अलीगढ़: श्री हनुमंत चरित्र कथा में डिप्टी सीएम ने सपा पर साधा निशाना, बोले- साइकिल चुनाव से पहले ही पंचर
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शुक्रवार को अलीगढ़ डीएवी इंटर कॉलेज मैदान में श्री हनुमंत चरित्र कथा के समापन में शामिल हुए, जय श्रीराम उद्घोष से शुरुआत, अयोध्या हुई हमारी अब मथुरा-काशी की बारी नारा बुलंद किया।
विस्तार
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार को अलीगढ़ में सपा, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। दावा किया कि 2027 में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनेगी। सपा की चुनावी तैयारियों पर तंज कसते हुए कहा कि उसकी साइकिल तो चुनाव के पहले ही पंचर है।
उपमुख्यमंत्री डीएवी इंटर कॉलेज मैदान में चल रही श्री हनुमंत चरित्र कथा के समापन समारोह शामिल हुए। मीडिया से उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ में चुनाव लड़ें या अलग-अलग, जनता का समर्थन भाजपा को ही मिलेगा। चुनाव के नतीजे आने के बाद विपक्ष केवल मगरमच्छ के आंसू बहाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की विपक्ष की मांग की उन्होंने कड़ी आलोचना की। बिना सीजेपी का नाम लिए कहा कि यदि राजनीति करनी है तो राजनीतिक दल बनाना चाहिए। सपा अध्यक्ष के भगवा रंग से जुड़ाव के सवाल पर मौर्य ने रामायण के कालनेमि प्रसंग का उल्लेख किया। कहा कि चुनाव के समय रंग बदलकर जनता को भ्रमित करने की राजनीति को प्रदेश की जनता अच्छे से समझती है।
अयोध्या हुई हमारी, अब मथुरा काशी की बारी
डीएवी इंटर कॉलेज मैदान में शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन की शुरुआत जय श्रीराम के उद्घोष से की। मंच से अयोध्या हुई हमारी, अब मथुरा-काशी की बारी का नारा भी बुलंद किया। श्री हनुमंत चरित्र कथा समापन समारोह में पहुंचे मौर्य हिंदुत्व एजेंडे को शब्दों से धार देते नजर आए।
उन्होंने यहां अलीगढ़ को कई बार हरिगढ़ नाम से संबोधित किया। कहा कि आज का दिन पावन और पवित्र है। अनंत चतुर्दशी के साथ ही एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है। पं. दीनदयाल ने अंत्योदय का जो दर्शन दिया, उसे केंद्र और प्रदेश की सरकारें धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं। जब-जब भाजपा को देश और प्रदेश में सरकार बनाने का अवसर मिला, पं. दीनदयाल के अंत्योदय के विचारों को जमीन पर उतारने का प्रयास किया गया। आज देश के 150 करोड़ से अधिक लोग कोरोना काल से सरकार की निशुल्क अन्न योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
कल्याण सिंह को किया याद, राम मंदिर आंदोलन का किया जिक्र
उपमुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम मंदिर आंदोलन का भी जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल की भूमिका को भी याद किया। कहा कि 1991 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी। इसके बाद छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाया गया। वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। कार्यक्रम के दौरान मौर्य ने विकसित भारत से जुड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑडियो संदेश मोबाइल के जरिये लोगों को सुनाया।
धार्मिक मंच है, फिर भी चुनाव की बात करनी पड़ रही
