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सीएए का विरोधः महिलाओं और बच्चों ने जाम लगाकर किया प्रदर्शन
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शाहजमाल ईदगाह पर सीएए व एनआरसी के विरोध में धरने पर बैठी महिलाएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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सीएए और एनआरसी के विरोध में लगातार पांच दिन से शाहजमाल में चल रहे धरने के बीच रविवार को भुजपुरा से करीब 200-250 महिलाएं और बच्चे हाथों में तिरंगा लिए पुराने बाईपास स्थित मथुरा रोड पुल पर धरना देने पहुंच गए और पुल के नीचे बैठकर जाम लगा दिया। यह भनक लगते ही पुलिस के हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन तीन थानों का फोर्स क्यूआरटी सहित मौके पर पहुंच गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें वहां से वापस भेजा गया। बाद में यहां से यह लोग जुलूस निकालते हुए शाहजमाल पर पहुंचे और वहां धरने में शामिल हो गए।
वाकया सुबह 10 बजे करीब का है। पुलिस शाहजमाल में महिलाओं के प्रदर्शन को संभालने में लगी थी। इसी बीच भुजपुरा इलाके की महिलाएं और बच्चे जुलूस निकालते हुए पुराने बाईपास मथुरा रोड पुल पर पहुंच गए। महिलाओं ने यहां नारेबाजी शुरू कर धरना देते हुए बीच सड़क पर जाम लगा दिया। चूंकि, नया बाईपास बनने से यहां यातायात कम रहता है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। बच्चों के हाथों में विरोध की तख्तियां और तिरंगा थे। सूचना पर तत्काल थाना ऊपरकोट, सासनी गेट व देहली गेट की पुलिस पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने जैसे-तैसे कर भीड़ को संभाला। महिलाओं से कहा कि अगर उनको विरोध करना है तो वह शाहजमाल जा सकती हैं। अगर, बाईपास को जाम कराने की कोशिश की तो पुलिस अपने हिसाब से कार्रवाई कर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करेगी। चेतावनी पर महिलाएं वहां से हटकर बगल में खेतों में जाकर बैठ गईं। करीब एक घंटे तक वहां बैठी रहीं। बाद में किसी तरह समझा बुझाकर दोपहर करीब 12 बजे उन्हें वहां से वापस भेजा गया और वह जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए शाहजमाल पहुंच गई और धरने में शामिल हो गई। इंस्पेक्टर कोतवाली रविंद्र सिंह के मुताबिक प्रदर्शन करने आए लोगों को समझाकर वापस कर दिया गया। इनके नेतृत्व कर्ताओं को चिह्नित किया जा रहा है।
शाहजमाल में नहीं मिला महत्व तो खुद निकाला जुलूस
इस जुलूस को लेकर अंदरखाने जो बात सामने आई, उसे सुनकर हर कोई हैरान था। कहा जा रहा है कि शाहजमाल के धरने में पहले दिन महत्वपूर्ण भूमिका भुजपुरा की महिलाओं ने ही निभाई थी। कहा जाए तो शाहजमाल का धरना भुजपुरा से पहुंची महिलाओं ने ही जमाया था। वहां जब धरना जम गया और फिर शहर भर से महिलाएं पहुंचने लगीं तो वहां भुजपुरा की महिलाओं को महत्व मिलना कम हो गया। इससे खफा होकर भुजपुरा की महिलाओं ने अपना अलग धरना सजाने की तैयारी कर ली। इसी रणनीति के तहत सुबह सुबह भुजपुरा से महिलाएं निकलकर मथुरा पुल के नीचे धरना जमाने पहुंची थीं। मगर वह अपनी इस मंशा में कामयाब नहीं हुई।
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वाकया सुबह 10 बजे करीब का है। पुलिस शाहजमाल में महिलाओं के प्रदर्शन को संभालने में लगी थी। इसी बीच भुजपुरा इलाके की महिलाएं और बच्चे जुलूस निकालते हुए पुराने बाईपास मथुरा रोड पुल पर पहुंच गए। महिलाओं ने यहां नारेबाजी शुरू कर धरना देते हुए बीच सड़क पर जाम लगा दिया। चूंकि, नया बाईपास बनने से यहां यातायात कम रहता है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। बच्चों के हाथों में विरोध की तख्तियां और तिरंगा थे। सूचना पर तत्काल थाना ऊपरकोट, सासनी गेट व देहली गेट की पुलिस पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने जैसे-तैसे कर भीड़ को संभाला। महिलाओं से कहा कि अगर उनको विरोध करना है तो वह शाहजमाल जा सकती हैं। अगर, बाईपास को जाम कराने की कोशिश की तो पुलिस अपने हिसाब से कार्रवाई कर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करेगी। चेतावनी पर महिलाएं वहां से हटकर बगल में खेतों में जाकर बैठ गईं। करीब एक घंटे तक वहां बैठी रहीं। बाद में किसी तरह समझा बुझाकर दोपहर करीब 12 बजे उन्हें वहां से वापस भेजा गया और वह जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए शाहजमाल पहुंच गई और धरने में शामिल हो गई। इंस्पेक्टर कोतवाली रविंद्र सिंह के मुताबिक प्रदर्शन करने आए लोगों को समझाकर वापस कर दिया गया। इनके नेतृत्व कर्ताओं को चिह्नित किया जा रहा है।
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शाहजमाल में नहीं मिला महत्व तो खुद निकाला जुलूस
इस जुलूस को लेकर अंदरखाने जो बात सामने आई, उसे सुनकर हर कोई हैरान था। कहा जा रहा है कि शाहजमाल के धरने में पहले दिन महत्वपूर्ण भूमिका भुजपुरा की महिलाओं ने ही निभाई थी। कहा जाए तो शाहजमाल का धरना भुजपुरा से पहुंची महिलाओं ने ही जमाया था। वहां जब धरना जम गया और फिर शहर भर से महिलाएं पहुंचने लगीं तो वहां भुजपुरा की महिलाओं को महत्व मिलना कम हो गया। इससे खफा होकर भुजपुरा की महिलाओं ने अपना अलग धरना सजाने की तैयारी कर ली। इसी रणनीति के तहत सुबह सुबह भुजपुरा से महिलाएं निकलकर मथुरा पुल के नीचे धरना जमाने पहुंची थीं। मगर वह अपनी इस मंशा में कामयाब नहीं हुई।
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