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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Recommendations from Gujarat to Lucknow yet AMU did not get two yards of land for Grave

UP: गुजरात से लखनऊ तक सिफारिशें, फिर भी AMU में नहीं मिली दो गज जमीन; पिता की कब्र के पास चाहता था दफन होना

Tue, 11 Feb 2025 06:24 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 11 Feb 2025 06:24 PM IST
सार

एएमयू के पूर्व शिक्षक के बेटे का सऊदी अरब में इंतकाल हुआ था। बेटा ने पिता की कब्र के पास ही दफन होने की आखिरी इच्छा जताई थी।

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Recommendations from Gujarat to Lucknow yet AMU did not get two yards of land for Grave
नियम के कारण एएमयू में बेटे की लाश नहीं दफनाई जा सकी - फोटो : adobe stock

विस्तार

पहले गुजरात के डीजीपी ऑफिस से सिफारिश लगी। फिर यूपी सरकार के अफसरों की तरफ से बात की गई। लेकिन एएमयू ने नियमों का हवाला देते हुए पूर्व शिक्षक के बेटे को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में दो गज जमीन नहीं दी। दरअसल पूर्व शिक्षक के 50 वर्षीय बेटे का रविवार को सऊदी अरब में इंतकाल हुआ था। बेटे की आखिरी इच्छा थी कि एएमयू के कब्रिस्तान में बनी उनके पिता की कब्र के पास ही उनकी कब्र बनाई जाए। इस इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार वालों ने पूरा जोर लगाया, लेकिन इसमें एएमयू के नियम आड़े आ गए और सोमवार की रात एएमयू से बाहर स्थित कब्रिस्तान में शव को दफनाया गया।

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'मेरा शव पिता की कब्र के पास दफनाया जाए'
एएमयू के पूर्व शिक्षक का कुछ समय पहले इंतकाल हो गया था। उनका शव एएमयू के पॉलिटेक्निक विभाग के पास बने कब्रिस्तान में दफनाया गया था। इनके बेटे इस समय सऊदी अरब में रहते थे। रविवार को वहां उनका इंतकाल हो गया। उन्होंने अपने परिजनों से आखिरी इच्छा जताई थी कि इंतकाल के बाद उनका शव भी एएमयू में पिता की कब्र के पास दफनाया जाए। बताया जाता है कि परिजनों के परिचित गुजरात के डीजीपी ऑफिस में हैं, जहां इसकी जानकारी दी गई और वहां से यूपी सरकार तक सिफारिश लगवाई गई, जिससे एएमयू में पिता की कब्र के पास ही बेटे का शव दफनाया जा सके। शासन से अलीगढ़ प्रशासन को जानकारी दी गई। प्रशासन ने एएमयू से संपर्क किया, लेकिन एएमयू के नियम आड़े आ गए।

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हाईप्रोफाइल मामले की एएमयू में दिनभर रही चर्चा
लखनऊ से अलीगढ़ जिलाधिकारी कार्यालय में फोन आने के बाद से ही इस मामले की चर्चा शुरू हो गई। डीएम ऑफिस से इस संबंध में एएमयू प्रशासन को जानकारी दी गई, जिसके बाद एएमयू में कब्रिस्तान से संबंधित नियम पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि नियम के अनुसार पूर्व शिक्षक के बेटे के शव को एएमयू में दफन नहीं किया जा सकता, यह जानकारी एएमयू प्रशासन ने अलीगढ़ प्रशासन को दे दी। चूंकि गुजरात से एएमयू तक इस मामले में फोन घनघनाए इसलिए यह हाईप्रोफाइल मामला एएमयू में दिनभर चर्चा में रहा।

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शव दफनाने का यह है नियम
एएमयू के कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए बने नियम के अनुसार एएमयू की मेडिकल अटेंडेंस स्कीम (स्वास्थ्य योजना) का लाभ लेने वाले व्यक्ति, उनकी पत्नी अथवा उनके नाबालिग बच्चों के शव ही यहां दफनाए जा सकते हैं। इनके अतिरिक्त किसी व्यक्ति का शव एएमयू के कब्रिस्तान में नहीं दफनाया जा सकता। यह नियम पिछले करीब 20 साल से लागू है। - जीशान अहमद, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

एएमयू के कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए नियम बने हैं, जिसके तहत शव दफनाए जाते हैं। पूर्व शिक्षक के बेटे के इंतकाल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। - विभा शर्मा, एमआईसी पीआरओ, एएमयू
करीब 20 साल पहले एएमयू के कब्रिस्तान में शवों को दफनाने को लेकर गाइड लाइन तैयार की गई, जिसके तहत ऐसा संभव नहीं था। अब कब्रिस्तान में ज्यादा जगह भी नहीं है। - प्रो. रजाउल्लाह खां, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल पॉलिटेक्निक एएमयू

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