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह धार्मिक मंच है, इसलिए वह राजनीतिक बात नहीं करना चाहते थे लेकिन 2027 का चुनाव सामने है। चुनाव के समय जनता की अदालत में सरकार के कार्यों का हिसाब होगा। उन्होंने कहा कि एक वोट की कीमत समझिए। एक वोट से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटता है, गरीबों को आवास मिलता है, बीमारों को इलाज मिलता है और भ्रष्टाचारियों व अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होती है। अब जनता को तय करना है कि वह कैसी सरकार चाहती है। मौर्य ने दावा किया कि 2027 से 2045 तक उत्तर प्रदेश में सपा और देश में कांग्रेस की सरकार नहीं बना सकती है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती एवं सेवा संकल्प अभियान माह के उपलक्ष्य में कोल विधायक अनिल पाराशर की ओर से आयोजित श्री हनुमंत चरित्र कथा को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां हनुमानजी की प्रतिमा एवं गदा भेंट कर उपमुख्यमंत्री का अभिवादन किया गया। इसके पहले उपमुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर लगी चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया। कार्यक्रम में सांसद सतीश गौतम, हाथरस सांसद अनूप प्रधान, एमएलसी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, चौधरी ऋषिपाल सिंह, महापौर प्रशांत सिंघल, छर्रा विधायक ठाकुर रवेंद्रपाल सिंह, इगलास राजकुमार सहयोगी, जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला, जिला महामंत्री शिवनारायण शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह, ठा. गोपाल सिंह, कार्तिक पाराशर मौजूद थे। संचालन राजनारायण सिंह ने किया।
मीठा-मीठा गप और तीखा-तीखा थू
मौर्य ने ये भी कहा कि भाजपा चुनाव हारती है तो विपक्ष जनाधार में कमी की बात करता है। वहीं, चुनाव में हार मिलने पर ईवीएम, चुनाव आयोग और वोट चोरी जैसे आरोप लगाए जाते हैं। विपक्ष की यह राजनीति मीठा-मीठा गप और तीखा-तीखा थू जैसी है। कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के नेता सत्ता से दूर होने से बेचैन हैं। उन्हें लगता है कि देश की सत्ता पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ किए जाने की मांग पर मौर्य ने कहा कि वह इस मांग का पहले भी समर्थन करते रहे हैं।
धार्मिक मंच से भाषण, शब्दों में चुनाव शंखनाद सी ध्वनि
मंच था श्री हनुमंत चरित्र कथा के धार्मिक आयोजन का लेकिन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के शब्दों में 2027 के चुनाव के लिए शंखनाद जैसी ध्वनि सुनाई दी। शुक्रवार को अलीगढ़ पहुंचे मौर्य ने काशी-मथुरा, राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और अलीगढ़ के नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों का जिक्र किया। इनसे संकेत मिला कि भाजपा के लिए आगामी चुनावी के लिए कैसी हवा बनाना चाहती है। मौर्य के भाषण के तेवर और उसमें उठे मुद्दों से यह भी संकेत मिला कि आगामी चुनाव में भाजपा के लिए वैचारिक मुद्दों के साथ सरकार के काम का प्रचार और विपक्ष पर हमला अहम रहेगा।
हरिगढ़ से स्थानीय भावनाओं को छूने का प्रयास
अलीगढ़ के नाम परिवर्तन का जिक्र भी मौर्य के संबोधन में प्रमुखता से आया। हरिगढ़ का संदर्भ स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विमर्श से जुड़ता है। इसे काशी-मथुरा और राम मंदिर जैसे मुद्दों के साथ रखने से भाषण का वैचारिक पक्ष और स्पष्ट दिखाई दिया।वहीं, साइकिल पंचर वाला तंज से सपा पर सीधा निशाना साधा। इस तरह मौर्य ने मंच से भाजपा के वैचारिक मुद्दे, स्थानीय पहचान और विपक्ष पर हमला, तीनों को जोड़ने की कोशिश की।
कल्याण सिंह का जिक्र कर पश्चिमी यूपी का साधा
राम मंदिर के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की भूमिका को याद कर उपमुख्यमंत्री अलीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को सीधे तौर पर साधते नजर आए। उन्होंने कल्याण सिंह की विरासत को भाजपा के मौजूदा राजनीतिक विमर्श से जोड़ने का भी प्रयास किया।
जमीनी स्थिति का लिया फीडबैक
मौर्य का अलीगढ़ दौरा केवल मंच और भाषण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पार्टी नेताओं के आवास पर पहुंचकर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया। इसे 2027 के चुनाव के मद्देनजर संगठन की तैयारियों को परखने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है।