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अलीगढ़: सांप को पकड़ते में गंध से बेहोश हुआ युवक, अस्पताल में भर्ती, कोबरा डिब्बे में कर लिया बंद

Sat, 12 Sep 2026 03:51 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 12 Sep 2026 03:51 PM IST
सार

वन विभाग के रेंजर बताते हैं कि जब कोबरा को खतरा महसूस होता है तो वह अपनी पूंछ के पास स्थित ग्रंथियों से कस्तूरी नामक एक दुर्गंधयुक्त तरल पदार्थ छोड़ सकते हैं। इस कस्तूरी की गंध (कस्तूरी जैसी अथवा तीखी) होती है, लेकिन यह इतनी जहरीली नहीं या तेज नहीं होती कि किसी इन्सान को बेहोश कर दे अथवा वह इन्सान चेतना खो दे।

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young man fainted from the smell while trying to catch a snake
युवक का उपचार व डिब्बे में बंद सांप - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

विषैले सांपों को पकड़ने में माहिर धीमई (डिबाई) गांव निवासी सूर्यकांत पड़ोसी गांव चालाकपुर में यशपाल के घेर में निकले कोबरा सांप को पकड़ने पहुंचे थे। उसे पकड़कर डिब्बे में बंद कर लिया। इस दौरान कोबरा सांप द्वारा छोड़े गए मल-मूत्र की दुर्गंध उनके दिमाग पर इस कदर चढ़ी कि बेहोशी छाने लगी। तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के बाद उन्हें आराम मिला।

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घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे की है। चालाकपुर गांव निवासी यशपाल के अनुसार उनके घेर में रखे बिटोरा के पास कोबरा सांप बैठा था। इस पर उन्होंने पड़ोसी गांव धीमई निवासी सूर्यकांत को सूचना दी। वह सांप पकड़ने में माहिर हैं। दोपहर करीब 12 बजे सूर्यकांत उनके घेर पर पहुंचे। करीब आधा घंटे की मशक्कत के बाद सूर्यकांत ने कोबरा सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया। सूर्यकांत ने बताया कि इसी बीच सांप की छोड़ी गई दुर्गंध उनके दिमाग में ऐसी चढ़ी कि बेहोशी छाने लगी।
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उन्होंने तत्काल अस्पताल पहुंचाने की बात कही। इस पर एक बाइक में साथी सहित उन्हें बिठाकर अतरौली के सौ शैया अस्पताल ले जाया गया। दोपहर करीब 12.55 बजे वह अस्पताल पहुंचे जहां भर्ती कर इलाज शुरू हुआ। ड्रिप आदि लगाई गई। अस्पताल के डॉ. सुल्तान अहमद ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद युवक की हालत खतरे से बाहर हो गई। पूरी तरह आराम मिलने पर वह दोपहर करीब 2.20 बजे अपने घर चले गए।

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कस्तूरी स्राव छोड़ते हैं कोबरा
वन विभाग के रेंजर बताते हैं कि जब कोबरा को खतरा महसूस होता है तो वह अपनी पूंछ के पास स्थित ग्रंथियों से कस्तूरी नामक एक दुर्गंधयुक्त तरल पदार्थ छोड़ सकते हैं। इस कस्तूरी की गंध (कस्तूरी जैसी अथवा तीखी) होती है, लेकिन यह इतनी जहरीली नहीं या तेज नहीं होती कि किसी इन्सान को बेहोश कर दे अथवा वह इन्सान चेतना खो दे।

मनोवैज्ञानिक बेहोशी
कोई व्यक्ति कोबरा के आसपास अत्यधिक भय, घबराहट या सदमे के कारण बेहोश हो सकता है, अथवा चक्कर महसूस कर सकता है। लेकिन यह भावनात्मक प्रतिक्रिया है न कि गंध का रासायनिक प्रभाव।

पारिस्थितिकी संतुलन के लिए सांप जरूरी
होश में आने के बाद सूर्यकांत ने बताया कि वह लंबे समय से सांपों को पकड़कर उन्हें बचाने का काम कर रहे हैं। वह सांप को जिंदा पकड़ते हैं और जंगल में छोड़ देते हैं ताकि कोई उन्हें मारे नहीं। कहा कि पृथ्वी के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए सांप बेहद जरूरी हैं।

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