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जमीन की खरीद कम, राजस्व आय का निकल रहा दम
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sat, 30 Jul 2016 01:26 AM IST
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एक जून 2014 से लागू हुआ आयकर विभाग के एक अधिनियम ने जमीनों की खरीदफरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। इस अधिनियम के तहत 20 हजार से ऊपर का ट्रांजेक्शन बैंक के माध्यम से करने का प्रावधान है। जिससे रजिस्ट्री नहीं हो रही है और निबंधन विभाग की आय बहुत कम रह गई है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस वित्तीय वर्ष में सर्किल रेट बढ़ने से पहले मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए बहुत कम लोग ही सामने आए। बेनामे कम होने से जुलाई माह में निबंधन विभाग की आय लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 48 से 49 फीसदी रह गई।
एक जून 2014 को लागू हुए आयकर अधिनियम में 20 हजार से ज्यादा का ट्रांजेक्शन आरटीजीएस के माध्यम से करने का प्रावधान है। यही नहीं आयकर विभाग किसी भी भूमि की खरीद का आकलन वास्तविक मूल्य से कर 30 प्रतिशत तक कर लेता है। इससे सर्किल रेटों से कम रेटों पर होने वाले सौदों में दिक्कतें बढ़ गईं। विक्रेता एवं क्रेता दोनों ही आयकर के दायरे में आ गए।
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मसलन यदि दो व्यक्ति दस हजार रुपये प्रति वर्ग के रेटों की जमीन में से 100 वर्ग गज जमीन का सौदा आपसी सहमति से छह लाख रुपये में करते हैं तो आयकर विभाग उस जमीन को सर्किल रेटों के आधार पर दस लाख मानते हुए बीच के चार लाख के गैप को नकारकर दस लाख पर ही आयकर की वसूली करेगा।
गिरते बेनामों और आय से चिंतित प्रशासन ने इस बार के नए सर्किल रेट तय करते समय सर्किल दरों में पांच से बीस फीसदी की ही बढ़ोत्तरी की। अतरौली, गभाना एवं इगलास तहसील में तो कई जमीनों के रेट यथावत रखे गए तो कई की दरें मात्र दो से पांच फीसदी तक ही बढ़ाई।
शहरी इलाके में भी मैरिस रोड, जीटी रोड एवं एक अन्य स्थान के रेट यथावत रखे तो ज्यादातर स्थानों पर रेट मात्र पांच से दस फीसदी तक ही बढ़ाए। चंद विकासशील इलाकों में ही 15 से 20 फीसदी रेट बढ़े।
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हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस वित्तीय वर्ष में सर्किल रेट बढ़ने से पहले मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए बहुत कम लोग ही सामने आए। बेनामे कम होने से जुलाई माह में निबंधन विभाग की आय लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 48 से 49 फीसदी रह गई।
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एक जून 2014 को लागू हुए आयकर अधिनियम में 20 हजार से ज्यादा का ट्रांजेक्शन आरटीजीएस के माध्यम से करने का प्रावधान है। यही नहीं आयकर विभाग किसी भी भूमि की खरीद का आकलन वास्तविक मूल्य से कर 30 प्रतिशत तक कर लेता है। इससे सर्किल रेटों से कम रेटों पर होने वाले सौदों में दिक्कतें बढ़ गईं। विक्रेता एवं क्रेता दोनों ही आयकर के दायरे में आ गए।
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मसलन यदि दो व्यक्ति दस हजार रुपये प्रति वर्ग के रेटों की जमीन में से 100 वर्ग गज जमीन का सौदा आपसी सहमति से छह लाख रुपये में करते हैं तो आयकर विभाग उस जमीन को सर्किल रेटों के आधार पर दस लाख मानते हुए बीच के चार लाख के गैप को नकारकर दस लाख पर ही आयकर की वसूली करेगा।
गिरते बेनामों और आय से चिंतित प्रशासन ने इस बार के नए सर्किल रेट तय करते समय सर्किल दरों में पांच से बीस फीसदी की ही बढ़ोत्तरी की। अतरौली, गभाना एवं इगलास तहसील में तो कई जमीनों के रेट यथावत रखे गए तो कई की दरें मात्र दो से पांच फीसदी तक ही बढ़ाई।
शहरी इलाके में भी मैरिस रोड, जीटी रोड एवं एक अन्य स्थान के रेट यथावत रखे तो ज्यादातर स्थानों पर रेट मात्र पांच से दस फीसदी तक ही बढ़ाए। चंद विकासशील इलाकों में ही 15 से 20 फीसदी रेट बढ़े।