{"_id":"5e9dfd298ebc3ed546073ebb","slug":"special-precaution-for-pregnant-women-city-office-news-ali2318186108","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना खतरे को देखते हुए गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना खतरे को देखते हुए गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़।
जेएन मेडिकल कालेज के आब्सटेट्रिक्स एंड गायनाकालोजी विभाग के शिक्षकों ने कोरोना के खतरे को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिलाओं के सुरक्षात्मक उपाय के लिये आवश्यक दिशा निर्देश तथा स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया है। यह महिलाओं के रोग तथा प्रसूति से संबंधित चिकित्सकों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थय कर्मियों के लिये लाभकारी होगा।
विभाग के डॉ. इनास मुश्ताक तथा डॉ. आमना कुरैशी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए दिशा निर्देशों की पुस्तिका का विमोचन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. तमकीन खान ने कहा कि इन दिशा निर्देशों को जेएन मेडिकल कालेज ने पहले ही अपना लिया है। उन्होंने बताया कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर को कोविड-19 के आइसोलेशन यूनिट में बदलने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। कालेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट प्रो. हारिस खान तथा प्रो. अफजाल अनीस की सहायता से एक सप्ताह के भीतर लेबर रूम तथा आपरेशन थिएटर कांपलेक्स तैयार किया जा चुका है। प्रोफेसर खान ने बताया कि इन दिशा निर्देशों की सहायता से महिला रोग एवं प्रसूति से जुड़े स्वास्थ्य कर्मी अब आसानी से रोगियों, विशेष कर गर्भवती महिलाओं की कोविड जांच, उनकी यात्राओं तथा उनके आवासीय स्थान आदि का रिकार्ड रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की प्रसूति संक्रमण रहित क्यूबिकल्स में कराई जाएगी ताकि संक्रमण का खतरा न हो।
सीजेरियन मामलों में महिलाओं को कोविड संदिग्ध मैटरनिटी ओटी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उनमें सांस लेने की कठिनाई आदि की समय समय पर जांच की जाएगी। प्रोफेसर खान ने बताया कि अब तक की निगरानी से पता चला है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण की दर इस बीमारी से संक्रमित सामान्य महिलाओं के मुकाबले बहुत कम है। इसके बावजूद प्रसूति के दौरान होने वाले संक्रमण का खतरा मोल नहीं लिया जा सकता। दिशा-निर्देशों में रोगी की स्थिति के अनुरूप उन्हें ऐस्प्रिन, टोकोलाइसिस तथा मैग्नीशियम सल्फेट कम डोज में प्रयोग करना सही बताया गया है। आईब्रूफेन तथा इंडोमेथासिन के प्रयोग को सख्ती से मना किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जेएन मेडिकल कालेज के आब्सटेट्रिक्स एंड गायनाकालोजी विभाग के शिक्षकों ने कोरोना के खतरे को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिलाओं के सुरक्षात्मक उपाय के लिये आवश्यक दिशा निर्देश तथा स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया है। यह महिलाओं के रोग तथा प्रसूति से संबंधित चिकित्सकों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थय कर्मियों के लिये लाभकारी होगा।
विभाग के डॉ. इनास मुश्ताक तथा डॉ. आमना कुरैशी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए दिशा निर्देशों की पुस्तिका का विमोचन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. तमकीन खान ने कहा कि इन दिशा निर्देशों को जेएन मेडिकल कालेज ने पहले ही अपना लिया है। उन्होंने बताया कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर को कोविड-19 के आइसोलेशन यूनिट में बदलने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। कालेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट प्रो. हारिस खान तथा प्रो. अफजाल अनीस की सहायता से एक सप्ताह के भीतर लेबर रूम तथा आपरेशन थिएटर कांपलेक्स तैयार किया जा चुका है। प्रोफेसर खान ने बताया कि इन दिशा निर्देशों की सहायता से महिला रोग एवं प्रसूति से जुड़े स्वास्थ्य कर्मी अब आसानी से रोगियों, विशेष कर गर्भवती महिलाओं की कोविड जांच, उनकी यात्राओं तथा उनके आवासीय स्थान आदि का रिकार्ड रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की प्रसूति संक्रमण रहित क्यूबिकल्स में कराई जाएगी ताकि संक्रमण का खतरा न हो।
विज्ञापन
सीजेरियन मामलों में महिलाओं को कोविड संदिग्ध मैटरनिटी ओटी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उनमें सांस लेने की कठिनाई आदि की समय समय पर जांच की जाएगी। प्रोफेसर खान ने बताया कि अब तक की निगरानी से पता चला है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण की दर इस बीमारी से संक्रमित सामान्य महिलाओं के मुकाबले बहुत कम है। इसके बावजूद प्रसूति के दौरान होने वाले संक्रमण का खतरा मोल नहीं लिया जा सकता। दिशा-निर्देशों में रोगी की स्थिति के अनुरूप उन्हें ऐस्प्रिन, टोकोलाइसिस तथा मैग्नीशियम सल्फेट कम डोज में प्रयोग करना सही बताया गया है। आईब्रूफेन तथा इंडोमेथासिन के प्रयोग को सख्ती से मना किया गया है।
विज्ञापन