Aligarh: दो साल में 18 हजार कुत्तों की नसबंदी, पैदा हो गए 10 हजार, नसबंदी प्रक्रिया पर खड़े हो रहे सवाल
अलीगढ़ में मई 2023 में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर शुरू हुआ था। तब से ही शहर में आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी की जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुत्तों की आबादी फिर भी तेजी के साथ बढ़ रही है।
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अलीगढ़ में पिछले दो साल में 18 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। यह दावा नगर निगम द्वारा संचालित एनिमल बर्थ सेंटर का है। वहीं हर साल पैदा होने वाले कुत्तों की एक अनुमानित संख्या दस हजार बताई जा रही है। कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या भी नसबंदी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है।
अलीगढ़ में मई 2023 में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर शुरू हुआ था। तब से ही अलीगढ़ में आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी की जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुत्तों की आबादी फिर भी तेजी के साथ बढ़ रही है। महानगर में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या साठ हजार के करीब है।
हमें कुत्तों से कोई परेशानी नहीं लेकिन जब वह हिंसक हो जाते हैं और काटने लगते हैं तो फिर उनसे छुटकारा पाना ही उपाय लगता है। - सुनील, नौरंगाबाद
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कुछ लोग कुत्तों को खाना आदि देकर उनके प्रति सहानुभूति दिखाते हैं लेकिन जब वही कुत्ते वाहन चालकों पर दौड़ते हैं तो खाना खिलाने वाले दिखाई नहीं देते। - मुश्ताक अहमद, भुजपुरा
यह सही है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी की रफ्तार धीमी है। इसे तेज करने के प्रयास किए जाएंगे। आक्रामक कुत्तों को स्थायी रूप से रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। भोजन समर्पित स्थल बनाने को लेकर नगर विकास विभाग का जैसा आदेश होगा उसके अनुसार काम किया जाएगा। - डॉ. राजेश कुमार, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाएगा। शेल्टर होम में सिर्फ आक्रामक और बीमार कुत्ते रखे जाएंगे, बाकी को छोड़ा जाएगा। फैसले के दायरे में सभी राज्यों को लिया। नगर निगमों को आदेश कि वह भोजन समर्पित स्थल बनाएं। सार्वजनिक स्थान पर कुत्तों को खाना खिलाने से अगर कोई सरकारी कर्मचारी रोक रहा है और अगर उसका विरोध कोई एनजीओ कर रही है तो उस पर दो लाख जुर्माना, कोई व्यक्ति कर रहा है तो उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।
प्रतिदिन औसतन 800 लोगों को लगता है रैबीज इंजेक्शन
मलखान सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 210 लोग रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं। इसी तरह दीन दयाल संयुक्त अस्पताल में 190 और जिले की 16 सीएचसी पर 400 एंटी रैबीज इंजेक्शन लगते हैं। इस तरह प्रतिदिन औसतन 800 लोगों को रैबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें वह मामले भी शामिल हैं जो कुत्ते के काटने के बाद दूसरी, तीसरी या चौथी बार इंजेक्शन लगवा रहे होते हैं।
डॉग वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा नसबंदी की रफ्तार धीमी
द अलीगढ़ डॉग वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव संदीप नक्षत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहते हैं कि एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के द्वारा नसबंदी की रफ्तार बहुत धीमी है। जो दावे किए जाते हैं वह भी धरातल पर नहीं हैं। अगर नसबंदी की प्रकिया सही हो तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है।