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Aligarh News: भारत का 99वां रामसर स्थल बना अलीगढ़ का शेखा झील पक्षी अभयारण्य

Thu, 23 Apr 2026 03:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 03:00 AM IST
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Shekha Lake Bird Sanctuary in Aligarh becomes India's 99th Ramsar site
शेखा झील के किनारे विदेशी पक्षी। - फोटो : samvad
देशी-विदेशी परिंदों की चहचहाहट से गुलजार अलीगढ़ का शेखा झील पक्षी अभयारण्य अब अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुका है। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित किए जाने की जानकारी दी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
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केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि शेखा झील का रामसर स्थलों की सूची में शामिल होना देश की जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका और जलवायु सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह नए उत्तर प्रदेश की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह स्थल पारिस्थितिकी संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा करेगा।
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दरअसल रामसर स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व की ऐसी आर्द्रभूमियां हैं, जिन्हें 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत उनके विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता और जलपक्षियों के संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है। ये झील, दलदल, या मैंग्रोव हो सकते हैं, जो हजारों जलपक्षियों या संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर स्थल घोषित होने के बाद झील के संरक्षण कार्यों को और मजबूती मिलेगी। इससे न सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होगा, बल्कि पक्षी प्रेमी पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
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1850 में आकार लेने लगी थी शेखा झील
अलीगढ़ की शेखा झील का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप 1850 में अपर गंगा नहर के निर्माण के बाद विकसित हुआ। वर्ष 1977 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी डॉ. सालिम अली ने एएमयू दौरे के दौरान इसके पारिस्थितिक महत्व को चिन्हित किया, जिसके बाद यह पक्षी प्रेमियों के लिए प्रमुख स्थल बन गया।



वर्ष 2016 में इसे पक्षी विहार घोषित किया गया। करीब 40.309 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह झील प्रवासी पक्षियों के मध्य एशियाई उड़ान मार्ग का अहम पड़ाव मानी जाती है। सर्दियों के मौसम में यहां बगुला हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रजातियों की बत्तखें बड़ी संख्या में आती हैं। यह झील चीन, रूस, श्रीलंका, भूटान, पोलैंड और साइबेरिया सहित कई देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना है। ये पक्षी हर साल लगभग चार हजार से दस हजार किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं।
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