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साफ्टवेयर से तय होगा पंचायत चुनावों का आरक्षण
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिये जिले का अंतिम परिसीमन जारी होने के बाद ग्राम, क्षेत्र एवं जिला पंचायतों के वार्डों के आरक्षण पर सभी की नजर है। इसके बीच शासन ने पंचायत चुनाव 2020 नाम से एक साफ्टवेयर तैयार किया है। इसमें वर्ष 1995 से लेकर वर्ष 2015 तक हुए पांच पंचायत चुनावों का डाटा दर्ज है। माना जा रहा है कि इसी साफ्टवेयर के डाटा में उलटफेर कर आरक्षण तय किया जा सकता है।
पंचायत चुनावों का बिगुल बज चुका है। संभवत: अप्रैल में होने जा रहे इन चुनावों के लिए प्रत्याशी एवं उनके रणनीतिकार तैयार हैं। सभी की निगाहें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के वार्डों की आरक्षण पर टिकी हैं। दरअसल, आरक्षण से ही उनके चुनाव की दशा एवं दिशा का निर्धारण होना है। इस बीच शासन ने पंचायत चुनाव 2020 नाम से एक साफ्टवेयर जारी किया है। सभी जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारियों को वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 एवं वर्ष 2015 में जिलास्तर पर लागू किए गए आरक्षण का ब्योरा देने के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि इसी साफ्टवेयर में दर्ज आरक्षण का ब्योरा देखकर वर्ष 2021 के पंचायत चुनावों का आरक्षण किया जाएगा।
जिला पंचायत राज अधिकारी पारुल सिसौदिया ने बताया कि शासन ने वर्ष 1995 से लेकर वर्ष 2015 तक के पंचायत चुनावों में जिले के आरक्षण का ब्योरा साफ्टवेयर पर मांगा था। इसे फीड करा दिया गया है। आरक्षण इसी के आधार पर या किसी अन्य मानक पर निदेशालय अथवा जिला स्तर पर तय होगा, इसके बारे में फिलहाल कोई भी आदेश जारी नहीं कि या गया है।
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पंचायत चुनावों का बिगुल बज चुका है। संभवत: अप्रैल में होने जा रहे इन चुनावों के लिए प्रत्याशी एवं उनके रणनीतिकार तैयार हैं। सभी की निगाहें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के वार्डों की आरक्षण पर टिकी हैं। दरअसल, आरक्षण से ही उनके चुनाव की दशा एवं दिशा का निर्धारण होना है। इस बीच शासन ने पंचायत चुनाव 2020 नाम से एक साफ्टवेयर जारी किया है। सभी जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारियों को वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 एवं वर्ष 2015 में जिलास्तर पर लागू किए गए आरक्षण का ब्योरा देने के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि इसी साफ्टवेयर में दर्ज आरक्षण का ब्योरा देखकर वर्ष 2021 के पंचायत चुनावों का आरक्षण किया जाएगा।
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जिला पंचायत राज अधिकारी पारुल सिसौदिया ने बताया कि शासन ने वर्ष 1995 से लेकर वर्ष 2015 तक के पंचायत चुनावों में जिले के आरक्षण का ब्योरा साफ्टवेयर पर मांगा था। इसे फीड करा दिया गया है। आरक्षण इसी के आधार पर या किसी अन्य मानक पर निदेशालय अथवा जिला स्तर पर तय होगा, इसके बारे में फिलहाल कोई भी आदेश जारी नहीं कि या गया है।
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