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Aligarh News: मजबूरी में शुरू किया काम, अब महिलाओं को दे रहीं रोजगार
Tue, 23 Jun 2026 02:29 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Tue, 23 Jun 2026 02:29 AM IST
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सूट पर छपाई करतीं नजमा। संवाद
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आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच जमालपुर हमदर्द निवासी नजमा बेगम ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। घर का खर्च चलाने और बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शुरू किया गया उनका छोटा सा काम आज कई महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन चुका है।
नजमा बेगम ने बताया कि उनके पति जावेद ढकेल लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उन्होंने सूटों पर डिजाइन छपाई का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम घर तक सीमित था, लेकिन गुणवत्ता और मेहनत के कारण धीरे-धीरे उनके द्वारा डिजाइन किए गए सूटों की मांग बढ़ने लगी।
आज नजमा बेगम प्रतिदिन करीब 300 सूटों पर डिजाइन छपाई का कार्य करती हैं। इस काम में उनकी बेटियां अबीसा और अरसी के साथ उनकी देवरानी खुशनुमा भी सहयोग करती हैं। परिवार की महिलाएं डिजाइन छपाई, कढ़ाई और अन्य हस्तशिल्प कार्यों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
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नजमा बेगम द्वारा तैयार किए गए डिजाइन वाले सूट दिल्ली, बंगलुरू, कोलकाता समेत देश के कई शहरों तक पहुंच रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी अपने काम से जोड़ा है। वर्तमान में उनके यहां लगभग 20 महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, रंगाई और डिजाइनिंग जैसे कार्यों के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
नजमा बेगम का कहना है कि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत ने उन्हें सफलता दिलाई। आज वे न केवल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपनी बेटियों की शिक्षा का खर्च भी स्वयं वहन कर रही हैं।
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नजमा बेगम ने बताया कि उनके पति जावेद ढकेल लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में उन्होंने सूटों पर डिजाइन छपाई का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम घर तक सीमित था, लेकिन गुणवत्ता और मेहनत के कारण धीरे-धीरे उनके द्वारा डिजाइन किए गए सूटों की मांग बढ़ने लगी।
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आज नजमा बेगम प्रतिदिन करीब 300 सूटों पर डिजाइन छपाई का कार्य करती हैं। इस काम में उनकी बेटियां अबीसा और अरसी के साथ उनकी देवरानी खुशनुमा भी सहयोग करती हैं। परिवार की महिलाएं डिजाइन छपाई, कढ़ाई और अन्य हस्तशिल्प कार्यों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
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नजमा बेगम द्वारा तैयार किए गए डिजाइन वाले सूट दिल्ली, बंगलुरू, कोलकाता समेत देश के कई शहरों तक पहुंच रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी अपने काम से जोड़ा है। वर्तमान में उनके यहां लगभग 20 महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, रंगाई और डिजाइनिंग जैसे कार्यों के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
नजमा बेगम का कहना है कि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत ने उन्हें सफलता दिलाई। आज वे न केवल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपनी बेटियों की शिक्षा का खर्च भी स्वयं वहन कर रही हैं।