्जी, रिचा गुप्ता, बीनू गुप्ता, और दीप्ति जादौन ने कहा कि यह निर्णय न केवल लैंगिक समानता की जीत है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। हर्षिता सिंह जादौन, अनुपम, पिंकी शर्मा और विमलेश कश्यप ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रतिनिधित्व मिलने के बाद परिसर में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर किया जाएगा।
एजेंडे में कॉमन रूम और प्रसाधन की समस्या
महिला अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि चुनाव जीतकर आने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता कोर्ट परिसर में महिलाओं के लिए स्वच्छ प्रसाधन और एक सर्वसुविधायुक्त 'कॉमन रूम' का निर्माण करवाना होगा। कई साल से ये समस्याएं लंबित थीं, लेकिन अब सत्ता में भागीदारी मिलने से इनका समाधान संभव हो सकेगा।